Pola festival: बैलों के सम्मान में पोला तिहार की धूम

बैलों के सम्मान में पोला तिहार की धूम
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Riya Jain

Riya Jain

8 घंटे पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Payal jadon

Payal jadon

10 घंटे पहले

Is decision ka poore desh par seedha asar padega.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

10 घंटे पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

Aarav Sharma

Aarav Sharma

11 घंटे पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Anil Sen

Anil Sen

12 घंटे पहले

Desh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.

Monika Das

Monika Das

13 घंटे पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

Simran Arora

Simran Arora

13 घंटे पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Payal jadon

Payal jadon

14 घंटे पहले

Har Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.

Sai Mehta

Sai Mehta

16 घंटे पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

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छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज 10 सितंबर को पारंपरिक पोला पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व कृषि कार्यों में बैलों और पशुधन के योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने से जुड़ा है। महाराष्ट्र पर्यटन के अनुसार बैल पोला किसानों और बैलों के बीच गहरे संबंध को दर्शाने वाला पारंपरिक पर्व है। इस दिन पशुधन की पूजा-अर्चना कर उनके योगदान के प्रति आभार जताया जाता है।


बैलों को काम से आराम देकर किया गया श्रृंगार
पोला के अवसर पर किसान अपने बैलों को कृषि कार्य से विश्राम देते हैं। बैलों को नहलाने के बाद उनके सींगों को रंगों से सजाया जाता है और गले में घंटियां, फूलों की मालाएं तथा अन्य पारंपरिक सजावटी वस्तुएं पहनाई जाती हैं। इसके बाद उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में सजाए गए बैलों को जुलूस के रूप में भी निकाला जाता है, जहां ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक उत्सव का माहौल देखने को मिलता है।


मिट्टी और लकड़ी के बैलों की भी पूजा
जिन परिवारों के पास वास्तविक बैल नहीं हैं, वहां मिट्टी या लकड़ी से बने बैलों की पूजा की परंपरा भी देखने को मिलती है। बच्चों के लिए यह पर्व खास आकर्षण लेकर आता है और बाजारों में पारंपरिक खिलौना बैल तथा पोला से जुड़ी वस्तुओं की बिक्री होती है। महाराष्ट्र के नागपुर में इस वर्ष भी पोला से जुड़ी पुरानी परंपराओं और लकड़ी के बैलों के बाजार में विशेष चहल-पहल देखने को मिली है।

 

छत्तीसगढ़ में पारंपरिक व्यंजनों और लोक संस्कृति की झलक
छत्तीसगढ़ में पोला पर्व कृषि संस्कृति और ग्रामीण जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है। पर्व के अवसर पर घरों में पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं और परिवार पूजा-अर्चना के साथ उत्सव मनाते हैं। स्थानीय स्तर पर मिट्टी के बैलों और पोला से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी भी होती है। राजिम समेत कई स्थानों पर पोला के अवसर पर बैल दौड़, फुगड़ी, रस्साकशी और अन्य पारंपरिक गतिविधियों के कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है।


महाराष्ट्र और विदर्भ में भी उत्सव का माहौल
महाराष्ट्र के ग्रामीण और विदर्भ क्षेत्र में पोला का विशेष महत्व है। यवतमाल जिला प्रशासन से जुड़े सरकारी स्रोत के अनुसार पोला जिले के महत्वपूर्ण त्योहारों में शामिल है और यहां इससे जुड़ी कृषि तथा पशुधन परंपराएं लंबे समय से चली आ रही हैं। महाराष्ट्र पर्यटन भी बताता है कि इस दिन बैलों को स्नान कराने, सजाने और पूजा करने के साथ उन्हें काम से विश्राम दिया जाता है।


कृषि संस्कृति और पशुधन के प्रति आभार का पर्व
पोला केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि कृषि जीवन और पशुधन के साथ किसानों के पारंपरिक रिश्ते को दर्शाने वाला पर्व है। आधुनिक खेती में ट्रैक्टर और मशीनों का इस्तेमाल बढ़ने के बावजूद कई ग्रामीण क्षेत्रों में बैलों के प्रति सम्मान की यह परंपरा कायम है। 10 सितंबर 2026 को महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ समेत संबंधित क्षेत्रों में मनाया जा रहा पोला इसी सांस्कृतिक विरासत, पशुधन के सम्मान और किसान जीवन से जुड़े मूल्यों को सामने लाता है।

 

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Riya Jain

Riya Jain

8 घंटे पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Payal jadon

Payal jadon

10 घंटे पहले

Is decision ka poore desh par seedha asar padega.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

10 घंटे पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

Aarav Sharma

Aarav Sharma

11 घंटे पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Anil Sen

Anil Sen

12 घंटे पहले

Desh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.

Monika Das

Monika Das

13 घंटे पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

Simran Arora

Simran Arora

13 घंटे पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Payal jadon

Payal jadon

14 घंटे पहले

Har Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.

Sai Mehta

Sai Mehta

16 घंटे पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

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