बस स्टैंड नहीं, सड़क बनी पड़ाव; जनता बोली—कब जागेग: बुढार बस स्टैंड की मांग अधूरी, सड़क पर खड़े वाहन और रात में असामाजिक गतिविधियों

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शहडोल। बुढार नगर में वर्षों से एक व्यवस्थित बस स्टैंड का अभाव स्थानीय लोगों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। बसों और टैक्सियों को सड़क किनारे खड़ा करना पड़ता है, जिससे दिनभर यातायात प्रभावित रहता है और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर के कुछ हिस्सों में अतिक्रमण की शिकायतें लंबे समय से उठती रही हैं। लोगों का मानना है कि यदि संबंधित विभाग प्रभावी कार्रवाई कर सार्वजनिक भूमि को व्यवस्थित करे तो बस स्टैंड, पार्किंग और यातायात व्यवस्था में सुधार संभव है।
रहवासियों का यह भी कहना है कि रात के समय कुछ स्थानों पर शराब पीने, जुआ खेलने और अन्य असामाजिक गतिविधियों की शिकायतें सामने आती हैं। ऐसे माहौल में नशे की हालत में वाहन चलाने या सड़क पर विवाद होने से किसी भी समय गंभीर दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है।
नागरिकों ने जिला प्रशासन, नगर परिषद और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि नगर में आधुनिक बस स्टैंड का निर्माण कराया जाए, अतिक्रमण के मामलों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए तथा रात्रिकालीन पुलिस गश्त बढ़ाकर असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जाए, ताकि आम जनता सुरक्षित वातावरण में आवागमन कर सके।
बस स्टैंड नहीं, सड़क बनी पड़ाव; जनता बोली—कब जागेगा प्रशासन?
क्या किसी बड़ी सड़क दुर्घटना के बाद ही बुढार को बस स्टैंड मिलेगा?
आखिर सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
सड़क पर खड़ी बसों और टैक्सियों से होने वाले जाम का जिम्मेदार कौन?
रात में शराब, जुआ और असामाजिक गतिविधियों पर पुलिस की सख्ती क्यों नजर नहीं आती?
क्या आम नागरिकों की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता नहीं है?
स्कूल–कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
अगर रात में कोई बड़ी वारदात या हादसा हो जाए तो जवाबदेह कौन होगा?
क्या नगर की बढ़ती आबादी के बावजूद बस स्टैंड की जरूरत को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है?
आखिर कब तक यात्रियों को धूप, बारिश और सड़क किनारे खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ेगा?
क्या बुढार नगर को मूलभूत सुविधाओं के लिए वर्षों तक और इंतजार करना पड़ेगा?

