युवाओं पर RSS प्रमुख का बड़ा बयान: मोहन भागवत बोले नई पीढ़ी से संवाद जरूरी

मोहन भागवत बोले नई पीढ़ी से संवाद जरूरी
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Priya Iyer

Priya Iyer

0 सेकंड पहले

Jai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.

Rohan Desai

Rohan Desai

0 सेकंड पहले

Hamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.

Kavya Mishra

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0 सेकंड पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Kavya Mishra

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0 सेकंड पहले

Har Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नई पीढ़ी की सोच और बदलते सामाजिक माहौल को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आज के युवा किसी भी बात को बिना तर्क और कारण समझे स्वीकार नहीं करते हैं। वर्तमान समय में केवल आदेश देने के बजाय युवाओं के साथ संवाद और विचार-विमर्श की जरूरत है।उन्होंने कहा कि समाज और परिवारों को अपनी कार्यशैली में बदलाव लाना होगा ताकि नई पीढ़ी के साथ बेहतर तालमेल बनाया जा सके।


"अब आज्ञा पालन नहीं, तर्क समझने वाली पीढ़ी है"
मोहन भागवत ने कहा कि पहले के समय में बच्चे माता-पिता और बड़ों की बात को बिना सवाल किए मान लेते थे, लेकिन आज की पीढ़ी हर बात के पीछे का कारण जानना चाहती है। उन्होंने कहा कि युवा सवाल पूछते हैं, विश्लेषण करते हैं और तभी किसी बात को स्वीकार करते हैं।उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को केवल निर्देश देकर नहीं चलाया जा सकता, बल्कि उन्हें तार्किक जवाब देकर विश्वास में लेना होगा।


परिवारों में घटते संवाद पर जताई चिंता
RSS प्रमुख ने आधुनिक परिवारों में कम होते संवाद को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर परिवारों के बीच बातचीत कम हो रही है, जिसका असर बच्चों और युवाओं की सोच पर पड़ रहा है।उन्होंने बड़ों से अपील की कि वे बच्चों पर अपनी इच्छाएं थोपने के बजाय उनके साथ मित्र की तरह व्यवहार करें। किसी भी निर्णय को लागू करने से पहले आपसी सहमति और बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।

 

विश्व मांगल्य सभा में रखा विचार
मोहन भागवत ने यह बात नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित विश्व मांगल्य सभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक के समापन सत्र में कही। इस बैठक का मुख्य विषय "समकालीन मातृत्व" (Contemporary Motherhood) था।अपने संबोधन में उन्होंने परिवार, समाज और नई पीढ़ी के बीच बेहतर संबंध बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।


युवाओं की बदलती भूमिका पर दिया संदेश
मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में युवा शिक्षा, रोजगार और विभिन्न सामाजिक मुद्दों को लेकर अपनी आवाज लगातार उठा रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि बदलते समय के साथ समाज और संस्थाओं को भी युवाओं की सोच और अपेक्षाओं को समझना होगा।जानकारों के अनुसार, यह बयान नई पीढ़ी के साथ संवाद बढ़ाने और पारंपरिक सोच में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।


तर्क, विश्वास और संवाद से मजबूत होगा समाज
RSS प्रमुख ने कहा कि किसी भी पीढ़ी के बीच दूरी कम करने के लिए संवाद सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। युवाओं को समझने और उनकी बात सुनने से परिवार और समाज दोनों मजबूत होते हैं।उन्होंने जोर दिया कि नई पीढ़ी के साथ संबंध बनाने के लिए सम्मान, विश्वास और तार्किक बातचीत का रास्ता अपनाना समय की आवश्यकता है।

 

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Jai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.

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Hamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.

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Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

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Har Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.

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