SC Contempt Plea: मेट्रो स्टेशन बंद रहने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

मेट्रो स्टेशन बंद रहने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका
प्रतिक्रियाएँ
Neha Tripathi

Neha Tripathi

6 घंटे पहले

Neta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!

Ravi sinha

Ravi sinha

8 घंटे पहले

Neta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!

Nisha Shah

Nisha Shah

8 घंटे पहले

Chunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.

Diya Gupta

Diya Gupta

9 घंटे पहले

Is maamle mein sarkari paksh kya hai?

Harsh Pandya

Harsh Pandya

10 घंटे पहले

Sarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!

Yash Kulkarni

Yash Kulkarni

11 घंटे पहले

Is khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.

Aryan Malhotra

Aryan Malhotra

13 घंटे पहले

Chunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.

Kabir Shukla

Kabir Shukla

13 घंटे पहले

Nishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.

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सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर
दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के दौरान मेट्रो स्टेशनों और रेल सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश दिए जाने के बावजूद 10 अक्टूबर को मेट्रो स्टेशनों को बंद रखा गया और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। याचिकाकर्ता ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है।

 

याचिका में किन अधिकारियों को बनाया गया पक्षकार?
रिपोर्ट के मुताबिक, यह याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर की गई है। इसमें केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और अन्य अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि शीर्ष अदालत के निर्देशों के बावजूद राजधानी में कुछ मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने की व्यवस्था जारी रही, जिससे लोगों की आवाजाही और रोजमर्रा के काम प्रभावित हुए। ये आरोप याचिका में लगाए गए हैं; इस मामले में अदालत की आगे की कार्रवाई और निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

 

 

सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर को क्या कहा था?
इससे पहले शुक्रवार, 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित CJP प्रदर्शन के मद्देनजर मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र को निर्देश दिया था कि प्रदर्शन के कारण 10 अक्टूबर को दिल्ली आने वाली मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं होना चाहिए। अदालत ने कहा था कि प्रदर्शन की वजह से पूरे परिवहन तंत्र को ठप नहीं किया जा सकता।

 

मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर विवाद क्यों बढ़ा?
CJP के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। इसके तहत मेट्रो के कई स्टेशनों पर प्रवेश और निकास पर पाबंदियां लगाने तथा कुछ रेल सेवाओं में बदलाव की जानकारी सामने आई। इसी व्यवस्था को लेकर सवाल उठे कि क्या सुरक्षा प्रबंध सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप थे। अवमानना याचिका में इसी मुद्दे पर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है। याचिका दायर होना अपने आप में अदालत द्वारा अवमानना साबित कर देना नहीं है; इस पर आगे का निर्णय न्यायालय की सुनवाई और आदेश पर निर्भर करेगा।

 

अब आगे क्या होगा?
अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर आगे होने वाली सुनवाई और अदालत के निर्देशों पर नजर रहेगी। यदि अदालत मामले पर विचार करती है, तो संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जा सकता है और निर्देशों के पालन से जुड़े तथ्यों की जांच हो सकती है। फिलहाल याचिका में लगाए गए आरोपों और अदालत के अंतिम निष्कर्ष के बीच अंतर करना जरूरी है। मामले में आगे कोई आदेश या आधिकारिक जानकारी सामने आने पर स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।

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Neha Tripathi

Neha Tripathi

6 घंटे पहले

Neta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!

Ravi sinha

Ravi sinha

8 घंटे पहले

Neta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!

Nisha Shah

Nisha Shah

8 घंटे पहले

Chunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.

Diya Gupta

Diya Gupta

9 घंटे पहले

Is maamle mein sarkari paksh kya hai?

Harsh Pandya

Harsh Pandya

10 घंटे पहले

Sarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!

Yash Kulkarni

Yash Kulkarni

11 घंटे पहले

Is khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.

Aryan Malhotra

Aryan Malhotra

13 घंटे पहले

Chunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.

Kabir Shukla

Kabir Shukla

13 घंटे पहले

Nishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.

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