हिजाब फैसले पर ओवैसी की नाराजगी: धार्मिक स्वतंत्रता पर बहस

Vaishali shinde
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
प्रयागराज के एक स्कूल में हिजाब पहनने की अनुमति से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ओवैसी ने अदालत के फैसले को धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से जोड़ते हुए इसे इस्लाम पर हमला बताया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले मुस्लिम समुदाय की धार्मिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं। ओवैसी ने अपने बयान में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 25 का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी धर्म में क्या जरूरी है और क्या नहीं, यह तय करने का अधिकार अदालतों के पास कितना होना चाहिए। उनके बयान के बाद हिजाब को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस फिर तेज हो गई है।
क्या है प्रयागराज का पूरा मामला
यह मामला प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाली कक्षा 11 की एक मुस्लिम छात्रा से जुड़ा है। छात्रा ने स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब या स्कार्फ पहनने की अनुमति दिए जाने की मांग की थी। इस मामले को लेकर छात्रा की ओर से इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। छात्रा का कहना था कि वह स्कूल की निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनना चाहती है। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया। फैसले के बाद इस मामले ने धार्मिक स्वतंत्रता, स्कूल ड्रेस कोड और व्यक्तिगत अधिकारों को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।
हाई कोर्ट ने ड्रेस कोड को माना अहम
इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए हिजाब को इस्लाम का अनिवार्य धार्मिक अभ्यास नहीं माना। अदालत ने स्कूल के ड्रेस कोड और संस्थान में अनुशासन तथा समानता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। कोर्ट के अनुसार शिक्षण संस्थानों को अपनी निर्धारित वर्दी और ड्रेस कोड लागू करने का अधिकार है। इसी आधार पर छात्रा को स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति देने की मांग स्वीकार नहीं की गई। फैसले के बाद धार्मिक स्वतंत्रता और संस्थागत नियमों के बीच संतुलन को लेकर चर्चा शुरू हो गई। इसी मुद्दे को लेकर अब राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।
ओवैसी ने संविधान का दिया हवाला
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हाई कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए संविधान के अनुच्छेद 19 और 25 का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि नागरिकों को अपनी अभिव्यक्ति और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार प्राप्त हैं। ओवैसी ने अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अदालतें यह तय करने वाली कौन होती हैं कि इस्लाम में क्या जरूरी है और क्या नहीं। उन्होंने हिजाब को मुस्लिम महिलाओं की धार्मिक पहचान और व्यक्तिगत पसंद से जोड़कर अपनी बात रखी। ओवैसी ने यह भी कहा कि मुस्लिम बच्चियां हिजाब अपने सिर पर पहनती हैं, दिमाग पर नहीं। उनके इस बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
मुस्लिम बेटियों की शिक्षा का मुद्दा उठाया
ओवैसी ने अपने बयान में मुस्लिम बेटियों की शिक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि यदि धार्मिक पहचान से जुड़े पहनावे को लेकर लगातार विवाद और प्रतिबंध सामने आते हैं तो इसका असर छात्राओं की शिक्षा पर पड़ सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि मुस्लिम बच्चियों को शिक्षा के समान अवसर मिलने चाहिए या नहीं। ओवैसी ने इस मुद्दे को संविधान में दिए गए अधिकारों और समानता से जोड़ते हुए सरकार और व्यवस्था पर निशाना साधा। हालांकि दूसरी ओर स्कूलों में ड्रेस कोड और अनुशासन को लेकर संस्थानों के अधिकारों की बात भी सामने आती रही है। इसी वजह से हिजाब विवाद धार्मिक स्वतंत्रता और संस्थागत नियमों के बीच बहस का विषय बन गया है।
हिजाब विवाद ने फिर पकड़ा तूल
भारत में हिजाब को लेकर इससे पहले भी कई राज्यों में राजनीतिक और कानूनी विवाद सामने आ चुके हैं। कर्नाटक के उडुपी से शुरू हुआ हिजाब विवाद भी अदालतों तक पहुंचा था और सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर विभाजित फैसला सामने आया था। अब प्रयागराज के स्कूल से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के बाद यह मुद्दा फिर राष्ट्रीय बहस में आ गया है। एक तरफ अदालत के फैसले में स्कूल के ड्रेस कोड और अनुशासन को महत्व दिया गया है, जबकि दूसरी ओर ओवैसी जैसे नेता इसे धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से जोड़ रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और कानूनी चर्चा और बढ़ने की संभावना है।





