Odisha Ambulance Crisis: ओडिशा में सड़क नहीं होने से प्रसूता को स्ट्रेचर पर ले जाना पड़ा

Nisha Shah
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Dhruv Bhatt
5 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Navya Nair
6 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Neha Tripathi
8 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Simran Arora
10 घंटे पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Sonu rai
10 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Nidhi kumari
12 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
सड़क के अभाव में प्रसूता को स्ट्रेचर पर ले जाना पड़ा
ओडिशा के रायगड़ा जिले के काशीपुर ब्लॉक में सड़क सुविधा नहीं होने के कारण 108 एंबुलेंस एक गांव तक नहीं पहुंच सकी। जानकारी के अनुसार, शुंगेर पंचायत के सरमबाई गांव में एक महिला ने बेटे को जन्म दिया था, लेकिन प्रसव के बाद उसकी हालत गंभीर हो गई। अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस बुलाई गई, मगर सड़क के अभाव में वाहन गांव तक नहीं जा पाया। इसके बाद एंबुलेंस चालक परीक्षित नायक, हेल्पर अविराम नायक और फार्मासिस्ट बिंदु सागर बाग ने स्ट्रेचर की मदद से महिला को करीब एक किलोमीटर तक ढोकर सरमबाई स्कूल पहुंचाया। वहां से उसे काशीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, महिला और नवजात दोनों स्वस्थ हैं।
खनिज संपदा के बावजूद बुनियादी सुविधाओं पर सवाल
काशीपुर ब्लॉक खनिज संपदा से समृद्ध क्षेत्र माना जाता है, लेकिन यहां सड़क जैसी जरूरी सुविधा का अभाव ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है। इस घटना ने दूरदराज के गांवों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और बुनियादी ढांचे की स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं। सड़क नहीं होने से एंबुलेंस जैसी जरूरी सेवा समय पर मरीज तक नहीं पहुंच पाती, जिससे गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को अतिरिक्त जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ तभी प्रभावी ढंग से मिल सकता है, जब गांवों तक पहुंचने के लिए सुरक्षित और उपयोगी सड़कें उपलब्ध हों।
डीएमएफ की राशि के इस्तेमाल पर उठे सवाल
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, काशीपुर ब्लॉक के लिए जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) निधि में 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है। खबर में यह भी दावा किया गया है कि पिछले वर्षों में इस निधि का अपेक्षित उपयोग नहीं हो पाया और पहले खर्च की गई राशि के बावजूद बुनियादी सुविधाओं में पर्याप्त सुधार नहीं दिखा। ऐसे में यह सवाल उठता है कि खनिज राजस्व से मिलने वाली निधि का उपयोग स्थानीय लोगों की जरूरतों, खासकर सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए किस तरह किया जा रहा है। इन आंकड़ों और खर्च के विवरण की आधिकारिक पुष्टि तथा परियोजनाओं की स्थिति का आकलन जरूरी है, ताकि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।
ग्रामीण सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने की जरूरत
सरमबाई गांव की घटना दूरदराज के क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की अहमियत को उजागर करती है। आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस कर्मियों को एक किलोमीटर तक स्ट्रेचर उठाकर चलना पड़ा, जबकि सड़क संपर्क होने पर ऐसी परेशानी कम हो सकती थी। प्रशासन के सामने अब चुनौती है कि वह गांवों तक सड़क पहुंचाने, आपातकालीन वाहनों की आवाजाही आसान बनाने और खनिज निधि का पारदर्शी व प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए। ग्रामीणों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सड़क, परिवहन और स्थानीय विकास से जुड़ी व्यवस्थाओं के समन्वय का भी विषय है।








