4 सितंबर को मनाई जाएगी जन्माष्टमी: 15 साल बाद दुर्लभ संयोग

Saanvi Pandey
4 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Ayaan Khan
6 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Navya Nair
6 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Vivaan Gupta
8 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Priya Iyer
8 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Kunal Rao
9 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Payal jadon
9 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Arjun Singh
10 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Simran Arora
11 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
देशभर में इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व 4 सितंबर 2026 को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। मथुरा और वृंदावन समेत देश के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। मंदिरों में सजावट, पूजा और विशेष कार्यक्रमों की तैयारियां पूरी की जा रही हैं। भक्त रात में निशीथ काल के दौरान भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाएंगे। जन्माष्टमी को लेकर देशभर में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होगा।
15 साल बाद बना दुर्लभ संयोग
इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। बताया जा रहा है कि ऐसा संयोग करीब 15 वर्षों के बाद देखने को मिल रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसी वजह से इस संयोग को भक्तों के लिए विशेष शुभ माना जा रहा है। इस खास योग के कारण इस बार जन्माष्टमी को लेकर श्रद्धालुओं में और अधिक उत्साह है।
निशीथ काल में होगी विशेष पूजा
जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा निशीथ काल में की जाएगी। 4 सितंबर की रात 11:57 बजे से 5 सितंबर की रात 12:43 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त बताया गया है। इस दौरान भक्त भगवान कृष्ण के प्राकट्य का उत्सव मनाएंगे। पूजा के लिए कुल 46 मिनट का विशेष समय निर्धारित किया गया है। मंदिरों में मध्यरात्रि के समय आरती और विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। भक्त व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करेंगे और प्रसाद का वितरण किया जाएगा।
मथुरा वृंदावन में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़
जन्माष्टमी के अवसर पर मथुरा और वृंदावन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान और बांके बिहारी मंदिर समेत प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को मजबूत किया जा रहा है। भीड़ को देखते हुए दर्शन व्यवस्था और यातायात प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। देश के अलग-अलग हिस्सों से भक्त भगवान कृष्ण के दर्शन के लिए मथुरा और वृंदावन पहुंचेंगे।
मंदिरों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
जन्माष्टमी के दौरान मंदिरों में भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रमुख मंदिर परिसरों और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जा रही है। भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग और अलग-अलग प्रवेश तथा निकास मार्गों की व्यवस्था की जा रही है। सीसीटीवी कैमरों के जरिए संवेदनशील स्थानों पर लगातार नजर रखी जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल और चिकित्सा जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं। प्रशासन का उद्देश्य भक्तों को सुरक्षित माहौल में सुगम दर्शन उपलब्ध कराना है।
5 सितंबर को दही हांडी का उत्सव
जन्माष्टमी के अगले दिन 5 सितंबर 2026 को देश के कई हिस्सों में दही हांडी उत्सव मनाया जाएगा। महाराष्ट्र और गुजरात समेत कई राज्यों में दही हांडी कार्यक्रमों को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। इस दौरान युवा गोविंदा मंडलियां मानव पिरामिड बनाकर ऊंचाई पर लटकी दही हांडी फोड़ती हैं। दही हांडी के कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं और जगह-जगह सांस्कृतिक आयोजन भी किए जाते हैं। आयोजकों और प्रशासन की ओर से भीड़ और सुरक्षा को लेकर जरूरी इंतजाम किए जाते हैं। जन्माष्टमी और दही हांडी के साथ देशभर में कृष्ण भक्ति और उत्सव का माहौल देखने को मिलेगा।





