IIT Bombay Student Death: Professor Named in FIR: IIT बॉम्बे छात्र की मौत मामले में प्रोफेसर पर गंभीर आरोप, FIR दर्ज

Trapti Tanwar
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Harsh Pandya
0 सेकंड पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Kavya Mishra
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
प्रोफेसर पर गंभीर आरोप
IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में उनके पिता ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला पर जातिगत टिप्पणियों, धमकी और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। पिता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रोफेसर के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित मामला दर्ज किया है। FIR में दो अन्य आरोपियों का भी उल्लेख है, जिनकी पहचान फिलहाल स्पष्ट नहीं की गई है।
तीन महीने से उत्पीड़न का दावा
साहिल के पिता ने शिकायत में आरोप लगाया है कि उनके बेटे ने करीब तीन महीने से जाति आधारित दुर्व्यवहार और दबाव की बात बताई थी। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि प्रोफेसर दुल्ला ने कथित तौर पर IIT बॉम्बे के निदेशक शिरीष बी. केदारे के निर्देश पर साहिल के साथ ऐसा व्यवहार किया। ये आरोप फिलहाल जांच का हिस्सा हैं।
परीक्षा के बाद सामने आया मामला
रिपोर्टों के अनुसार, साहिल IIT बॉम्बे के Energy Science and Engineering विभाग के दूसरे वर्ष के छात्र थे। परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर वह संस्थान की कार्रवाई के दायरे में आए थे। इसके बाद उनकी मौत की जानकारी सामने आई। परिवार ने इस घटनाक्रम को पहले से लगाए जा रहे कथित उत्पीड़न के आरोपों से जोड़ते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है।
क्राइम ब्रांच को सौंपी जांच
मुंबई पुलिस ने शिकायत के आधार पर FIR दर्ज करने के बाद मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। FIR में भारतीय न्याय संहिता के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित प्रावधान और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं शामिल की गई हैं।
IIT बॉम्बे ने आरोप नकारे
IIT बॉम्बे के निदेशक शिरीष केदारे ने संस्थान में जाति आधारित भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है। संस्थान का कहना है कि छात्र की ओर से SC-ST सेल या प्रशासन के समक्ष ऐसी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। IIT बॉम्बे ने कहा है कि पुलिस की जांच में संस्थान पूरा सहयोग करेगा।
जांच से तय होगी आगे की कार्रवाई
FIR दर्ज होना आरोपों की जांच की शुरुआत है और इसे आरोपों का न्यायिक रूप से सिद्ध होना नहीं माना जा सकता। अब क्राइम ब्रांच परिवार की शिकायत, संबंधित लोगों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।








