पुरी में 15 लाख श्रद्धालुओं ने खींचा जगन्नाथ रथ: 'जय जगन्नाथ' के जयघोष से गूंजा पुरी धाम
Pooja Reddy
0 सेकंड पहलेIshwar ki leela ko koi nahi samjha sakta.
Neel Saxena
0 सेकंड पहलेDharm aur aastha hi insaan ko sahi raah dikhati hai.
Navya Nair
0 सेकंड पहलेRishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.
Vihaan Patel
0 सेकंड पहलेKundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.
Anjali Patil
0 सेकंड पहलेRishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.
Aarav Sharma
0 सेकंड पहलेYeh toh planets ki chaal ka hi asar hai!
Aryan Malhotra
0 सेकंड पहलेYeh toh planets ki chaal ka hi asar hai!
Neha Tripathi
0 सेकंड पहलेIshwar ki leela ko koi nahi samjha sakta.
Saanvi Pandey
0 सेकंड पहलेYeh toh planets ki chaal ka hi asar hai!
Krishna Yadav
0 सेकंड पहलेSpirituality hi asli shakti hai is duniya mein.
Pihu Agarwal
5 घंटे पहलेSpirituality hi asli shakti hai is duniya mein.
Monika Das
5 घंटे पहलेSpirituality hi asli shakti hai is duniya mein.
Kavya Mishra
5 घंटे पहलेSpirituality hi asli shakti hai is duniya mein.
Aryan Malhotra
5 घंटे पहलेAaj ka din bahut mahatvapurna raha jyotish ke hisaab se.
Trapti Tanwar
6 घंटे पहलेDharm aur aastha hi insaan ko sahi raah dikhati hai.
Pihu Agarwal
7 घंटे पहलेAaj ka din bahut mahatvapurna raha jyotish ke hisaab se.
Diya Gupta
7 घंटे पहलेRishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.
Ayaan Khan
7 घंटे पहलेKarma ka chakkar aisa hi hota hai, koi nahi bacha sakta.
Aditya Verma
8 घंटे पहलेAaj ka din bahut mahatvapurna raha jyotish ke hisaab se.
Ishaan Tiwari
8 घंटे पहलेAaj ka din bahut mahatvapurna raha jyotish ke hisaab se.
Aditya Verma
9 घंटे पहलेSpirituality hi asli shakti hai is duniya mein.
15 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने खींचा महाप्रभु का रथ
ओडिशा के पवित्र तीर्थ पुरी में आयोजित विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 के दौरान इस वर्ष आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब देखने को मिला। देश-विदेश से पहुंचे 15 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने महाप्रभु जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दिव्य रथों की रस्सी खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया। ऐतिहासिक 'बड़ा डंडा' (Grand Road) श्रद्धालुओं से पूरी तरह भर गया और पूरा पुरी धाम "जय जगन्नाथ" के जयघोष से गूंज उठा।
'पहांडी' अनुष्ठान से हुई यात्रा की भव्य शुरुआत
रथ यात्रा की शुरुआत पारंपरिक 'पहांडी' अनुष्ठान से हुई, जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को श्रीमंदिर के गर्भगृह से बाहर लाकर उनके भव्य रथों—नंदीघोष, तालध्वज और देवदलन—पर विराजमान कराया गया। शंखनाद, वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के बीच यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक अनुभव बन गया।
देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु, वैश्विक स्तर पर दिखी धूम
इस वर्ष रथ यात्रा में भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालुओं ने भी भाग लिया। दुनिया के कई देशों में स्थित इस्कॉन (ISKCON) मंदिरों और अन्य सनातन संगठनों ने भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का आयोजन किया। सोशल मीडिया पर यात्रा की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हुए, जिससे भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की वैश्विक पहचान और मजबूत हुई।
प्रशासन की सुरक्षा और सुविधाओं की सराहना
इतने विशाल आयोजन को सफल बनाने के लिए ओडिशा सरकार और जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। हजारों पुलिसकर्मी, आपदा प्रबंधन दल और स्वयंसेवक पूरे मार्ग पर तैनात रहे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, चिकित्सा शिविर, विश्राम केंद्र और गर्मी से राहत देने के लिए पानी की बौछारों की व्यवस्था की गई। भीड़ नियंत्रण के लिए ड्रोन कैमरों और आधुनिक निगरानी प्रणाली का भी उपयोग किया गया।
अनुशासन और भक्ति का अनूठा संगम
भारी भीड़ के बावजूद पूरे आयोजन में श्रद्धालुओं ने अनुशासन और श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी खींचने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इसी आस्था के साथ लाखों श्रद्धालु घंटों तक रथ यात्रा में शामिल रहे।
सनातन संस्कृति की अमर विरासत का प्रतीक
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और सनातन आस्था का जीवंत प्रतीक है। इस वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की सहभागिता ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि महाप्रभु जगन्नाथ के प्रति श्रद्धा सीमाओं से परे है। पुरी में उमड़ा यह आस्था का महासागर भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला ऐतिहासिक आयोजन बन गया।

