UNICEF Reports Online Abuse of 1.5 Million Pakista: UNICEF रिपोर्ट का दावा, पाकिस्तान में 15 लाख बच्चों ने ऑनलाइन शोषण का सामना किया

Sneha Menon
0 सेकंड पहलेVishwa shanti ke liye yeh situation concerning hai.
Ada khan
0 सेकंड पहलेIs khabar ka asar kai deshon par padega.
Nidhi kumari
0 सेकंड पहलेAise haalaaton mein diplomatic relations bahut important hote hain.
रिपोर्ट में 15 लाख बच्चों का आंकड़ा
UNICEF की सितंबर 2026 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में 12 से 17 वर्ष की उम्र के इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले करीब 1.5 करोड़ नहीं बल्कि लगभग 15 लाख बच्चे एक साल की अवधि में तकनीक के जरिए यौन शोषण या दुर्व्यवहार के कम से कम एक रूप का सामना कर चुके हैं। यह संख्या उस आयु वर्ग के इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले बच्चों का लगभग 1/16 हिस्सा है। रिपोर्ट UNICEF Innocenti, ECPAT International और INTERPOL के शोध पर आधारित है।
ऑनलाइन गेमिंग से शुरू हुआ संपर्क
रिपोर्ट पर आधारित AFP की बातचीत में जारा शाह नाम से पहचान छिपाई गई 17 वर्षीय किशोरी ने बताया कि ऑनलाइन गेम खेलते समय एक व्यक्ति से बातचीत शुरू हुई। शुरुआत में उसका व्यवहार दोस्ताना था, लेकिन बाद में उसने निजी तस्वीरों की मांग और धमकी देने जैसी हरकतें कीं। यह उदाहरण बताता है कि ऑनलाइन संपर्क किस तरह धीरे-धीरे जोखिमपूर्ण स्थिति में बदल सकता है।
85 प्रतिशत मामलों में आरोपी परिचित
UNICEF के अनुसार, रिपोर्ट में शामिल घटनाओं में करीब 85 प्रतिशत मामलों में आरोपी वह व्यक्ति था जिसे बच्चा पहले से जानता था। रिपोर्ट में बताया गया है कि शोषण की शुरुआत सामान्य बातचीत, ऑनलाइन गेमिंग, उपहार या पैसे का भरोसा देने और रिश्ते का विश्वास पैदा करने जैसी गतिविधियों से हो सकती है।
सोशल मीडिया से भरोसा बनाने की कोशिश
रिपोर्ट के मुताबिक अपराधी बच्चों के सोशल मीडिया पर उपलब्ध व्यक्तिगत जानकारी का इस्तेमाल भरोसा बनाने के लिए कर सकते हैं। शोध में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में यह प्रक्रिया लंबे समय तक चलती है। रिपोर्ट में सोशल मीडिया को दर्ज मामलों में सबसे आम डिजिटल वातावरण बताया गया, जहां 44 प्रतिशत घटनाएं सामने आईं।
71 प्रतिशत बच्चों ने नहीं बताया
UNICEF के अनुसार, 71 प्रतिशत पीड़ित बच्चों ने किसी को घटना के बारे में नहीं बताया। रिपोर्ट में सामाजिक बदनामी, शर्म, परिवार की प्रतिक्रिया का डर और पीड़ित को दोष देने की प्रवृत्ति को चुप्पी की प्रमुख वजहों में शामिल किया गया है। सर्वे में किसी भी बच्चे ने पुलिस, हेल्पलाइन या सोशल वर्कर जैसे औपचारिक माध्यमों से रिपोर्ट करने की बात नहीं बताई।
ऑनलाइन खतरे के बदलते तरीके
रिपोर्ट में यौन शोषण से जुड़ी अवांछित तस्वीरों या बातचीत, निजी तस्वीरें साझा करने का दबाव, तस्वीरों के आधार पर धमकी या ब्लैकमेल और AI की मदद से बनाई गई फर्जी तस्वीरों या वीडियो जैसे जोखिमों का भी उल्लेख किया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
UNICEF ने सरकार, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, न्याय व्यवस्था, सामाजिक सेवाओं, स्कूलों, परिवारों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों के बीच समन्वित कार्रवाई की जरूरत बताई है। रिपोर्ट में बच्चों के लिए सुरक्षित और गोपनीय सहायता व्यवस्था, बेहतर रिपोर्टिंग सिस्टम और मजबूत बाल संरक्षण उपाय विकसित करने की सिफारिश की गई है।
बच्चों की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी
रिपोर्ट का जोर केवल बच्चों को ऑनलाइन जोखिमों से बचने की सलाह देने पर नहीं, बल्कि ऐसे डिजिटल और संस्थागत सिस्टम तैयार करने पर है जो शोषण को रोक सकें और पीड़ित बच्चों को सुरक्षित तरीके से सहायता उपलब्ध करा सकें। UNICEF ने बच्चों और परिवारों के लिए ऐसी व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई है जिसमें मदद मांगने पर उन्हें दोष या सामाजिक दबाव का सामना न करना पड़े।








