6 महीने में साइबर ठगी से ₹10,178 करोड़ की चपत: 2026 में 12.71 लाख साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज

Myra Dubey
0 सेकंड पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Sonu rai
0 सेकंड पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
गृह मंत्रालय (MHA) की ताजा समीक्षा के अनुसार, वर्ष 2026 के जनवरी से जून के बीच देशभर में 12.71 लाख से अधिक साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज की गई हैं। इन मामलों में नागरिकों को कुल ₹10,178 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ है। डिजिटल लेन-देन के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों में भी तेजी देखी जा रही है, जिसे देखते हुए सरकार ने इसे राष्ट्रीय स्तर की गंभीर चुनौती माना है।
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा शिकायतें, महाराष्ट्र को सबसे बड़ा नुकसान
आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक 1.85 लाख साइबर शिकायतें उत्तर प्रदेश से दर्ज की गईं। वहीं आर्थिक नुकसान के मामले में महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां लोगों को करीब ₹1,637.66 करोड़ की चपत लगी। कर्नाटक में लगभग ₹1,097 करोड़ और तमिलनाडु में करीब ₹897 करोड़ का नुकसान दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल भुगतान बढ़ने के साथ साइबर अपराधियों की गतिविधियां भी तेज हुई हैं।
सरकार ने बढ़ाई I4C की ताकत
साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए गृह मंत्रालय भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) को लगातार मजबूत कर रहा है। संस्था के संचालन को और प्रभावी बनाने के लिए वरिष्ठ स्तर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति सहित नए प्रशासनिक प्रावधान लागू किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर साइबर अपराधों की जांच को तेज करना है।
1930 हेल्पलाइन और सस्पेक्ट रजिस्ट्री बनी बड़ी ढाल
वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की तुरंत शिकायत दर्ज कराने के लिए 1930 हेल्पलाइन को और अधिक सक्रिय बनाया गया है। इसके अलावा I4C द्वारा तैयार की गई 'सस्पेक्ट रजिस्ट्री' के माध्यम से संदिग्ध साइबर अपराधियों और फर्जी खातों की पहचान कर लगभग ₹9,518 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन को रोका जा चुका है। यह व्यवस्था साइबर अपराधियों के नेटवर्क को समय रहते रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
लाखों सिम, IMEI और फर्जी बैंक खाते ब्लॉक
सरकार ने साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले लाखों मोबाइल सिम कार्ड, IMEI नंबर और फर्जी बैंक खातों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की है। जांच एजेंसियां लगातार ऐसे खातों और डिजिटल माध्यमों की पहचान कर उन्हें ब्लॉक कर रही हैं, जिनका उपयोग ऑनलाइन धोखाधड़ी में किया जाता है। इससे संगठित साइबर अपराध गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिल रही है।
छोटे फ्रॉड मामलों में जल्द मिलेगा रिफंड
सरकार ने साइबर अपराध पीड़ितों को राहत देने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। अब ₹50,000 तक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में, निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने पर बिना अदालत के आदेश के राशि वापस दिलाने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते धनराशि को सुरक्षित किया जा सके।








