दुबई से चल रहे साइबर रैकेट का भंडाफोड़: मुंबई क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई

Navya Nair
1 महीने पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Yash Kulkarni
1 महीने पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Yash Kulkarni
1 महीने पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Dev Kapoor
1 महीने पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Pranav Srivastava
1 महीने पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Vivaan Gupta
1 महीने पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Diya Gupta
1 महीने पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Aditya Verma
1 महीने पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Pranav Srivastava
1 महीने पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Monika Das
1 महीने पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Sneha Menon
1 महीने पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दुबई से संचालित एक हाई-टेक साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। जांच के दौरान गोवा के कलंगुट और कैंडोलिम स्थित एक लग्जरी विला पर छापेमारी की गई, जहां से 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह देशभर में ऑनलाइन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े नेटवर्क का हिस्सा था। पुलिस अब पूरे अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
गोवा के लग्जरी विला में चल रहा था ऑपरेशन
क्राइम ब्रांच को पायधुनी पुलिस स्टेशन में दर्ज साइबर धोखाधड़ी के मामले की जांच के दौरान इस गिरोह की जानकारी मिली। खुफिया इनपुट मिलने के बाद विशेष टीम ने गोवा के कलंगुट और कैंडोलिम इलाके में स्थित एक विला पर छापा मारा। वहां मौजूद सभी 12 आरोपियों को हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार आरोपी कई राज्यों में फैले साइबर अपराध नेटवर्क का संचालन कर रहे थे और गोवा को ऑपरेशन सेंटर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।
डिजिटल उपकरणों का बड़ा जखीरा बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में डिजिटल और बैंकिंग से जुड़े उपकरण जब्त किए। आरोपियों के पास से 128 एटीएम कार्ड, दर्जनों सक्रिय सिम कार्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक पासबुक, चेकबुक और नेटवर्किंग डिवाइस बरामद हुए। शुरुआती जांच से स्पष्ट हुआ कि इन संसाधनों का उपयोग फर्जी बैंक खाते संचालित करने, ऑनलाइन ठगी की रकम ट्रांसफर करने और डिजिटल पहचान छिपाने के लिए किया जाता था। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच जारी है।
म्यूल अकाउंट और बेटिंग ऐप्स से होती थी करोड़ों की ठगी
जांच एजेंसियों के मुताबिक यह गिरोह फर्जी ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को जाल में फंसाता था। इसके बाद ठगी की रकम म्यूल बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। कई स्तरों पर रकम को ट्रांसफर कर उसका स्रोत छिपाया जाता था और अंत में पैसे दुबई में बैठे नेटवर्क संचालकों तक पहुंचाए जाते थे। गिरोह के स्थानीय सदस्यों को नकदी निकालने और खाते उपलब्ध कराने के बदले कमीशन भी दिया जाता था।
500 करोड़ रुपये से अधिक के फ्रॉड का संदेह
मुंबई पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क पिछले कुछ महीनों में 500 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हो सकता है। राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज 83 से अधिक मामलों में इस गिरोह के लिंक मिलने की बात भी सामने आई है। जांच एजेंसियां बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और विदेशी संपर्कों की विस्तृत जांच कर रही हैं।
दुबई बैठे मास्टरमाइंड की तलाश जारी
पुलिस का मानना है कि पूरे नेटवर्क का संचालन दुबई में बैठा मास्टरमाइंड कर रहा था, जबकि भारत में मौजूद सदस्य उसके निर्देशों पर काम करते थे। फर्जी दस्तावेजों से सिम कार्ड और बैंक खाते खोलकर पूरे नेटवर्क को संचालित किया जाता था। अब क्राइम ब्रांच अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर फरार सरगनाओं की पहचान और गिरफ्तारी की दिशा में कार्रवाई कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां तथा बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।









