20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र: महंगाई, बेरोजगारी और सीमा सुरक्षा पर संसद में होगा घमासान

Reyansh Joshi
0 सेकंड पहलेYeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!
Priya Iyer
0 सेकंड पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Neel Saxena
0 सेकंड पहलेIs khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.
देश की संसद का आगामी मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इस सत्र को मंजूरी दे दी है। करीब चार सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र में लोकसभा और राज्यसभा की कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। सरकार जहां कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत प्रस्तावों को पेश करने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, किसानों के मुद्दे, लद्दाख, राष्ट्रीय सुरक्षा और केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों, वित्तीय प्रस्तावों और नीतिगत निर्णयों को सदन में पेश करने की तैयारी कर रही है। सत्र के सुचारू संचालन के लिए 19 जुलाई सुबह 11 बजे सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई है, जिसमें सभी दलों से सहयोग की अपील की जाएगी।
महंगाई और बेरोजगारी पर सरकार को घेरने की तैयारी
विपक्ष का सबसे बड़ा हमला बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर रहने की संभावना है। विपक्षी दलों का कहना है कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि और युवाओं के लिए रोजगार के सीमित अवसर देश की सबसे बड़ी चुनौतियां बन चुकी हैं। संसद में सरकार से रोजगार सृजन, महंगाई नियंत्रण और आर्थिक राहत उपायों को लेकर जवाब मांगा जाएगा। बजट आवंटन और विभिन्न मंत्रालयों को दिए गए फंड पर भी विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
लद्दाख, सीमा सुरक्षा और किसानों के मुद्दे रहेंगे प्रमुख
संसद में लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर भी जोरदार बहस होने की संभावना है। विपक्ष सोनम वांगचुक के आंदोलन, लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग तथा सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार से जवाब मांग सकता है। इसके अलावा पंजाब और हरियाणा के किसान संगठनों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी की मांग को भी विपक्ष प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है।
ED-CBI के कथित दुरुपयोग पर सरकार पर हमला
विपक्षी दल एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का मुद्दा संसद में उठा सकते हैं। विपक्ष का आरोप है कि इन एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। सरकार की ओर से इन आरोपों को पहले भी खारिज किया जाता रहा है और वह जांच एजेंसियों की कार्रवाई को कानून के अनुरूप बताती रही है।
INDIA गठबंधन की रणनीति और सरकार का विधायी एजेंडा
मानसून सत्र से पहले INDIA गठबंधन के प्रमुख नेताओं की समन्वय बैठक होने की संभावना है, जिसमें संसद के भीतर साझा रणनीति तय की जाएगी। दूसरी ओर सरकार कई नए विधेयकों, आर्थिक सुधारों और प्रशासनिक प्रस्तावों को पारित कराने की तैयारी कर रही है। सरकार की कोशिश रहेगी कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर व्यापक चर्चा के बाद उन्हें समयबद्ध तरीके से मंजूरी मिल सके।
राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है यह सत्र
विश्लेषकों के अनुसार, आगामी मानसून सत्र केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का भी बड़ा मंच बनेगा। महंगाई, रोजगार, राष्ट्रीय सुरक्षा, लद्दाख, किसानों की मांगें, बजटीय प्रावधान और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। ऐसे में संसद का यह सत्र आगामी राजनीतिक और आर्थिक दिशा तय करने की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।








