No UPI Day: 2 अक्टूबर को व्यापारी मनाएंगे ‘नो UPI डे’

2 अक्टूबर को व्यापारी मनाएंगे ‘नो UPI डे’
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Ishaan Tiwari

Ishaan Tiwari

1 घंटे पहले

Economy par iska kya asar padega, sochne wali baat hai.

Nidhi kumari

Nidhi kumari

2 घंटे पहले

Crypto mein invest karne se pehle aisi khabarein padhni chahiye.

Aryan Malhotra

Aryan Malhotra

4 घंटे पहले

Economy par iska kya asar padega, sochne wali baat hai.

Simran Arora

Simran Arora

4 घंटे पहले

RBI aur government ko milkar iska hal nikalna chahiye.

Yash Kulkarni

Yash Kulkarni

5 घंटे पहले

Business world mein yeh ek badi halachal hai.

Kabir Shukla

Kabir Shukla

7 घंटे पहले

Business world mein yeh ek badi halachal hai.

Pihu Agarwal

Pihu Agarwal

7 घंटे पहले

Market mein itna uthar-chadhaav, investors pareshan hain.

Yash Kulkarni

Yash Kulkarni

9 घंटे पहले

Share market pe nazar rakhna zaroori ho gaya hai.

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नो UPI डे
देशभर के कई व्यापारी संगठन 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के दिन ‘नो UPI डे’ मनाने की तैयारी कर रहे हैं। यह विरोध 15 अक्टूबर से लागू होने वाले प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के खिलाफ है। प्रस्ताव के अनुसार 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर यह शुल्क लागू होना है।

 

व्यापारियों का विरोध

व्यापारी संगठन MDR शुल्क का विरोध करते हुए 2 अक्टूबर को UPI QR कोड, स्कैनर, साउंड बॉक्स और डिजिटल पेमेंट से जुड़े अन्य उपकरणों को काले कपड़े से ढककर अपना विरोध दर्ज कराने की बात कह रहे हैं।
 

 

कई संगठन शामिल

इस अभियान में महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MCCIA), ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF), अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ, ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन, ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) और फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन समेत कई कारोबारी संगठनों के शामिल होने की बात कही गई है।

 

 

सरकार की बैठक

MDR शुल्क को लेकर सरकार जल्द ही खुदरा कारोबारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सकती है। कारोबारियों की ओर से यह चिंता जताई गई है कि 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर लगने वाला शुल्क ग्राहकों से वसूला जा सकता है। वहीं सरकारी सूत्रों के अनुसार इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर डालने की अनुमति नहीं होगी।

 

 

15 अक्टूबर से प्रस्तावित शुल्क

सरकारी सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) समेत अन्य कारोबारी संगठनों के साथ बैठक कर सकते हैं। इसका उद्देश्य MDR को लेकर बनी आशंकाओं को दूर करना और कारोबारियों को ग्राहकों से शुल्क वसूलने से रोकना है।

 

 

बैंकों का जागरूकता अभियान

इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) भी MDR को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य दुकानदारों और ग्राहकों के बीच शुल्क को लेकर भ्रम कम करना बताया गया है। कुछ क्षेत्रों में MDR के नाम पर दुकानदारों द्वारा UPI भुगतान स्वीकार नहीं किए जाने की शिकायतों के बाद यह कदम उठाया जा रहा है।

 

 

पेट्रोल पंपों का मामला

कुछ जगहों पर पेट्रोल पंपों द्वारा भी UPI भुगतान को लेकर आपत्ति जताई गई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार पेट्रोल पंपों से जुड़ा मुद्दा मुख्य रूप से उनके मार्जिन और पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों के बीच का विषय है। इसे सीधे UPI MDR शुल्क से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

 

 

MDR की राशि का बंटवारा

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR में 40 प्रतिशत राशि बैंकों, 30 प्रतिशत मर्चेंट बैंक या पेमेंट गेटवे, 20 प्रतिशत UPI ऐप और 10 प्रतिशत UPI के स्पॉन्सर बैंक को मिलने की व्यवस्था बताई गई है। सरकार को इस शुल्क से कोई हिस्सा नहीं मिलने की बात कही गई है।

 

टैक्स नहीं है MDR

सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि MDR न तो टैक्स है, न सेस और न ही सरचार्ज। हालांकि MDR पर 18 प्रतिशत GST को लेकर यदि आम लोगों पर किसी तरह का प्रभाव पड़ता है, तो GST काउंसिल इस पर आगे निर्णय ले सकती है।

 

 

ग्राहकों पर असर

फिलहाल मुख्य विवाद इस बात को लेकर है कि MDR का आर्थिक बोझ किस पर पड़ेगा। सरकारी पक्ष के अनुसार ग्राहकों से यह शुल्क अलग से वसूलने की अनुमति नहीं होगी, जबकि व्यापारी संगठन प्रस्तावित शुल्क का ही विरोध कर रहे हैं।

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Ishaan Tiwari

Ishaan Tiwari

1 घंटे पहले

Economy par iska kya asar padega, sochne wali baat hai.

Nidhi kumari

Nidhi kumari

2 घंटे पहले

Crypto mein invest karne se pehle aisi khabarein padhni chahiye.

Aryan Malhotra

Aryan Malhotra

4 घंटे पहले

Economy par iska kya asar padega, sochne wali baat hai.

Simran Arora

Simran Arora

4 घंटे पहले

RBI aur government ko milkar iska hal nikalna chahiye.

Yash Kulkarni

Yash Kulkarni

5 घंटे पहले

Business world mein yeh ek badi halachal hai.

Kabir Shukla

Kabir Shukla

7 घंटे पहले

Business world mein yeh ek badi halachal hai.

Pihu Agarwal

Pihu Agarwal

7 घंटे पहले

Market mein itna uthar-chadhaav, investors pareshan hain.

Yash Kulkarni

Yash Kulkarni

9 घंटे पहले

Share market pe nazar rakhna zaroori ho gaya hai.

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