छात्रों के आंदोलन के आगे झुकी सरकार: JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का बड़ा फैसला

Neha Tripathi
0 सेकंड पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Krishna Yadav
0 सेकंड पहलेYeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!
Pihu Agarwal
0 सेकंड पहलेYeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!
Myra Dubey
0 सेकंड पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
Tanya Bajaj
27 सेकंड पहलेSarkar ko public ko jawab dena chahiye.
झारखंड में 24 दिनों से जारी छात्र आंदोलन और अनशन के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई आपातकालीन कैबिनेट बैठक में JSSC-CGL परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने की मंजूरी दी गई। सरकार ने विवादित एजेंसी TDPL यानी TSR Data Processing Private Limited से जुड़ी अन्य परीक्षाओं को भी निरस्त करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही इन परीक्षाओं से जुड़े परिणाम, गतिविधियां और चयन प्रक्रिया भी रद्द किए जाने की बात कही गई है। इस फैसले के बाद लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों में खुशी का माहौल देखने को मिला। सरकार के इस निर्णय को छात्र आंदोलन की बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है।
2014 से अब तक की भर्ती परीक्षाओं की होगी जांच
सरकार ने राज्य में वर्ष 2014 से अब तक आयोजित भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों और अनियमितताओं की व्यापक जांच कराने का भी फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने जांच की जिम्मेदारी राज्य CID और SIT को देने के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान भर्ती परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ियों, त्रुटियों और अन्य अनियमितताओं की पड़ताल की जाएगी। सरकार का कहना है कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। जांच के दायरे में वर्ष 2014 से अब तक की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को शामिल किया गया है। इस जांच से आने वाले समय में कई पुराने मामलों की स्थिति भी स्पष्ट होने की उम्मीद है।
परीक्षा सुधार समिति का किया गया गठन
सरकार ने भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए परीक्षा सुधार समिति का गठन किया है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में गठित यह समिति परीक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधारों पर काम करेगी। समिति का उद्देश्य ऐसी परीक्षा प्रणाली तैयार करना है, जिसमें गड़बड़ी और अनियमितता की संभावनाओं को कम किया जा सके। परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों पर भी विचार किया जाएगा। सरकार की ओर से इसे भविष्य की भर्ती परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। छात्रों की शिकायतों और लंबे समय से उठ रहे परीक्षा सुधार के मुद्दे को देखते हुए समिति की भूमिका अहम मानी जा रही है।
आंदोलनकारी छात्रों ने मनाया जश्न
JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने की घोषणा के बाद रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई। पिछले 24 दिनों से आंदोलन और अनशन कर रहे छात्र नेताओं ने सरकार के फैसले का स्वागत किया। आंदोलनकारी छात्रों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया और मिठाई बांटकर खुशी जताई। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत अन्य आंदोलनकारियों ने सरकार के फैसले के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। हालांकि आंदोलनकारी छात्रों के एक धड़े ने परीक्षा में कथित गड़बड़ी की पूरी जांच CBI से कराने की मांग जारी रखने की बात कही है। ऐसे में परीक्षा रद्द होने के बाद भी छात्रों की कुछ मांगों को लेकर आंदोलन का मुद्दा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
CBI जांच की मांग पर अब भी कायम एक गुट
सरकार के फैसले से आंदोलनकारी छात्रों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन छात्र संगठनों के बीच अभी भी कुछ मुद्दों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। JPSC-JSSC Reforms Manch के एक धड़े ने परीक्षा रद्द करने के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन कथित धांधली की पूरी जांच CBI से कराने की मांग पर वह अब भी कायम है। इस गुट का कहना है कि केवल परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच भी जरूरी है। छात्रों की मांग है कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। सरकार द्वारा CID और SIT जांच के आदेश के बाद अब जांच की दिशा पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में जांच से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर इस मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
चयनित अभ्यर्थियों में फैसले को लेकर नाराजगी
जहां आंदोलनकारी छात्र सरकार के फैसले के बाद जश्न मना रहे हैं, वहीं पहले की परीक्षाओं में सफल होकर नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों में नाराजगी देखने को मिल रही है। TDPL से जुड़ी पूर्व परीक्षाओं के परिणाम और चयन निरस्त किए जाने के फैसले का करीब 2,000 चयनित अभ्यर्थी विरोध कर रहे हैं। इन अभ्यर्थियों ने रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन शुरू किया है और सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया के बाद वे सेवा दे रहे हैं और अब परिणाम रद्द होने से उनके भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। एक तरफ छात्रों की परीक्षा रद्द करने की मांग पूरी हुई है, वहीं दूसरी तरफ चयनित अभ्यर्थियों के विरोध ने सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब सरकार के अगले कदम और जांच प्रक्रिया पर आंदोलनकारी छात्रों के साथ-साथ चयनित अभ्यर्थियों की भी नजर बनी हुई है।




