Judicial Appointments: जजों की नियुक्ति पर जस्टिस दत्ता बोले- सिर्फ जज ही जजों को नहीं चुनते

जजों की नियुक्ति पर जस्टिस दत्ता बोले- सिर्फ जज ही जजों को नहीं चुनते
प्रतिक्रियाएँ
Neha Tripathi

Neha Tripathi

19 घंटे पहले

Sarkar ko public ko jawab dena chahiye.

Reyansh Joshi

Reyansh Joshi

20 घंटे पहले

Is khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

21 घंटे पहले

Bahut achhi reporting ki hai, keep it up!

Ritika Ghosh

Ritika Ghosh

21 घंटे पहले

Yeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!

Taushif Shekh

Taushif Shekh

23 घंटे पहले

Neta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!

Vihaan Patel

Vihaan Patel

1 दिन पहले

Is khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.

Ayaan Khan

Ayaan Khan

1 दिन पहले

Yeh rajneeti ka asli chehra hai.

Nidhi kumari

Nidhi kumari

1 दिन पहले

Yeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!

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नियुक्ति प्रक्रिया पर टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर प्रचलित धारणा पर सवाल उठाया कि न्यायाधीश ही न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायपालिका में नियुक्ति की प्रक्रिया केवल न्यायपालिका तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसमें कार्यपालिका की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

 

कार्यपालिका की भूमिका
जस्टिस दत्ता के अनुसार, कॉलेजियम की सिफारिश के बाद नियुक्ति प्रक्रिया केंद्र और राज्य सरकारों के स्तर पर आगे बढ़ती है। उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि और योग्यताओं से जुड़ी जानकारी जुटाने में खुफिया एजेंसियों और अन्य संबंधित संस्थाओं की भूमिका भी रहती है। अंतिम नियुक्ति राष्ट्रपति की स्वीकृति से होती है।

 

‘जज ही जज चुनते हैं’ पर सवाल
जस्टिस दत्ता ने ‘जजेज अपॉइंट जजेज’ वाली धारणा को नियुक्ति प्रक्रिया का अधूरा चित्रण बताया। उनके अनुसार, कॉलेजियम की सिफारिश अपने आप किसी व्यक्ति को न्यायाधीश नियुक्त नहीं करती, बल्कि यह व्यापक संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया का एक हिस्सा है।

 

सिफारिशों पर चयनात्मक फैसला
जस्टिस दत्ता ने कॉलेजियम की सिफारिशों पर सरकार की ओर से चुनिंदा तरीके से निर्णय लिए जाने के मुद्दे पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कई बार कुछ सिफारिशों को मंजूरी मिल जाती है, जबकि अन्य नामों पर फैसला लंबित रहता है। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति कॉलेजियम की सिफारिशों की प्रक्रिया और उसके प्रभाव को लेकर सवाल खड़े करती है।

 

टकराव से बचने का पक्ष
जस्टिस दत्ता ने कहा कि न्यायपालिका कई बार कार्यपालिका के साथ सीधे टकराव से बचने के लिए आंशिक रूप से मंजूर सिफारिशों के साथ आगे बढ़ती है। उनके अनुसार, संस्थागत टकराव को बढ़ने से रोकना भी इस तरह के रुख का एक कारण हो सकता है।

 

कॉलेजियम पर आलोचना
कॉलेजियम व्यवस्था की आलोचना पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि किसी विवादित नियुक्ति या गलत फैसले के लिए हर बार कॉलेजियम को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी माना कि न्यायिक चयन प्रक्रिया में गलतियां संभव हैं और कोई भी मानवीय व्यवस्था पूरी तरह त्रुटिहीन नहीं हो सकती।

 

भविष्य की नियुक्तियों पर उम्मीद
जस्टिस दत्ता ने मौजूदा कॉलेजियम से भविष्य में उपयुक्त और विवेकपूर्ण चयन किए जाने की उम्मीद जताई। उनकी टिप्पणियां न्यायिक नियुक्तियों में न्यायपालिका और कार्यपालिका की भूमिका तथा दोनों के बीच संस्थागत संतुलन को लेकर चल रही संवैधानिक बहस के संदर्भ में आई हैं।

 

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति मामले में टिप्पणी
जस्टिस दत्ता की ये टिप्पणियां चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आईं। इसी मामले में जस्टिस दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की पीठ ने मामले को बड़ी पीठ के पास भेजे जाने के सवाल पर अलग-अलग राय व्यक्त की।

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Neha Tripathi

Neha Tripathi

19 घंटे पहले

Sarkar ko public ko jawab dena chahiye.

Reyansh Joshi

Reyansh Joshi

20 घंटे पहले

Is khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

21 घंटे पहले

Bahut achhi reporting ki hai, keep it up!

Ritika Ghosh

Ritika Ghosh

21 घंटे पहले

Yeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!

Taushif Shekh

Taushif Shekh

23 घंटे पहले

Neta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!

Vihaan Patel

Vihaan Patel

1 दिन पहले

Is khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.

Ayaan Khan

Ayaan Khan

1 दिन पहले

Yeh rajneeti ka asli chehra hai.

Nidhi kumari

Nidhi kumari

1 दिन पहले

Yeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!

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