बुढ़ार में आरक्षक और अधिवक्ता के बीच मारपीट : दोनों पर FIR, आरक्षक लाइन हाजिर।

दोनों पर FIR, आरक्षक लाइन हाजिर।
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 बुढ़ार में खाकी और अधिवक्ता के बीच टकराव! आरक्षक पर मारपीट का आरोप, वकील को लगे 10 से अधिक टांके; दोनों पक्षों पर FIR

 

शहडोल।  जिले के बुढ़ार थाना क्षेत्र से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे से लेकर अधिवक्ता समुदाय तक हलचल मचा दी है। यहां पुलिस आरक्षक और अधिवक्ता के बीच हुआ विवाद मारपीट और एक-दूसरे के खिलाफ पुलिस प्रकरण दर्ज होने तक पहुंच गया। मामले में अधिवक्ता को गंभीर चोटें आने और 10 से अधिक टांके लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, आरोपी आरक्षक को लाइन हाजिर कर दिया गया है।

 

विवाद ने लिया मारपीट का रूप

मिली जानकारी के अनुसार, बीती रात किसी बात को लेकर बुढ़ार थाने में पदस्थ आरक्षक रोहित यादव और अधिवक्ता अभिनाश पाठक के बीच विवाद हो गया था। देखते ही देखते यह विवाद गंभीर रूप ले बैठा। आरोप है कि इस दौरान आरक्षक ने अधिवक्ता के साथ लाठी-डंडों से मारपीट की, जिससे उन्हें शरीर के विभिन्न हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। बताया जा रहा है कि चोटें इतनी गंभीर थीं कि उपचार के दौरान अधिवक्ता को 10 से अधिक टांके लगाने पड़े।

 

अधिवक्ता की शिकायत पर आरक्षक के खिलाफ मामला दर्ज

घटना के बाद अधिवक्ता अभिनाश पाठक ने बुढ़ार थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरक्षक रोहित यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरक्षक को लाइन हाजिर किए जाने की कार्रवाई भी की गई है।

 

आरक्षक की जवाबी शिकायत से आया नया मोड़

इस मामले में उस समय नया मोड़ आ गया, जब आरक्षक रोहित यादव ने भी अधिवक्ता अभिनाश पाठक के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी। आरक्षक की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अधिवक्ता के विरुद्ध भी मामला दर्ज किया है। इस तरह एक ही घटनाक्रम में दोनों पक्षों की शिकायत पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लिया है।

 

पुलिस की निष्पक्ष जांच पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली और निष्पक्ष जांच को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस थाने में आरक्षक पदस्थ था, उसी थाने में उसके खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज होना चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं, अधिवक्ता को आई गंभीर चोटों और दोनों पक्षों की ओर से दर्ज शिकायतों के बाद मामले की निष्पक्ष जांच बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

 

कानून की रक्षा करने की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर होती है, जब उन्हीं पर कानून तोड़ने के आरोप लगने लगें, तो सवाल उठना स्वाभाविक


 

अब सवाल यह है कि आखिर विवाद की असली वजह क्या थी? मारपीट की शुरुआत कैसे हुई और घटना के दौरान वास्तव में क्या-क्या हुआ? इन सभी पहलुओं का खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा।

 

फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। अब सबकी निगाहें जांच के निष्कर्ष और पुलिस विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। कानून के रखवालों से लेकर आम नागरिक तक, सभी के लिए यह जरूरी है कि मामले में निष्पक्ष जांच हो और जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

 

 

 

 

 

 

 

   

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

   

 

 

 

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