JNU में ‘रात का आतंक’: नकाबपोशों का तांडव
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देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय Jawaharlal Nehru University (JNU) में रविवार देर रात छात्र संगठनों के बीच हिंसक झड़प ने पूरे कैंपस को दहला दिया। आधी रात करीब 1:30 बजे शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते पत्थरबाजी, मारपीट और अफरा-तफरी में बदल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बहस और नारेबाजी के बाद दो छात्र समूह आमने-सामने आ गए। इसी दौरान नकाबपोश लोगों के कैंपस में घुसने का आरोप भी लगाया गया है।
कमरे में बंद कर छोड़ा ‘फायर एक्सटिंग्विशर’
बायोटेक्नोलॉजी के छात्र प्रतीक भारद्वाज ने एक वीडियो जारी कर दावा किया कि उन्हें कमरे में बंद कर उनके ऊपर फायर एक्सटिंग्विशर छोड़ दिया गया, जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी।
वीडियो में वे कहते नजर आए: “मेरी मौत के जिम्मेदार गार्ड, पुलिस और वामपंथी संगठन होंगे।” बताया गया कि अन्य छात्रों ने उन्हें बाहर निकाला और एंबुलेंस बुलाने की मांग की।
पत्थर, डंडे और चाकू के आरोप
घटना से जुड़े वायरल वीडियो में छात्र हॉस्टल की सीढ़ियों पर भागते दिख रहे हैं। कुछ के हाथों में डंडे, पत्थर और अन्य सामान दिखाई दे रहे हैं।
Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (ABVP) ने आरोप लगाया कि वामपंथी संगठनों से जुड़े छात्रों ने आम छात्रों और उनके कार्यकर्ताओं पर हमला किया। कई छात्र खून से लथपथ दिखाई दिए, जिन्हें बाद में अस्पताल ले जाया गया। वहीं वामपंथी छात्र संगठनों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे और उन पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।
वायरल वीडियो में क्या दिखा?
नकाबपोश छात्र इधर-उधर भागते नजर आए, पत्थरबाजी और हंगामे के दृश्य, कुछ छात्र वीडियो रिकॉर्ड करते दिखे, एक छात्रा को भागते हुए देखा गया, जिस पर पत्थरबाजी का आरोप लगा, एक अन्य वीडियो में छात्र सुरक्षा गार्डों पर निष्क्रिय रहने का आरोप लगाते दिख रहे हैं।
विवाद की जड़ क्या है?
सूत्रों के मुताबिक, विश्वविद्यालय की कुलगुरु शांतिश्री डी. पंडित के कथित बयान को लेकर पहले से ही कैंपस में तनाव था। छात्र संगठनों ने ‘समता जुलूस’ निकालकर जवाबदेही और इस्तीफे की मांग की थी। बताया जा रहा है कि स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज परिसर में ताला लगाने की कोशिश को लेकर विवाद बढ़ा और रीडिंग रूम में पढ़ रहे छात्रों ने इसका विरोध किया। इसके बाद बहस हिंसा में बदल गई।
पुलिस का बयान
Delhi Police ने कहा है कि अभी तक कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और कैंपस में फिलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
बड़ा सवाल
देश के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में से एक JNU में बार-बार हो रही हिंसक घटनाएं कई सवाल खड़े करती हैं—
क्या छात्र राजनीति अब हिंसा की ओर बढ़ रही है?
क्या प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है?
क्या शिक्षा का मंदिर राजनीतिक रणभूमि बनता जा रहा है?
JNU में आधी रात की यह हिंसा एक बार फिर छात्र राजनीति, कैंपस सुरक्षा और प्रशासनिक भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करती है। फिलहाल दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और जांच जारी है। सच्चाई क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

