AI और Deepfake से बढ़ा Sextortion का खतरा: एक वीडियो कॉल कैसे बन सकती है ब्लैकमेल का हथियार

Kunal Rao
0 सेकंड पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Dev Kapoor
0 सेकंड पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Ananya Sharma
0 सेकंड पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। इन्हीं अपराधों में सबसे खतरनाक और तेजी से बढ़ते साइबर फ्रॉड में सेक्सटॉर्शन (Sextortion) शामिल है। इस अपराध में जालसाज किसी व्यक्ति की निजी तस्वीर, वीडियो या AI द्वारा तैयार किए गए फर्जी अश्लील कंटेंट का इस्तेमाल कर उसे ब्लैकमेल करते हैं और बदले में पैसों की मांग करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, AI आधारित Deepfake और Nudifier टूल्स के आने से यह अपराध पहले की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक हो गया है।
क्या है सेक्सटॉर्शन?
सेक्सटॉर्शन एक डिजिटल ब्लैकमेलिंग अपराध है, जिसमें अपराधी पीड़ित की वास्तविक या AI से बनाई गई आपत्तिजनक तस्वीरें अथवा वीडियो सोशल मीडिया, परिवार, दोस्तों या सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर वायरल करने की धमकी देकर धन उगाही करता है। कई मामलों में अपराधी के पास वास्तविक सामग्री भी नहीं होती, लेकिन डर और शर्मिंदगी का फायदा उठाकर लोगों से पैसे ऐंठ लेते हैं।
कैसे फंसाते हैं साइबर ठग? (Modus Operandi)
साइबर अपराधी सबसे पहले फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, डेटिंग ऐप्स या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक फर्जी प्रोफाइल बनाते हैं। दोस्ती बढ़ाने के बाद अचानक वीडियो कॉल करते हैं। कॉल रिसीव करते ही स्क्रीन पर अश्लील वीडियो चला दिया जाता है और उसी दौरान पीड़ित का चेहरा रिकॉर्ड कर लिया जाता है।
कई मामलों में अपराधी केवल सोशल मीडिया से ली गई सामान्य फोटो का उपयोग कर AI Deepfake या Nudifier तकनीक से नकली अश्लील तस्वीरें तैयार कर देते हैं। इसके बाद वे इन्हें वायरल करने की धमकी देकर बैंक खाते, UPI या क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से मोटी रकम की मांग करते हैं।
AI और Deepfake ने क्यों बढ़ा दिया खतरा?
विशेषज्ञों का कहना है कि अब अपराधियों को किसी व्यक्ति की वास्तविक निजी तस्वीर की भी आवश्यकता नहीं होती। सोशल मीडिया पर उपलब्ध सामान्य फोटो के आधार पर AI टूल्स कुछ ही मिनटों में बेहद वास्तविक दिखने वाले फर्जी वीडियो और तस्वीरें तैयार कर सकते हैं। यही वजह है कि आम नागरिक, डॉक्टर, व्यापारी, सरकारी कर्मचारी और किशोर सबसे अधिक निशाने पर हैं।
सेक्सटॉर्शन से बचने के लिए क्या करें?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ निम्नलिखित सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं—
- किसी भी अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल रिसीव न करें।
- सोशल मीडिया पर केवल सत्यापित लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करें।
- किसी भी ऑनलाइन मित्र के साथ निजी फोटो, वीडियो या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
- अपने सभी ऑनलाइन खातों के लिए अलग-अलग और मजबूत पासवर्ड रखें तथा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू रखें।
- लैपटॉप या कंप्यूटर का वेबकैम उपयोग न होने पर ढककर रखें।
- सोशल मीडिया की प्राइवेसी सेटिंग्स को सुरक्षित रखें ताकि आपकी तस्वीरों का दुरुपयोग न हो सके।
अगर ब्लैकमेल का शिकार हो जाएं तो क्या करें?
यदि कोई व्यक्ति सेक्सटॉर्शन का शिकार हो जाता है तो सबसे पहले घबराने की बजाय शांत रहें। अपराधी को किसी भी स्थिति में पैसे न भेजें और न ही उसके संदेशों का जवाब दें। ब्लैकमेल से जुड़े सभी चैट, स्क्रीनशॉट, बैंक ट्रांजैक्शन और मोबाइल नंबर सुरक्षित रखें क्योंकि यही आगे जांच में महत्वपूर्ण सबूत बनते हैं। संबंधित नंबर को तुरंत ब्लॉक करें और कानूनी कार्रवाई शुरू करें।
कहां करें शिकायत?
भारत सरकार साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने के लिए कई आधिकारिक माध्यम उपलब्ध कराती है।
- राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन: 1930 पर तुरंत कॉल करें।
- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल: ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
- संचार साथी पोर्टल (Chakshu): संदिग्ध मोबाइल नंबर और फर्जी कॉल की रिपोर्ट करें।
- स्थानीय साइबर क्राइम थाना या पुलिस स्टेशन: आईटी एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराएं।
विशेषज्ञों की सलाह
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि सेक्सटॉर्शन का सबसे बड़ा हथियार पीड़ित का डर और सामाजिक शर्म होती है। इसलिए किसी भी धमकी से घबराकर पैसे भेजने की बजाय कानूनी सहायता लें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें। जागरूकता, सतर्कता और समय पर शिकायत ही इस तरह के साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।








