politics: Maruti Suzuki crosses EV exports of 50,000 units since August 2025

Maruti Suzuki crosses EV exports of 50,000 units since August 2025
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मारुति सुज़ुकी ने आठ अगस्त 2025 के बाद से ईवीई (इलेक्ट्रिक वाहन) के निर्यात के 50,000 यूनिट पार कर लिए हैं। यह आँकड़ा सम्पूर्ण भारतीय ईवी निर्यात में से एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे प्राप्त करने में करीब दो साल लगे। निर्माता ने इन ईलेक्ट्रिक वाहनों को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा है, जिसमें जापान, यूरोप और दक्षिण अमेरिका शामिल हैं। इन निर्यात आँकड़ों के पीछे मुख्य रूप से मारुति सुज़ुकी की स्थानीय उत्पादन क्षमता और सरकार के ईवी नीतियों के समर्थन ने भूमिका निभाई है। कंपनी ने अपने बड़ेसहेबस्ती गांव स्थित स्वयं उत्पादन संयंत्र में ईवी के उत्पादन क्षमता बढ़ाई है, जिससे उसकी वैश्विक प्रतिद्वंद्वीय ऊर्जा में सुधार हुआ है। इसके अलावा, गृह बजट में ईवी क्षेत्र के लिए विशेष आमंत्रण और कराधानों के लिए प्रोत्साहन पैक्के किए गए हैं। मारुति सुज़ुकी के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी ने कहा है कि भविष्य में ईवी के निर्यात को और बढ़ावा देने की योजना है। कंपनी ने अपने अगले पाँच वर्षों के भीतर 100,000 यूनिट के निर्यात लक्ष्य को अपनाने की पुष्टि की है। इसके लिए वह अपने नए मॉडल विकसित कर रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ साझेदारी बढ़ा रही है। साथ ही, उसने अपने डीलर नेटवर्क के माध्यम से वैश्विक बाजार में पहुँच बढ़ाने के लिए नई रणणीति अपनाई है। भारत सरकार ने ईवी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएँ शुरू की हैं, जिनमें निर्यातकों को कर छूट और आयात शुल्क में कमी शामिल है। इन योजनाओं के तहत मारुति सुज़ुकी ने भी अपने उत्पादन और निर्यात प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी समर्थन लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपने आसपास के देशों की तुलना में ईवी उत्पादन और निर्यात में एक प्रमुख स्थान पा सकता है, विशेषकर जब उसके पास सस्ती श्रम और समर्थ सामरंभ ढाँचा हो। आने वाले समय में मारुति सुज़ुकी की ईवी निर्यात में सुधर जारी रहेगा, क्योंकि वह अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मांग को पूरा करने के लिए अपनी रणनीति को और सुदृढ़ कर रही है। कंपनी ने अपने ग्राहकों को सस्ते और पर्यावरण अनुकूल विकल्प प्रदान करने का वादा किया है, जिससे भारत की ईवी उद्योग की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा सकता है।
मारुति सुज़ुकी ने आठ अगस्त 2025 के बाद से ईवीई (इलेक्ट्रिक वाहन) के निर्यात के 50,000 यूनिट पार कर लिए हैं। यह आँकड़ा सम्पूर्ण भारतीय ईवी निर्यात में से एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे प्राप्त करने में करीब दो साल लगे। निर्माता ने इन ईलेक्ट्रिक वाहनों को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा है, जिसमें जापान, यूरोप और दक्षिण अमेरिका शामिल हैं। इन निर्यात आँकड़ों के पीछे मुख्य रूप से मारुति सुज़ुकी की स्थानीय उत्पादन क्षमता और सरकार के ईवी नीतियों के समर्थन ने भूमिका निभाई है। कंपनी ने अपने बड़ेसहेबस्ती गांव स्थित स्वयं उत्पादन संयंत्र में ईवी के उत्पादन क्षमता बढ़ाई है, जिससे उसकी वैश्विक प्रतिद्वंद्वीय ऊर्जा में सुधार हुआ है। इसके अलावा, गृह बजट में ईवी क्षेत्र के लिए विशेष आमंत्रण और कराधानों के लिए प्रोत्साहन पैक्के किए गए हैं। मारुति सुज़ुकी के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी ने कहा है कि भविष्य में ईवी के निर्यात को और बढ़ावा देने की योजना है। कंपनी ने अपने अगले पाँच वर्षों के भीतर 100,000 यूनिट के निर्यात लक्ष्य को अपनाने की पुष्टि की है। इसके लिए वह अपने नए मॉडल विकसित कर रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ साझेदारी बढ़ा रही है। साथ ही, उसने अपने डीलर नेटवर्क के माध्यम से वैश्विक बाजार में पहुँच बढ़ाने के लिए नई रणणीति अपनाई है। भारत सरकार ने ईवी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएँ शुरू की हैं, जिनमें निर्यातकों को कर छूट और आयात शुल्क में कमी शामिल है। इन योजनाओं के तहत मारुति सुज़ुकी ने भी अपने उत्पादन और निर्यात प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी समर्थन लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपने आसपास के देशों की तुलना में ईवी उत्पादन और निर्यात में एक प्रमुख स्थान पा सकता है, विशेषकर जब उसके पास सस्ती श्रम और समर्थ सामरंभ ढाँचा हो। आने वाले समय में मारुति सुज़ुकी की ईवी निर्यात में सुधर जारी रहेगा, क्योंकि वह अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मांग को पूरा करने के लिए अपनी रणनीति को और सुदृढ़ कर रही है। कंपनी ने अपने ग्राहकों को सस्ते और पर्यावरण अनुकूल विकल्प प्रदान करने का वादा किया है, जिससे भारत की ईवी उद्योग की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा सकता है।
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