नेपाल में ग्लेशियर फटने से तबाही: बाढ़ में 750 से ज्यादा मौतें,भारत ने नेपाल को भेजी मदद

Navya Nair
1 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Myra Dubey
3 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Priya Iyer
4 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Shruti Bajpai
4 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Kunal Rao
4 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Ritika Ghosh
4 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Saanvi Pandey
11 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
नेपाल और चीन के तिब्बत सीमा क्षेत्र में 26 अगस्त 2026 को ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने के बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक भीषण फ्लैश फ्लड आ गई। तेज रफ्तार से आए पानी और मलबे ने नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन समेत कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। बाढ़ का बहाव इतना तेज था कि इसके रास्ते में आने वाले कई घर, सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे देखते ही देखते क्षतिग्रस्त हो गए। कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं और सीमावर्ती क्षेत्रों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इस आपदा का असर नेपाल से लगे भारत के कुछ सीमावर्ती इलाकों में भी महसूस किया गया है और नदियों के जलस्तर को लेकर संबंधित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई गई है।
भारत के सीमावर्ती इलाकों पर भी बढ़ी चिंता
नेपाल में आई बाढ़ के बाद भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश से लगे सीमावर्ती इलाकों में भी नदियों के जलस्तर और संभावित बाढ़ को लेकर चिंता बढ़ गई है। नेपाल से निकलने वाली कई नदियां भारत के मैदानी इलाकों में प्रवेश करती हैं, जिसके कारण नेपाल में भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ का असर भारतीय सीमा क्षेत्र में भी पड़ सकता है। बिहार के सीमावर्ती जिलों और उत्तर प्रदेश के कुछ तराई क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। संभावित खतरे वाले इलाकों में लोगों को सावधानी बरतने और नदी तथा निचले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।
मृतकों और लापता लोगों की संख्या बढ़ी
भीषण बाढ़ और उसके बाद हुए विनाश में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 750 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 2,500 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जिनमें स्थानीय नागरिकों के साथ भारतीय तीर्थयात्री और विदेशी पर्यटक भी शामिल बताए जा रहे हैं। कई प्रभावित इलाकों में भारी मात्रा में मलबा जमा होने के कारण राहत और खोज अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। प्रशासन की टीमें लगातार मलबा हटाकर लापता लोगों की तलाश कर रही हैं। प्रभावित परिवार अपने परिजनों की जानकारी के लिए राहत एजेंसियों और प्रशासन से संपर्क कर रहे हैं।
तीन दिन बाद मलबे से जिंदा निकली मासूम
इस भीषण आपदा के बीच रसुवा जिले के तिमुरे इलाके से राहत देने वाली खबर सामने आई है। रेस्क्यू टीम को मलबे के नीचे से एक बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद जवानों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया। कई घंटे की मेहनत के बाद टीम ने करीब 6 साल की बच्ची को मलबे के नीचे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बच्ची को बाहर निकालने के बाद तत्काल चिकित्सकीय सहायता के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। तीन दिन तक मलबे के नीचे फंसे रहने के बाद बच्ची का जिंदा मिलना बचाव दल के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। इस घटना ने रेस्क्यू टीमों में उम्मीद बढ़ाई है कि मलबे के नीचे अन्य लोगों के जीवित होने की संभावना को देखते हुए खोज अभियान जारी रखा जाए।
युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवान लगातार राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं। दुर्गम और कटे हुए इलाकों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है, जबकि जमीन पर जवान मलबे और क्षतिग्रस्त रास्तों के बीच फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटे हैं। त्रिशूली हाइड्रोपावर परियोजना की सुरंग में फंसे सैकड़ों मजदूरों को भी जोखिम भरे अभियान के जरिए बाहर निकाला गया है। अब तक हजारों लोगों को प्रभावित क्षेत्रों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। खराब मौसम और दोबारा बाढ़ आने की आशंका के कारण बचाव दलों के सामने लगातार चुनौती बनी हुई है।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल में आई इस भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद भारत सरकार ने राहत और बचाव कार्यों में सहयोग के लिए मदद भेजी है। भारतीय विमानों के जरिए नेपाल को जरूरी दवाएं, खाद्य सामग्री और राहत उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा सुरंगों और मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने पर भी काम किया जा रहा है। अज्ञात शवों की पहचान में सहायता के लिए डीएनए जांच और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद भी उपलब्ध कराई जा रही है। नेपाल की स्थिति को देखते हुए भारत के सीमावर्ती राज्यों में भी प्रशासनिक और आपदा प्रबंधन एजेंसियां सतर्क हैं। फिलहाल दोनों देशों की एजेंसियां प्रभावित लोगों की मदद, लापता लोगों की तलाश और संभावित नई बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।





