आज क्यों मनाया जाता है विजय दिवस?: भारतीय सेना का शौर्य और बलिदान

16 दिसंबर 2025315
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भारतीय सेना का शौर्य और बलिदान

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विजय दिवस हर वर्ष 16 दिसंबर को पूरे भारत में गर्व और सम्मान के साथ मनाया जाता है। यह दिन भारत की उस ऐतिहासिक जीत की याद दिलाता है, जब 1971 के भारत–पाकिस्तान युद्ध में भारतीय सेना ने मात्र 13 दिनों में पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी थी। यह युद्ध न केवल सैन्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है, बल्कि दक्षिण एशिया के राजनीतिक नक्शे को बदलने वाला भी साबित हुआ।

विजय दिवस क्यों मनाया जाता है?
विजय दिवस उस ऐतिहासिक क्षण का प्रतीक है, जब 16 दिसंबर 1971 को ढाका में पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इस आत्मसमर्पण के साथ ही युद्ध का अंत हुआ और भारत ने एक ऐसी जीत हासिल की, जो विश्व सैन्य इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह सबसे बड़ा सैन्य सरेंडर माना जाता है।

1971 के युद्ध की पृष्ठभूमि
1971 के युद्ध की जड़ें पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) में फैले राजनीतिक संकट और मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़ी थीं। वहां की जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचला गया, जिसके चलते लाखों लोग अपने घर छोड़कर भारत में शरण लेने को मजबूर हुए। इससे भारत पर भारी सामाजिक और आर्थिक दबाव पड़ा।
भारत ने पहले कूटनीतिक स्तर पर समस्या का समाधान करने की कोशिश की, लेकिन हालात बिगड़ते चले गए। अंततः 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान द्वारा भारतीय हवाई अड्डों पर हमले के बाद पूर्ण युद्ध छिड़ गया।

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