अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की 149वीं रथयात्रा शुरू: CM भूपेंद्र पटेल ने निभाई 'पहिंद विधि', अमित शाह ने की मंगला आरती

Harsh Pandya
5 घंटे पहलेKundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.
Rohan Desai
6 घंटे पहलेYeh toh planets ki chaal ka hi asar hai!
Ishaan Tiwari
6 घंटे पहलेBhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.
Reyansh Joshi
9 घंटे पहलेYeh toh planets ki chaal ka hi asar hai!
Rohan Desai
9 घंटे पहलेSpirituality hi asli shakti hai is duniya mein.
Dhruv Bhatt
10 घंटे पहलेBhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.
Ishaan Tiwari
11 घंटे पहलेRishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.
Pranav Srivastava
11 घंटे पहलेRishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया (आषाढ़ी बीज) के पावन अवसर पर गुजरात के अहमदाबाद स्थित ऐतिहासिक जमालपुर जगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की 149वीं वार्षिक रथयात्रा गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को भव्य रूप से शुरू हुई। पुरी के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी रथयात्रा मानी जाने वाली इस यात्रा में लाखों श्रद्धालु भगवान के दर्शन और रथ खींचने के लिए उमड़े। पूरे शहर में भक्ति, उत्साह और धार्मिक उल्लास का वातावरण देखने को मिला।
मुख्यमंत्री ने निभाई 'पहिंद विधि', अमित शाह ने की मंगला आरती
रथयात्रा प्रारंभ होने से पहले गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने परंपरा के अनुसार 'पहिंद विधि' निभाते हुए सोने की झाड़ू से भगवान के रथ का मार्ग साफ किया। यह रस्म भगवान के समक्ष सभी के समान होने और सेवा भाव का प्रतीक मानी जाती है। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपनी पत्नी के साथ मंदिर पहुंचे और भगवान जगन्नाथ की मंगला आरती में भाग लेकर देश की सुख-समृद्धि और शांति की प्रार्थना की।
16 किलोमीटर की यात्रा, 103 झांकियां और 18 सजे-धजे हाथी
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा जमालपुर से शुरू होकर खाड़िया, कालूपुर, दरियापुर और सरसपुर सहित पुराने शहर के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए लगभग 16 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। इस भव्य शोभायात्रा में 18 सजे-धजे हाथी, 103 आकर्षक डिजिटल झांकियां, करीब 30 पारंपरिक अखाड़े, भजन मंडलियां और हजारों स्वयंसेवक शामिल हैं। यात्रा के दौरान श्रद्धालु जय जगन्नाथ के जयघोष के साथ भगवान के दर्शन कर रहे हैं।
सरसपुर में भगवान का 'ननिहाल', लाखों श्रद्धालुओं के लिए महाभोग
रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव सरसपुर माना जाता है, जिसे भगवान जगन्नाथ का 'ननिहाल' कहा जाता है। परंपरा के अनुसार यहां भगवान का विशेष स्वागत किया जाता है और लाखों श्रद्धालुओं के लिए विशाल महाभोग की व्यवस्था की जाती है। भगवान को मूंग, आम, जामुन और ककड़ी सहित पारंपरिक प्रसाद अर्पित किया जाता है। यह आयोजन सामाजिक समरसता, सेवा और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत उदाहरण माना जाता है।
AI, ड्रोन और 30 हजार जवानों के साये में सुरक्षा
रथयात्रा की सुरक्षा को देखते हुए इस बार प्रशासन ने अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। पूरे मार्ग पर 30 हजार से अधिक पुलिसकर्मी, RAF और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली, 65 हाई-टेक ड्रोन और 240 से अधिक रूफ-टॉप CCTV कैमरों के जरिए पूरे रूट पर लगातार नजर रखी जा रही है। संवेदनशील इलाकों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है ताकि यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
आस्था, परंपरा और सामाजिक समरसता का महापर्व
अहमदाबाद की जगन्नाथ रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि गुजरात की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक मानी जाती है। सदियों पुरानी इस परंपरा में विभिन्न समुदायों के लोग मिलकर सेवा, स्वागत और प्रसाद वितरण में भाग लेते हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच यह 149वीं रथयात्रा भी शांतिपूर्ण, भव्य और ऐतिहासिक रूप से सफल रहेगी।







