Agniveer Extension Rules: अग्निवीरों को दो साल का एक्सटेंशन, अब छह साल बाद स्थायी सैनिक बनने का मौका

अग्निवीरों को दो साल का एक्सटेंशन, अब छह साल बाद स्थायी सैनिक बनने का मौका
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Arjun Singh

Arjun Singh

0 सेकंड पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Ada khan

Ada khan

0 सेकंड पहले

Har Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.

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अग्निपथ योजना में बड़ा बदलाव
अग्निपथ योजना में बड़े बदलाव के तहत अब 25 प्रतिशत अग्निवीर चार साल की सेवा के बाद स्थायी सैनिक बन सकेंगे, जबकि बाकी 75 प्रतिशत अग्निवीरों को दो साल का एक्सटेंशन दिया जाएगा। इस तरह वे कुल छह साल तक अग्निवीर के रूप में सेवा करेंगे और इसके बाद उन्हें स्थायी सैनिक बनने का मौका मिलेगा। इस बदलाव के साथ वेतन, वरिष्ठता, सेवा निधि, पेंशन और भर्ती से जुड़े नियमों पर भी असर पड़ेगा।

 

यंग फोर्स को लेकर सवाल
जब 2022 में अग्निपथ योजना लागू की गई थी, तब सरकार ने कहा था कि इससे सेना की औसत उम्र कम होगी। उस समय बताया गया था कि सेना में सैनिकों की औसत उम्र करीब 32 साल है और अग्निवीरों के आने के बाद छह से सात साल में यह घटकर 26 साल हो जाएगी। इससे सेना अधिक युवा और फिट बनेगी।

अब 25 प्रतिशत अग्निवीर चार साल में और 75 प्रतिशत छह साल में स्थायी सैनिक बनेंगे। ऐसे में सेना की युवा संरचना को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस पर सीडीएस ने कहा कि युद्ध का स्वरूप बदल रहा है और अब सेना को युवाओं, तकनीक तथा परिपक्वता के मिश्रण की जरूरत है। उनके मुताबिक, मौजूदा योजना सेना की जरूरतों को पूरा कर रही है। दुनिया भर में चल रहे युद्धों की समीक्षा करके उनसे सीख भी ली जा रही है।

 

स्थायी सैनिक बनने पर वरिष्ठता
जो अग्निवीर चार साल की सेवा के बाद स्थायी सैनिक बनेंगे, वे अपने ही बैच के बाकी अग्निवीरों से वरिष्ठ होंगे। उनकी वरिष्ठता स्थायी सैनिक बनने के समय से गिनी जाएगी। इस तरह एक ही बैच के 75 प्रतिशत अग्निवीरों की वरिष्ठता अपने साथ के 25 प्रतिशत अग्निवीरों से दो साल पीछे होगी।

 

पांचवें और छठे साल में कितनी होगी सैलरी
अभी अग्निवीरों को पहले साल 30 हजार रुपये, दूसरे साल 33 हजार रुपये, तीसरे साल 36,500 रुपये और चौथे साल 40 हजार रुपये वेतन मिलता है।

दो साल का एक्सटेंशन मिलने पर पांचवें साल में वेतन बढ़कर 43,500 रुपये और छठे साल में 48,500 रुपये हो जाएगा।

 

पैरा मिलिट्री और पुलिस में आरक्षण
अग्निपथ योजना लागू करते समय सरकार ने कहा था कि चार साल बाद सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों को पैरा मिलिट्री बलों, राज्य पुलिस और राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों में नौकरी के लिए आरक्षण दिया जाएगा।

अब प्रस्तावित बदलाव के तहत अग्निवीरों को चार या छह साल बाद स्थायी सैनिक बनने का अवसर मिलेगा। ऐसे में स्थायी नहीं होने वाले अग्निवीरों के लिए पहले घोषित आरक्षण का प्रावधान नहीं होगा।

 

सेवा निधि में सरकार का योगदान
अग्निवीर अपनी सैलरी का 30 प्रतिशत हिस्सा सेवा निधि पैकेज में जमा करते हैं और इतनी ही रकम सरकार की ओर से भी जमा की जाती है। चार साल की सेवा पूरी होने पर सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों को यह पूरी राशि मिलती है, जो करीब 11 लाख रुपये होती है।

