भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम डील: परमाणु ऊर्जा को मिलेगा बड़ा बल

परमाणु ऊर्जा को मिलेगा बड़ा बल
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Kavya Mishra

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0 सेकंड पहले

Jai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.

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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच नागरिक परमाणु सहयोग (Civil Nuclear Cooperation) के तहत यूरेनियम आपूर्ति व्यवस्था को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया से मिलने वाले यूरेनियम का उपयोग केवल शांतिपूर्ण नागरिक उद्देश्यों, विशेषकर बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा।


लंबे समय बाद समझौता हुआ क्रियान्वित
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने नागरिक परमाणु सहयोग का मूल समझौता वर्ष 2014 में किया था। इसके बाद रिपोर्टिंग और सुरक्षा प्रक्रियाओं से जुड़े तकनीकी पहलुओं के कारण इसकी पूर्ण क्रियान्वयन प्रक्रिया लंबित रही। हाल ही में आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इस व्यवस्था को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ाया गया है।


 IAEA के सुरक्षा मानकों के तहत होगी आपूर्ति
यूरेनियम की पूरी आपूर्ति अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था के तहत होगी। समझौते के अनुसार, आयातित परमाणु ईंधन का उपयोग केवल भारत के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में किया जाएगा और इसका सैन्य उद्देश्यों से कोई संबंध नहीं होगा।

 

भारत को होंगे कई रणनीतिक लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार, इस सहयोग से भारत के परमाणु बिजली संयंत्रों के लिए ईंधन की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और दीर्घकालिक परमाणु ऊर्जा क्षमता के विस्तार में भी सहायता मिलेगी। भारत ने भविष्य में परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।


ऑस्ट्रेलिया बना महत्वपूर्ण ऊर्जा भागीदार
ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार वाले देशों में शामिल है। ऐसे में यह समझौता भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करता है। दोनों देशों के बीच रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), साइबर सुरक्षा और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग लगातार बढ़ रहा है।


द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगा नया आयाम
यह समझौता भारत और ऑस्ट्रेलिया के व्यापक रणनीतिक संबंधों तथा QUAD जैसे बहुपक्षीय सहयोग को भी मजबूती देने वाला माना जा रहा है। दोनों देशों ने भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा, तकनीकी सहयोग और आर्थिक साझेदारी को और विस्तार देने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

 

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Jai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.

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