Food Waste in Rajasthan: राजस्थान में हर दिन 9490 टन खाना बर्बाद

राजस्थान में हर दिन 9490 टन खाना बर्बाद
प्रतिक्रियाएँ
Kavya Mishra

Kavya Mishra

1 घंटे पहले

Yeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.

Ada khan

Ada khan

2 घंटे पहले

Yeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.

Priya Iyer

Priya Iyer

3 घंटे पहले

Peedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.

Diya Gupta

Diya Gupta

5 घंटे पहले

Yeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.

Yash Kulkarni

Yash Kulkarni

6 घंटे पहले

Jab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.

Riya Jain

Riya Jain

7 घंटे पहले

Hum is cause ke saath hain!

Dev Kapoor

Dev Kapoor

8 घंटे पहले

Samaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.

Comments • Reactions • Feedback

राजस्थान में हर दिन 9490 टन भोजन बर्बाद
राजस्थान में हर दिन करीब 9490 मीट्रिक टन भोजन बर्बाद होने की बात सामने आई है। भारत में खाद्य उत्पादन पर्याप्त होने के बावजूद बड़ी आबादी अल्पपोषण की समस्या से जूझ रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में हर साल बड़ी मात्रा में भोजन बर्बाद होता है और प्रति व्यक्ति करीब 55 किलो खाद्य सामग्री के बराबर बर्बादी बताई गई है।

 

जयपुर में सबसे ज्यादा बर्बादी
राजस्थान के प्रमुख शहरों में जयपुर में सबसे ज्यादा भोजन बर्बाद होने का आंकड़ा सामने आया है। यहां करीब 110 टन भोजन की बर्बादी बताई गई है। इसके बाद जोधपुर में 75 टन, कोटा में 60 टन और उदयपुर में 50 टन भोजन बर्बाद होने का आंकड़ा दिया गया है।

 

शादी और बड़े आयोजनों में ज्यादा बर्बादी
भोजन की बर्बादी का बड़ा हिस्सा शादी, पार्टी और अन्य बड़े आयोजनों में होने की बात कही गई है। जरूरत से ज्यादा खाना तैयार करना और प्लेट में आवश्यकता से अधिक भोजन लेना इसकी प्रमुख वजहों में शामिल है। बेहतर योजना और भोजन की सही मात्रा तय करके इस बर्बादी को कम किया जा सकता है।

 

खेत से घर तक भी होता है नुकसान
खाद्य सामग्री की बर्बादी केवल घरों और आयोजनों तक सीमित नहीं है। खेत से बाजार और बाजार से घर तक पहुंचने के दौरान भी अनाज, फल, सब्जियां और अन्य खाद्य सामग्री खराब होती है। रिपोर्ट में भंडारण, ढुलाई और अन्य प्रक्रियाओं के दौरान भी बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री के नुकसान का उल्लेख किया गया है।

 

देश में खाद्य बर्बादी का आंकड़ा
दिए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में भारत में कुल करीब 7.75 करोड़ टन खाद्य सामग्री बर्बाद हुई। यह प्रति व्यक्ति करीब 55 किलोग्राम खाद्य सामग्री के बराबर बताई गई है। खाद्य बर्बादी कम करने से भोजन और संसाधनों दोनों की बचत की जा सकती है।

 

बचा हुआ खाना जरूरतमंदों तक पहुंचाने की पहल
जयपुर और जोधपुर जैसे शहरों में रिफूड इंडिया और अन्नक्षेत्र ट्रस्ट जैसी संस्थाओं द्वारा समारोहों के बाद बचा हुआ भोजन जरूरतमंदों तक पहुंचाने की पहल की जाती है। वहीं कोटा, अजमेर और उदयपुर में स्थानीय युवा समूह भी घरों और आयोजनों से भोजन एकत्र कर जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाते हैं।

 

जागरूकता से कम हो सकती है बर्बादी
विवाह स्थलों और अन्य आयोजनों में लोगों को जरूरत के अनुसार भोजन लेने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए प्लेट में उतना ही भोजन लेने की अपील की जाती है, जितना आसानी से खाया जा सके। ऐसी पहल से भोजन की बर्बादी कम करने में मदद मिल सकती है।

 

राजस्थान के प्रमुख शहरों में भोजन की बर्बादी
जयपुर में 110 टन, जोधपुर में 75 टन, कोटा में 60 टन, उदयपुर में 50 टन, अजमेर में 45 टन, अलवर में 35 टन, भीलवाड़ा में 30 टन, सीकर में 25 टन और भरतपुर में 20 टन भोजन की बर्बादी का आंकड़ा दिया गया है।

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Kavya Mishra

Kavya Mishra

1 घंटे पहले

Yeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.

Ada khan

Ada khan

2 घंटे पहले

Yeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.

Priya Iyer

Priya Iyer

3 घंटे पहले

Peedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.

Diya Gupta

Diya Gupta

5 घंटे पहले

Yeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.

Yash Kulkarni

Yash Kulkarni

6 घंटे पहले

Jab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.

Riya Jain

Riya Jain

7 घंटे पहले

Hum is cause ke saath hain!

Dev Kapoor

Dev Kapoor

8 घंटे पहले

Samaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.

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