अखिलेश ने भेजा निशिकांत दुबे को कानूनी नोटिस: सोशल मीडिया पोस्ट पर सपा-भाजपा आमने-सामने

Neel Saxena
0 सेकंड पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बीच सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। विवाद उस पोस्ट के बाद शुरू हुआ जिसमें राम मंदिर चढ़ावा गड़बड़ी मामले के आरोपी रामाशंकर यादव उर्फ 'टिन्नू यादव' और अखिलेश यादव के बीच कथित संपर्क का दावा किया गया था। अखिलेश यादव ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा, निराधार और दुर्भावनापूर्ण बताया है।
सपा ने भेजा मानहानि का कानूनी नोटिस
पोस्ट हटाने की चेतावनी के बावजूद कथित पोस्ट नहीं हटाए जाने पर समाजवादी पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष केके पाल और समाजवादी अधिवक्ता सभा के माध्यम से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में कथित आपत्तिजनक पोस्ट हटाने और दो सप्ताह के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई है। सपा ने कहा है कि ऐसा नहीं होने पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अखिलेश यादव ने जताई कड़ी आपत्ति
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच X पर भाजपा सांसद की पोस्ट पर आपत्ति जताते हुए उसे तत्काल हटाने की मांग की थी। उनका कहना है कि कथित आरोप तथ्यहीन हैं और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है। सपा का आरोप है कि इस तरह की पोस्ट राजनीतिक रूप से पार्टी और उसके PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन को बदनाम करने के उद्देश्य से साझा की गई।
भाजपा सांसद का पलटवार
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने नोटिस के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि मानहानि व्यक्तिगत रूप से हुई है तो नोटिस पार्टी पदाधिकारी की ओर से क्यों भेजा गया। उन्होंने यह भी कहा कि वे कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे और अपने पक्ष को अदालत में रखेंगे। साथ ही उन्होंने सपा के आरोपों को राजनीतिक बताया।
पुलिस में भी दर्ज हुई शिकायत
मानहानि नोटिस के अलावा उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाजपा सांसद तथा अन्य लोगों के खिलाफ शिकायतें भी दर्ज कराई हैं। शिकायतों में सोशल मीडिया पर कथित भ्रामक जानकारी प्रसारित करने का आरोप लगाया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित पुलिस और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगी।
कानूनी और राजनीतिक बहस तेज
यह विवाद अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर समाजवादी पार्टी इसे अपनी छवि खराब करने की साजिश बता रही है, वहीं भाजपा सांसद अपने बयानों पर कायम हैं। फिलहाल मामले का अंतिम निष्कर्ष न्यायिक और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।








