भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन लॉन्च को तैयार: 17 जुलाई से होगी शुरुआत

17 जुलाई से होगी शुरुआत
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Dev Kapoor

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0 सेकंड पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

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भारतीय रेलवे 17 जुलाई 2026 को देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित यात्री ट्रेन की शुरुआत करने जा रहा है। यह ट्रेन हरियाणा के जींद–सोनीपत रेलखंड पर चलेगी। यह परियोजना भारतीय रेलवे की हरित (Green) और स्वच्छ ऊर्जा पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।


जींद–सोनीपत रूट पर होगा संचालन
यह 10 कोच वाली ट्रेन उत्तरी रेलवे के जींद–सोनीपत सेक्शन पर नियमित सेवा देगी। यात्रा के दौरान यह मार्ग के मध्य स्थित स्टेशनों पर निर्धारित ठहराव करेगी। रेलवे ने इस रूट को हाइड्रोजन तकनीक के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना है, ताकि भविष्य में अन्य रूटों पर भी इस तकनीक का विस्तार किया जा सके।


हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलेगी ट्रेन
यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है, जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है। इस प्रक्रिया में धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता, बल्कि केवल पानी की भाप और ऊष्मा निकलती है। यही कारण है कि इसे पर्यावरण-अनुकूल रेल तकनीक माना जा रहा है।

 

ट्रायल में 120 किमी/घंटा, सेवा में 75 किमी/घंटा
रेलवे ने हाल ही में ट्रेन का अंतिम हाई-स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसमें इसने 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति हासिल की। हालांकि नियमित परिचालन के दौरान इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। सुरक्षा मानकों और संचालन की स्थिरता को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।


विशेष रिफ्यूलिंग स्टेशन और आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था
इस परियोजना के लिए जींद में विशेष हाइड्रोजन स्टोरेज और रिफ्यूलिंग सुविधा विकसित की गई है। ट्रेन में हाइड्रोजन लीक डिटेक्शन, फायर सेफ्टी और अन्य आधुनिक सुरक्षा प्रणालियां भी लगाई गई हैं। रेलवे का कहना है कि सभी आवश्यक तकनीकी और सुरक्षा परीक्षण सफल रहे हैं।


हरित परिवहन की दिशा में बड़ा कदम
हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने रेल परिवहन में हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक को अपनाया है। भारतीय रेलवे की योजना भविष्य में ऐसे और हाइड्रोजन आधारित ट्रेन सेट विकसित करने की है, ताकि डीजल आधारित ट्रेनों पर निर्भरता कम हो और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिले।

 

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