नशा मुक्त भारत अभियान का बड़ा आयोजन: नशा मुक्त भारत अभियान की छठी वर्षगांठ

Nidhi kumari
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Ayaan Khan
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Dhruv Bhatt
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Riya Jain
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Ayaan Khan
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
नशे के खिलाफ केंद्र सरकार के नशा मुक्त भारत अभियान यानी NMBA ने छह वर्ष पूरे कर लिए हैं। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से अभियान की छठी वर्षगांठ पर देशभर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर युवाओं, महिलाओं, छात्रों और विभिन्न संस्थानों को नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ सामूहिक संकल्प दिलाया जा रहा है। स्कूलों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों में लोग नशे से दूर रहने और समाज को जागरूक करने की शपथ ले रहे हैं। अभियान के जरिए युवाओं को नशीली दवाओं से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य नशे के खिलाफ जनभागीदारी को मजबूत करते हुए इसे व्यापक सामाजिक आंदोलन बनाना है।
देशभर में लिया जा रहा राष्ट्रीय सामूहिक संकल्प
NMBA की छठी वर्षगांठ के मौके पर देशभर में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ राष्ट्रीय सामूहिक संकल्प कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस अभियान में युवा, महिलाएं, शैक्षणिक संस्थान, सरकारी विभाग और गैर-सरकारी संगठन भी भाग ले रहे हैं। लोग प्रत्यक्ष कार्यक्रमों के साथ डिजिटल माध्यम से e-Pledge लेकर भी इस अभियान से जुड़ रहे हैं। मंत्रालय की ओर से इस विशेष आयोजन के जरिए करीब 10 से 12 करोड़ नागरिकों को नशे के खिलाफ संकल्प से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। देश के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ होने वाली इस पहल का उद्देश्य नशे के खिलाफ सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना है। कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों से नशीली दवाओं से दूर रहने और दूसरों को भी जागरूक करने की अपील की जा रही है।
15 अगस्त 2020 को शुरू हुआ था अभियान
नशा मुक्त भारत अभियान की शुरुआत सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 15 अगस्त 2020 को की थी। शुरुआत में इस अभियान को देश के उन जिलों में केंद्रित किया गया था, जिन्हें नशीली दवाओं के दुरुपयोग की दृष्टि से अधिक संवेदनशील माना गया था। पिछले छह वर्षों में अभियान का दायरा लगातार बढ़ाया गया और इसे देशभर में जनजागरूकता अभियान के रूप में आगे बढ़ाया गया। अब तक करोड़ों नागरिक इस अभियान से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ चुके हैं। अभियान में विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य जागरूकता, रोकथाम, उपचार और पुनर्वास के माध्यम से नशे की समस्या से व्यापक स्तर पर निपटना है।
इस साल की थीम भारत हो नशे से स्वतंत्र
NMBA की छठी वर्षगांठ के अवसर पर इस वर्ष की थीम विकसित भारत का मंत्र, भारत हो नशे से स्वतंत्र रखी गई है। इस संदेश के जरिए देश के युवाओं को नशीली दवाओं से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि देश की युवा शक्ति को नशे से बचाकर उसे राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से शैक्षणिक संस्थानों और युवाओं के बीच जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। सामूहिक संकल्प के जरिए लोगों को नशे के खिलाफ व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया जा रहा है। अभियान में परिवार, समाज और संस्थानों की संयुक्त भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डिजिटल माध्यम से भी बढ़ाई जा रही पहुंच
नशा मुक्त भारत अभियान को व्यापक स्तर तक पहुंचाने के लिए सरकार डिजिटल माध्यमों का भी इस्तेमाल कर रही है। नागरिक ऑनलाइन e-Pledge के जरिए नशे के खिलाफ अभियान से जुड़ सकते हैं और सामूहिक संकल्प का हिस्सा बन सकते हैं। मंत्रालय की ओर से NMBA 2.0 मोबाइल ऐप और जियो-टैगिंग पोर्टल जैसी सुविधाओं को भी विकसित किया गया है। इनके माध्यम से लोगों को नशामुक्ति केंद्रों और परामर्श से जुड़ी सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। अभियान के जरिए जागरूकता के साथ-साथ नशे की लत से प्रभावित लोगों को उपचार और पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। इस डिजिटल और सामुदायिक पहल के जरिए अभियान की पहुंच देश के अधिक से अधिक नागरिकों तक बढ़ाने का लक्ष्य है।
नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए हेल्पलाइन
नशीली दवाओं की लत से जूझ रहे लोगों और उनके परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14446 जारी किया गया है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से नशे की समस्या से प्रभावित लोगों को परामर्श और पुनर्वास से जुड़ी सहायता की जानकारी दी जाती है। सरकार का जोर केवल नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित लोगों को उपचार और पुनर्वास की सुविधा से जोड़ने पर भी है। छठी वर्षगांठ के अवसर पर देशभर में आयोजित सामूहिक संकल्प कार्यक्रम इसी व्यापक अभियान का हिस्सा है। सरकार का संदेश है कि नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए युवाओं, परिवारों और संस्थानों को मिलकर काम करना होगा। नशे के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रखते हुए एक स्वस्थ और सुरक्षित भारत के निर्माण की दिशा में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।




