नीट पेपर लीक मामला: जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक की बिगड़ी सेहत

Neel Saxena
0 सेकंड पहलेAam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.
नीट (NEET) पेपर लीक मामले और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के विरोध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही है। बुधवार को उनकी भूख हड़ताल का 18वां दिन था। डॉक्टरों की गंभीर चेतावनियों के बीच अब यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट के दरवाजे तक पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता और वकील राकेश कुमार सैनी ने हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर अदालत से तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करने और वांगचुक को आपातकालीन मेडिकल सहायता मुहैया कराने की गुहार लगाई है।
हाई कोर्ट का रुख: सरकारों को नोटिस जारी
सोनम वांगचुक की तेजी से बिगड़ती हालत को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने तत्काल संज्ञान लिया है। अदालत ने बुधवार को केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले पर उठाए गए कदमों का जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता राकेश सैनी का कहना है कि अनशन की वजह से वांगचुक की मांसपेशियां कमजोर होने लगी हैं और उनका वजन लगभग 8.5 किलोग्राम तक कम हो चुका है (अनशन की शुरुआत में उनका वजन 67 किग्रा था)। याचिका में मेडिकल विशेषज्ञों की राय का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि यदि भूख हड़ताल जारी रही तो अगले दो दिनों में उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। अदालत इस मामले पर गुरुवार को एक बेहद अहम सुनवाई करेगी।
क्या प्रशासन जबरन खत्म करवा सकता है अनशन?
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सबसे बड़ा कानूनी सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या सरकार या प्रशासन जबरन उनका अनशन तुड़वा सकता है। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, अदालतें आमतौर पर किसी नागरिक को अनशन खत्म करने का सीधा आदेश नहीं देतीं, लेकिन जीवन के संकट की स्थिति में वे मूकदर्शक भी नहीं रह सकतीं। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को सम्मान से जीने का अधिकार देता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों के अनुसार, इस अधिकार के दायरे में किसी को मरने या खुद की जान लेने का अधिकार नहीं है। लोक व्यवस्था बनाए रखने और किसी अनहोनी से बचने के लिए प्रशासन के पास यह कानूनी शक्ति होती है कि वह प्रदर्शनकारी को जबरन अस्पताल में शिफ्ट कर नली या ड्रिप के जरिए ग्लूकोज और जरूरी पोषण दे सके।
राजनीतिक और फिल्मी हस्तियों का मिला भारी समर्थन
सोनम वांगचुक के इस आंदोलन को विपक्ष और बॉलीवुड का भी बड़ा समर्थन मिल रहा है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार को 'निर्मम और भ्रष्ट' बताते हुए कहा कि इस सरकार के लिए किसी का भी बलिदान मायने नहीं रखता। वहीं, पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने 16 जुलाई को जंतर-मंतर जाकर वांगचुक से मुलाकात करने और समर्थन देने का एलान किया है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने भी उनसे अनशन खत्म करने की अपील की है। इसके अलावा, बॉलीवुड जगत से फिल्म '3 इडियट्स' के अभिनेता ओमी वैद्य और दिग्गज अभिनेत्री जीनत अमान ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर सरकार से तुरंत बातचीत शुरू करने और वांगचुक से अपनी जान की खातिर अनशन वापस लेने की भावुक अपील की है। दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी सरकार के अड़ियल रवैये पर निशाना साधा है।








