FCRA संशोधन बिल पर केंद्र का भरोसा: गृह मंत्री अमित शाह और मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा के बीच अहम बैठक

गृह मंत्री अमित शाह और मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा के बीच अहम बैठक
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Ravi sinha

Ravi sinha

0 सेकंड पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Sai Mehta

Sai Mehta

0 सेकंड पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Vaishali shinde

Vaishali shinde

0 सेकंड पहले

Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

Sneha Menon

Sneha Menon

0 सेकंड पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Nidhi kumari

Nidhi kumari

1 घंटे पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

Tanya Bajaj

Tanya Bajaj

1 घंटे पहले

Is decision ka poore desh par seedha asar padega.

Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

4 घंटे पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

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संसद के मानसून सत्र के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा के बीच नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA Amendment Bill 2026) को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार और विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों की चिंताओं से गृह मंत्री को अवगत कराया। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बातचीत को पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।


FCRA बिल पर गृह मंत्री का बड़ा आश्वासन
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने आशंका जताई कि यदि कानून को पूर्वव्यापी (Retrospective) प्रभाव से लागू किया गया तो कई संस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं। इस पर अमित शाह ने स्पष्ट आश्वासन दिया कि प्रस्तावित संशोधन कानून को पिछली तारीख से लागू नहीं किया जाएगा। यह केवल भविष्य (Prospective) में प्रभावी होगा। इस बयान के बाद मिजोरम सरकार ने राहत की भावना व्यक्त की है।


केंद्र देगा लिखित जवाब, 12 अगस्त को संसद में चर्चा
मुख्यमंत्री द्वारा उठाई गई विभिन्न आपत्तियों पर गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार सभी बिंदुओं पर पैराग्राफ-वार लिखित टिप्पणी साझा करेगी। इसके अलावा जानकारी दी गई कि FCRA संशोधन विधेयक पर संसद के मानसून सत्र के दौरान 12 अगस्त 2026 को चर्चा होने की संभावना है। इस चर्चा पर पूरे देश के सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।

 

क्यों हो रहा है विधेयक का विरोध?
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार यदि किसी NGO का FCRA पंजीकरण रद्द या निलंबित होता है, तो उसकी विदेशी फंडिंग से बनी संपत्तियों के प्रबंधन के लिए सरकार एक नामित प्राधिकरण नियुक्त कर सकेगी। मिजोरम सहित कई ईसाई संगठनों और सामाजिक संस्थाओं का कहना है कि इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण से जुड़े संस्थानों पर असर पड़ सकता है। इसी कारण राज्य सरकार ने केंद्र के सामने अपनी चिंताएं रखीं।


सरकार का पक्ष और राजनीतिक महत्व
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दोहराया कि प्रस्तावित कानून पूरी तरह धर्म-निरपेक्ष (Religion Neutral) है और इसका उद्देश्य किसी विशेष समुदाय या संगठन को निशाना बनाना नहीं, बल्कि विदेशी फंडिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। संसद में प्रस्तावित चर्चा से पहले हुई यह बैठक राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सभी की निगाहें 12 अगस्त को होने वाली संसदीय बहस और सरकार के अंतिम रुख पर टिकी हैं।


आगे क्या होगा?
FCRA संशोधन विधेयक पर संसद में होने वाली बहस के बाद इसके अंतिम स्वरूप पर निर्णय लिया जाएगा। यदि सरकार राज्यों और सामाजिक संगठनों की प्रमुख आपत्तियों को शामिल करती है तो विधेयक में बदलाव संभव है। वहीं विपक्ष और विभिन्न नागरिक संगठन भी इस मुद्दे पर अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। ऐसे में आगामी संसदीय चर्चा इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकती है।

 

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Ravi sinha

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Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Sai Mehta

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Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Vaishali shinde

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Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

Sneha Menon

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0 सेकंड पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Nidhi kumari

Nidhi kumari

1 घंटे पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

Tanya Bajaj

Tanya Bajaj

1 घंटे पहले

Is decision ka poore desh par seedha asar padega.

Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

4 घंटे पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

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