कर्मचारियों का बड़ा आंदोलन: पुरानी पेंशन समेत मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन

पुरानी पेंशन समेत मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन
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Pihu Agarwal

Pihu Agarwal

0 सेकंड पहले

Yeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.

Neha Tripathi

Neha Tripathi

0 सेकंड पहले

Community ko mil ke aage aana hoga is mudde par.

Nisha Shah

Nisha Shah

0 सेकंड पहले

Aise logon ko support karna humara farz hai.

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भारतीय मजदूर संघ ने कर्मचारियों और श्रमिकों की विभिन्न मांगों को लेकर 17 अगस्त 2026 को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश के सभी जिलों सहित देश के अलग-अलग राज्यों में जिला मुख्यालयों पर कर्मचारी और श्रमिक प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान पुरानी पेंशन योजना की बहाली समेत कई मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई गई। कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे। संगठन की ओर से कर्मचारी हितों से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की गई। इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन के चलते कई राज्यों के जिला मुख्यालयों पर कर्मचारियों की गतिविधियां देखने को मिलीं।


OPS बहाली बनी कर्मचारियों की प्रमुख मांग
भारतीय मजदूर संघ की प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना यानी OPS की बहाली शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि NPS और UPS की जगह पुरानी पेंशन व्यवस्था को दोबारा लागू किया जाना चाहिए। संगठन ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन से जुड़े मुद्दे को भी आंदोलन में प्रमुखता से उठाया है। EPS-95 के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन को बढ़ाकर 7,500 रुपये करने की मांग भी रखी गई है। कर्मचारियों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन के लिए पर्याप्त पेंशन जरूरी है। इसी मुद्दे को लेकर जिला स्तर से लेकर दिल्ली तक कर्मचारियों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं।


न्यूनतम वेतन 30 हजार करने की मांग
आंदोलन के दौरान भारतीय मजदूर संघ ने श्रमिकों के न्यूनतम वेतन को लेकर भी बड़ी मांग उठाई है। संगठन की मांग है कि संगठित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये प्रति माह किया जाए। BMS ने कहा है कि मौजूदा महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को देखते हुए श्रमिकों के वेतन में बढ़ोतरी जरूरी है। प्रदर्शन में श्रमिकों के वेतन, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को भी उठाया गया। संगठन ने सरकार से श्रमिकों के हित में ठोस नीतियां बनाने की मांग की है। कर्मचारियों और श्रमिकों ने जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन के दौरान इन मांगों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की।

 

संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग
भारतीय मजदूर संघ ने लंबे समय से विभिन्न विभागों में काम कर रहे संविदा और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि कई कर्मचारी वर्षों से संविदा व्यवस्था के तहत अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे कर्मचारियों को स्थायी रोजगार और सेवा से जुड़े अधिकार देने की मांग प्रदर्शन के दौरान प्रमुखता से रखी गई। BMS ने सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में काम कर रहे संविदा कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय तक अस्थायी व्यवस्था में काम करने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुरक्षा नहीं मिलती। इसी मुद्दे को लेकर देशभर के जिला मुख्यालयों पर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए।


नए श्रम कानूनों के प्रावधानों का विरोध
राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन में भारतीय मजदूर संघ ने नए श्रम कानूनों के कुछ प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई है। संगठन ने कर्मचारी विरोधी माने जा रहे प्रावधानों को हटाने या उनमें आवश्यक बदलाव करने की मांग की है। BMS का कहना है कि श्रम कानूनों में बदलाव करते समय कर्मचारियों और श्रमिकों के हितों की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। संगठन ने श्रमिकों के अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार की स्थिरता से जुड़े मुद्दों को भी आंदोलन का हिस्सा बनाया है। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में प्रदर्शनकारियों ने इन मांगों को लेकर प्रशासन के माध्यम से सरकार तक अपना ज्ञापन पहुंचाया। संगठन ने संकेत दिया है कि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।


दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी हुआ केंद्रीय प्रदर्शन
देशभर के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी भारतीय मजदूर संघ की ओर से केंद्रीय प्रदर्शन किया गया। यहां संगठन के राष्ट्रीय पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन समेत विभिन्न मांगों को लेकर अपनी आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से कर्मचारी और श्रमिक हितों से जुड़े मुद्दों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की। BMS नेताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है। संगठन की ओर से आगे की रणनीति को लेकर भी संकेत दिए गए हैं। फिलहाल देशभर में हुए इस प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों की नजरें सरकार की ओर से आने वाले अगले कदम पर टिकी हैं।

 

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Pihu Agarwal

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0 सेकंड पहले

Yeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.

Neha Tripathi

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Nisha Shah

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0 सेकंड पहले

Aise logon ko support karna humara farz hai.

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