कलकत्ता हाईकोर्ट से TMC को बड़ा झटका: हाईकोर्ट ने जल्द सुनवाई की याचिका खारिज की

Trapti Tanwar
0 सेकंड पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब कोर्ट और बैंक खातों तक पहुंच चुकी है। मंगलवार को कलकत्ता हाईकोर्ट से ममता बनर्जी के 'कालीघाट गुट' को उस समय बड़ा झटका लगा, जब अदालत ने पार्टी के तीन बैंक खातों को फ्रीज करने के खिलाफ दायर याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से स्पष्ट मना कर दिया। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस केस की सुनवाई भी आम मामलों की तरह ही होगी। यानी जो नंबर तय है, उसी लिस्टिंग के अनुसार मामले को सुना जाएगा, इसे समय से पहले सुनना मुमकिन नहीं है।
3 खातों में फंसे हैं 440 करोड़ रुपये, वित्तीय लेन-देन पूरी तरह ठप
ममता गुट की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील किशोर दत्ता ने अदालत को बताया कि टीएमसी के तीन महत्वपूर्ण बैंक खातों पर रोक लगा दी गई है। इस वित्तीय तालाबंदी की वजह से इन खातों से किसी भी तरह का पेमेंट, फंड ट्रांसफर या रोज़मर्रा का लेन-देन नहीं हो पा रहा है। वकील ने कोर्ट के सामने संकट की गंभीरता को रखते हुए बताया कि इन खातों में लगभग 440 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि फंसी हुई है, जिससे पार्टी के कामकाज पर गहरा असर पड़ रहा है। उन्होंने इस आपात स्थिति को देखते हुए तुरंत सुनवाई की अपील की, लेकिन अदालत ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया। दूसरी तरफ, राज्य सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि उन्हें मामले के दस्तावेज सोमवार को ही मिले हैं, जिसके बाद उन्होंने गुरुवार को सुनवाई शुरू करने का अनुरोध किया।
बागी विधायकों की शिकायत और 'असली TMC' की जंग
पार्टी के खातों पर यह बड़ी कार्रवाई तृणमूल कांग्रेस में आए हालिया बिखराव और बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी से जुड़े कुछ विधायकों की शिकायत के बाद हुई है। दरअसल, पार्टी में टूट के बाद पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने आंतरिक कलह का हवाला देते हुए बैंक को पत्र लिखकर लेन-देन रोकने की मांग की थी। इसके बाद, खुद को 'असली तृणमूल' बताने वाले ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने यह एक्शन लिया। ऋतब्रत गुट ने इस कानूनी लड़ाई के लिए दिग्गज वकील के. परमेश्वर को मैदान में उतारा है, जिससे साफ है कि तृणमूल के 'सिंहासन' और 'तिजोरी', दोनों पर कब्जे की यह सियासी जंग अब बेहद आक्रामक मोड़ ले चुकी है।
फंड के सोर्स पर उठे सवाल: कट-मनी या घोटाला?
इन बागी विधायकों ने खातों में जमा 440 करोड़ रुपये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने जांच टीम से मांग की है कि इस पूरे पैसे के सोर्स (स्रोत) की गहन जांच की जाए। बागी गुट का आरोप है कि वे यह पता लगाना चाहते हैं कि यह पैसा ईमानदारी की कमाई का है या फिर किसी गलत तरीके से जुटाया गया है। उन्हें अंदेशा है कि यह विशाल फंड कट-मनी (कमीशन), पब्लिक फंड की हेराफेरी या फिर किसी बड़े वित्तीय घोटाले का हिस्सा हो सकता है। फिलहाल, कोर्ट से राहत न मिलने के कारण ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले कालीघाट गुट की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।








