मणिकर्णिका घाट विवाद: 8 लोगों पर FIR

Comments
No comments yet. Be the first!
वाराणसी के ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मणिकर्णिका घाट को लेकर फैलाई गई बुलडोजर कार्रवाई की अफवाहों पर अब पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के वाराणसी दौरे के बाद इस मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए चौक थाने में 8 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर मणिकर्णिका घाट से जुड़ी कई तस्वीरें और वीडियो वायरल किए जा रहे थे, जिनमें यह दावा किया गया कि घाट पर मंदिरों को तोड़ा जा रहा है। इन वायरल सामग्रियों को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रेसवार्ता में स्पष्ट किया कि ये सभी फोटो और वीडियो AI जनरेटेड हैं और इन्हें जानबूझकर समाज में भ्रम और आक्रोश फैलाने के लिए तैयार किया गया है।
निर्माण कंपनी की शिकायत पर दर्ज हुआ केस
जानकारी के मुताबिक, मणिकर्णिका घाट पर निर्माण कार्य करा रही कंपनी के एक पदाधिकारी (तमिलनाडु निवासी) की शिकायत पर यह मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायत में कहा गया है कि उनकी कंपनी 15 नवंबर 2025 से घाट पर आधारभूत सुविधाओं के विकास का कार्य कर रही है, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए वास्तविक तथ्यों के विपरीत भ्रामक और असत्य जानकारी फैलाई गई।
वाराणसी पुलिस ने इस मामले में BNS की धारा 196, 298, 299 और 353 के तहत 8 नामजद व्यक्तियों और संबंधित X हैंडल्स के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए हैं।
पाल समाज का प्रदर्शन और पुलिसिया कार्रवाई
विवाद के बीच पाल समाज के लोगों ने अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को लेकर प्रदर्शन किया। मणिकर्णिका घाट की गलियों में नारेबाजी और आगे बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान पुलिस से तीखी झड़प हुई। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को न्यूनतम बल प्रयोग करना पड़ा और डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया।
ACP अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीमित बल का प्रयोग किया गया है।
प्रशासन का स्पष्ट बयान
जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि मणिकर्णिका घाट पर किसी भी मंदिर को नहीं तोड़ा गया है। कुंभ महादेव मंदिर पूरी तरह सुरक्षित है। पुनर्विकास योजना के तहत घाट पर:
32 शवदाह प्लेटफॉर्म, अत्याधुनिक शवदाह गृह, प्रदूषण रहित चिमनी, सामुदायिक शौचालय, प्रतीक्षा कक्ष और लकड़ी भंडारण स्थल, हरित क्षेत्र, जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि मौके से हटाई गई मूर्तियां नमो घाट पर सुरक्षित रखी गई हैं।
वायरल वीडियो और राजनीतिक प्रतिक्रिया
विवाद की शुरुआत एक 8 सेकंड के वायरल वीडियो से हुई, जिसमें बुलडोजर चलता दिखाया गया और “विकास के नाम पर विनाश” जैसे शब्द सुनाई दिए। वीडियो वायरल होते ही राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं। पुलिस ने इसे धार्मिक सद्भाव बिगाड़ने की साजिश करार दिया है।
वाराणसी पुलिस ने इस मामले में सांसद संजय सिंह और पप्पू यादव को भी नोटिस भेजकर चौक थाने में बयान दर्ज कराने को कहा है।






