UCC Target Before 2029: 2029 से पहले 21 राज्यों में UCC का लक्ष्य

2029 से पहले 21 राज्यों में UCC का लक्ष्य
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Sneha Menon

Sneha Menon

0 सेकंड पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर 2026 को मुंबई में UCC को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी नेतृत्व वाले NDA के 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने का लक्ष्य है। यह बयान फिलहाल एक राजनीतिक और नीतिगत लक्ष्य के तौर पर सामने आया है, जबकि अलग-अलग राज्यों में UCC को लेकर कानूनी प्रक्रिया अलग चरणों में है।


उत्तराखंड में पहले से लागू UCC
उत्तराखंड स्वतंत्र भारत का पहला राज्य है जहां समान नागरिक संहिता लागू की गई। राज्य में UCC 27 जनवरी 2025 से प्रभावी है। इसके तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य व्यक्तिगत मामलों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू की गई है। उत्तराखंड में लिव-इन संबंधों के पंजीकरण से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।


गुजरात, असम और MP में आगे बढ़ी प्रक्रिया
2026 में गुजरात, असम और मध्य प्रदेश की विधानसभाओं में UCC से जुड़े विधेयक पारित किए गए। हालांकि इन राज्यों को UCC लागू करने वाले राज्यों की सूची में रखना अभी सही नहीं होगा, क्योंकि विधेयक पारित होने के बाद आवश्यक संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। इसलिए इन राज्यों में इसे फिलहाल UCC की प्रक्रिया में आगे बढ़ चुका कदम माना जाना चाहिए।

 

विवाह और उत्तराधिकार जैसे मामलों पर असर
UCC का उद्देश्य व्यक्तिगत कानून से जुड़े कुछ मामलों के लिए समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है। इनमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंध जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। हालांकि अलग-अलग राज्यों में तैयार किए गए UCC कानूनों और विधेयकों के प्रावधान एक जैसे नहीं हैं। इसलिए किसी एक राज्य के प्रावधान को पूरे देश पर लागू व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।


लिव-इन और बहुविवाह पर भी प्रावधान
राज्य स्तर पर सामने आए UCC कानूनों और विधेयकों में बहुविवाह पर रोक तथा लिव-इन संबंधों के पंजीकरण जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। कुछ राज्यों में अनुसूचित जनजातियों को कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। इन प्रावधानों की वास्तविक स्थिति संबंधित राज्य के लागू कानून और उसकी अधिसूचना पर निर्भर करेगी।


UCC को लेकर राजनीतिक बहस तेज
अमित शाह के बयान के बाद UCC को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी सहित कुछ विपक्षी नेताओं ने इसके प्रावधानों और प्रभावों पर सवाल उठाए हैं, जबकि केंद्र और बीजेपी की ओर से इसे समान नागरिक कानून की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। NDA के सहयोगी दलों में भी अंतिम कानून और उसके प्रावधानों को लेकर अलग-अलग रुख सामने आए हैं। UCC का संवैधानिक आधार संविधान के अनुच्छेद 44 में है, जो राज्य को समान नागरिक संहिता की दिशा में प्रयास करने का निर्देश देता है।

 

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