ऑस्ट्रेलिया के सिडनी बोंडी बीच पर आतंकी हमला: पाकिस्तानी बाप–बेटे शूटर्स

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ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बोंडी बीच पर 14 दिसंबर को हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। यह हमला पिछले 30 वर्षों में ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा आतंकी हमला बताया जा रहा है। इस भयावह घटना में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 40 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज न्यू साउथ वेल्स (NSW) के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।
पुलिस के अनुसार, हमलावर कोई और नहीं बल्कि पिता–पुत्र की जोड़ी थी। न्यू साउथ वेल्स पुलिस कमिश्नर मेल लानयोन ने बताया कि शूटर्स की पहचान 50 वर्षीय साजिद अकरम और उसके 24 वर्षीय बेटे नावेद अकरम के रूप में हुई है। साजिद अकरम की मुठभेड़ में मौत हो गई, जबकि नावेद अकरम घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती है।
ऑस्ट्रेलियाई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों हमलावर पाकिस्तानी नागरिक हैं। खुफिया एजेंसियों ने खुलासा किया है कि नावेद अकरम के इस्लामिक स्टेट (ISIS) से संभावित संबंधों की जांच करीब 6 साल पहले की जा चुकी थी। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस हमले को सीधे तौर पर ISIS ने अंजाम दिया या नहीं।
हनुक्का उत्सव पर हमला
हमले के वक्त बड़ी संख्या में लोग यहूदियों का पवित्र पर्व ‘हनुक्का’ मनाने के लिए एकत्रित थे। आतंकियों ने निहत्थे लोगों पर लॉन्ग आर्म गन्स से अंधाधुंध फायरिंग की। रिपोर्ट्स के अनुसार, हमले में 6 गनों का इस्तेमाल किया गया। बताया जा रहा है कि आतंकियों ने अपने परिवार को फिशिंग ट्रिप का बहाना देकर घर से निकलने की बात कही थी।
मां का बयान बना विवाद का केंद्र
घायल आतंकी नावेद अकरम की मां का बयान अब चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा,
“मेरे बेटे के पास कोई गन नहीं थी। वह कम बाहर जाता था, उसके ज्यादा दोस्त नहीं थे। वह शराब-सिगरेट नहीं पीता था, काम पर जाता था, सीधा घर आता था और एक्सरसाइज करता था। हर कोई चाहेगा कि उसका बेटा ऐसा हो। वह अच्छा लड़का है।”
उनके इस बयान पर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा,
“ऑस्ट्रेलिया को नफरत और हिंसा के आधार पर बांटा नहीं जा सकता। यह देश एकता, विविधता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर खड़ा है।”
सरकार ने पीड़ितों के परिवारों को हर संभव सहायता देने और हमले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
हनुक्का क्या है?
हनुक्का यहूदी धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे Festival of Lights यानी रोशनी का पर्व भी कहा जाता है। यह आठ दिनों तक मनाया जाता है और बुराई पर अच्छाई, अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान मेनोराह (दीपक) जलाए जाते हैं और धार्मिक आयोजन होते हैं।