दो साल के एक्सटेंशन के दौरान भी अग्निवीर अपनी सैलरी का 30 प्रतिशत हिस्सा सेवा निधि में जमा करेंगे। हालांकि, पांचवें और छठे साल में सरकार की ओर से इसमें 70 प्रतिशत योगदान दिया जाएगा।

सरकार की ओर से जमा की गई अतिरिक्त राशि अग्निवीर को तभी मिलेगी, जब वह अग्निवीर के रूप में ही सेवा से बाहर होगा। यदि वह स्थायी सैनिक बन जाता है तो सरकार की ओर से जमा यह राशि उसे नहीं मिलेगी। ऐसी स्थिति में यह रकम अग्निवीर फंड में जमा होगी।

 

पेंशन के लिए अब कितने साल की सेवा
पहले नियमित भर्ती के तहत सैनिक 15 साल की सेवा पूरी करने के बाद पेंशन के पात्र हो जाते थे। यह नियम अब भी लागू है, लेकिन अग्निवीर के रूप में बिताए गए चार या छह साल पेंशन योग्य सेवा में नहीं जोड़े जाएंगे।

इसलिए अग्निवीर से स्थायी सैनिक बनने वालों को पेंशन की पात्रता हासिल करने के लिए नियमित सैनिक के रूप में 15 साल की सेवा पूरी करनी होगी। इस हिसाब से कुल समय चार साल के विकल्प में 19 साल और छह साल के विकल्प में 21 साल तक हो सकता है।

बजट को लेकर पूछे गए सवाल पर सीडीएस ने कहा कि सरकार ने रक्षा बलों के लिए कभी बजट की कमी नहीं होने दी। मुख्य प्राथमिकता सेना की ऑपरेशनल क्षमता, हर परिस्थिति के लिए तैयारी और जरूरतों को पूरा करना है।

 

विकलांगता, शहादत और शादी के नियम
अग्निवीरों की सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। चार साल की सेवा के दौरान लागू नियम दो साल के एक्सटेंशन पर भी लागू रहेंगे। विकलांगता और शहादत से जुड़े मामलों में भी मौजूदा सेवा शर्तें ही प्रभावी रहेंगी।

शादी को लेकर भी नियम पहले जैसे ही रहेंगे। स्थायी सैनिक बनने का प्रस्ताव मिलने के समय अग्निवीर का अविवाहित होना जरूरी होगा।

 

अग्निवीरों की भर्ती पर क्या असर पड़ेगा
अग्निपथ योजना लागू करते समय कहा गया था कि चौथे साल से हर साल सेना में 50 हजार अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी। अब जब सभी अग्निवीरों को चार या छह साल बाद स्थायी सैनिक बनने का अवसर देने की व्यवस्था की जा रही है, तो भर्ती की संख्या में बदलाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

इस पर सीडीएस ने कहा कि फिलहाल सशस्त्र बलों में करीब तीन लाख अग्निवीर हैं। सेना की जरूरत के अनुसार ही आगे अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी।

 

 

बदलावों का अग्निवीरों पर असर
अग्निपथ योजना में दो साल के एक्सटेंशन से अग्निवीरों को छह साल तक सेवा करने और स्थायी सैनिक बनने का अवसर मिलेगा। हालांकि, इससे वरिष्ठता, सेवा निधि और पेंशन की गणना में अंतर आएगा। चार साल बाद स्थायी होने वाले अग्निवीरों को अपने बैच के अन्य अग्निवीरों से वरिष्ठता मिलेगी, जबकि छह साल बाद स्थायी होने वालों की नियमित सेवा और पेंशन की गणना उसी समय से शुरू होगी।

इस बदलाव के तहत पांचवें और छठे साल में वेतन क्रमशः 43,500 और 48,500 रुपये होगा। सेवा निधि में सरकार का योगदान भी बढ़ेगा, लेकिन स्थायी सैनिक बनने पर सरकार की ओर से जमा अतिरिक्त राशि अग्निवीर को नहीं मिलेगी। भर्ती की संख्या सेना की जरूरत के आधार पर तय की जाएगी।

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Arjun Singh

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Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Ada khan

Ada khan

0 सेकंड पहले

Har Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.

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