Meta का बड़ा फैसला: बच्चों के लिए Instagram-Facebook पर लगेगा ‘Digital Bedtime’

Anil Sen
7 घंटे पहलेAam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.
Pihu Agarwal
9 घंटे पहलेPeedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.
Aarav Sharma
11 घंटे पहलेYeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.
Anjali Patil
12 घंटे पहलेHum is cause ke saath hain, awaaz uthani chahiye.
Arjun Singh
14 घंटे पहलेJab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.
सोशल मीडिया का बढ़ता इस्तेमाल बच्चों और किशोरों के स्क्रीन टाइम को लगातार बढ़ा रहा है। इसी बीच Meta ने बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर अपने प्लेटफॉर्म Instagram और Facebook में बड़े बदलावों की तैयारी शुरू कर दी है। प्रस्तावित नियमों के तहत नाबालिग यूजर्स के लिए ‘Digital Bedtime’ लागू किया जाएगा, जिसके बाद रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
Instagram और Facebook पर रोजाना 2 घंटे की लिमिट
समझौते के तहत 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए Instagram और Facebook को मिलाकर रोजाना दो घंटे की डिफॉल्ट इस्तेमाल सीमा तय की जाएगी। इस लिमिट को हटाने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी। दोनों प्लेटफॉर्म पर बिताया गया समय इसी साझा सीमा में शामिल किया जाएगा।
रात में ऐप बंद, स्कूल टाइम में नोटिफिकेशन म्यूट
नए सुरक्षा उपायों में रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक किशोरों के लिए Instagram और Facebook का एक्सेस रोकना शामिल है। इसके अलावा सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक नोटिफिकेशन डिफॉल्ट रूप से म्यूट रखने का प्रावधान होगा। हालांकि, सीधे मैसेज और जरूरी सुरक्षा अलर्ट इससे प्रभावित नहीं होंगे।
लगातार स्क्रॉलिंग पर भी लगेगी रोक
Meta अपने ‘Infinite Scroll’ अनुभव में भी बदलाव करेगा। लंबे समय तक लगातार सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले किशोरों को नियमित ब्रेक लेने के लिए रिमाइंडर दिखाए जाएंगे। इसका उद्देश्य बच्चों को बिना रुके सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करने से रोकना है।
लाइक काउंट और ब्यूटी फिल्टर में भी बदलाव
नाबालिगों के पोस्ट पर सार्वजनिक लाइक और रिएक्शन की गिनती को छिपाने जैसे बदलाव किए जाएंगे। बच्चों और किशोरों के लिए कुछ कॉस्मेटिक-सर्जरी और ब्यूटी फिल्टर भी सीमित या प्रतिबंधित किए जाएंगे। इसके अलावा उम्र की जांच और पैरेंटल कंट्रोल सिस्टम को मजबूत किया जाएगा।
टीनएजर्स को मिलेगा नॉन-पर्सनलाइज्ड फीड का विकल्प
Meta किशोर यूजर्स को नॉन-पर्सनलाइज्ड फीड का विकल्प भी देने की योजना बना रहा है। इसका मतलब है कि यूजर्स को केवल एल्गोरिदम द्वारा उनकी गतिविधियों और रुचियों के आधार पर चुनी गई सामग्री के बजाय अपेक्षाकृत सामान्य फीड देखने का विकल्प मिलेगा।
अमेरिका में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुकदमे के बाद बदलाव
Meta के खिलाफ अमेरिका में कई राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने 2023 में मुकदमा दायर किया था। आरोप था कि Facebook और Instagram में ऐसे फीचर विकसित किए गए, जो बच्चों और किशोरों को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए डिजाइन किए गए थे। राज्यों ने दावा किया कि इससे बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर नुकसान हो सकता है और कंपनी ने इन जोखिमों को लेकर माता-पिता और जनता को पर्याप्त जानकारी नहीं दी।
अगस्त 2026 में कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई। Meta ने आरोपों से इनकार किया है और किसी गलती या कानूनी जिम्मेदारी को स्वीकार किए बिना समझौते पर सहमति जताई है। इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अदालत की मंजूरी जरूरी है।
Meta पर अरबों डॉलर के भुगतान का दबाव
समझौते के तहत Meta से अरबों डॉलर का भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। अलग-अलग रिपोर्टों में रकम के अलग-अलग आंकड़े बताए गए हैं। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल के अनुसार यह रकम 17 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है, जबकि Meta ने अपने बयान में कुल भुगतान करीब 18 अरब डॉलर बताया है।
समझौते की अतिरिक्त रकम का एक हिस्सा इस बात पर निर्भर करेगा कि YouTube और TikTok जैसे दूसरे बड़े प्लेटफॉर्म भी बच्चों की सुरक्षा के लिए इसी तरह के उपाय लागू करते हैं या नहीं।
पूर्व Meta इंजीनियर की गवाही से बढ़ी मुश्किलें
मामले की सुनवाई के दौरान Meta के पूर्व सुरक्षा इंजीनियर आर्टुरो बेजार की गवाही भी चर्चा में रही। उन्होंने युवा यूजर्स को होने वाले नुकसान से जुड़ी चिंताओं का जिक्र किया और आरोप लगाया कि कंपनी की कार्यसंस्कृति में सुरक्षा की तुलना में एंगेजमेंट और ग्रोथ को अधिक प्राथमिकता दी जाती थी। इन आरोपों ने बच्चों की सोशल मीडिया सुरक्षा को लेकर Meta की नीतियों पर सवाल और गहरे कर दिए।
स्वतंत्र ऑडिटर करेगा सुरक्षा उपायों की निगरानी
समझौते के तहत Meta की अनुपालन प्रक्रिया की निगरानी एक स्वतंत्र ऑडिटर द्वारा किए जाने की बात कही गई है। कंपनी ने प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को लेकर भ्रामक दावे नहीं करने और लोगों को सुरक्षा से जुड़ी सही जानकारी देने पर भी सहमति जताई है।
भारत में भी बढ़ सकती है ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी पर चर्चा
अमेरिका का यह समझौता भारत में सीधे तौर पर लागू नहीं होगा, लेकिन इससे बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर टेक कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है। भारत में भी बच्चों के डेटा, उम्र की जांच, पैरेंटल कंट्रोल और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नियमों पर लगातार चर्चा हो रही है। ऐसे में आने वाले समय में भारतीय यूजर्स के लिए भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की नीतियों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं।



