accident: क्या विमानन प्राधिकरण की चेतावनी के बावजूद ऑरेंज अलर्ट के दौरान हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी?

 क्या विमानन प्राधिकरण की चेतावनी के बावजूद ऑरेंज अलर्ट के दौरान हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी?
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बद्रीनाथ के निकट शुक्रवार को हुए हेलीकॉप्टर हादसे में पायलट समेत कर्नाटक के पांच तीर्थयात्रियों की मौत के बाद गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खराब मौसम के लिए जारी ऑरेंज अलर्ट के बावजूद हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की अनुमति कैसे मिली, इस पर जांच शुरू हो गई है। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) का दावा है कि दुर्घटना से लगभग एक घंटे पहले चारधाम मार्ग पर सभी उड़ान संचालन रोकने का आदेश जारी किया गया था, जिसका उल्लंघन करते हुए ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड ने उड़ान संचालित की। यूकाडा के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय तोलिया ने बताया कि यह आदेश प्राधिकरण के संचालन प्रमुख ग्रुप कैप्टन अमित शर्मा (सेवानिवृत्त) द्वारा जारी किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूकाडा नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के नियमों के तहत हेलीकॉप्टर संचालन का नियमन करता है। शुक्रवार को खराब मौसम के मद्देनजर प्रासंगिक नियमों का पालन करते हुए उड़ानें रोकने का निर्देश दिया गया था, इसके बावजूद उड़ान भरी गई। तोलिया के अनुसार डीजीसीए के नियमों के तहत चूक का पता लगाने के लिए जांच जारी है और यह भी देखा जाएगा कि आदेश की अवहेलना क्यों की गई। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) और डीजीसीए के अधिकारियों का दल पहले ही उत्तराखंड पहुंचकर दुर्घटनास्थल पर जांच शुरू कर चुका है। यूकाडा के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के उड़ान संचालन निदेशक एस भट्टाचार्य ने कहा कि वह दिल्ली में हैं और ऐसे किसी आदेश की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच चल रही है और यूकाडा ही इस पर बोलने की स्थिति में है। इस बीच शनिवार सुबह सेना, आईटीबीपी, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के संयुक्त खोज एवं बचाव दलों ने अभियान फिर से शुरू किया। चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि दल ने पांडुकेश्वर के रास्ते लगभग आठ किलोमीटर दुर्गम पहाड़ी इलाके को पैदल पार कर दुर्घटनास्थल तक पहुंच बनाई। जिलाधिकारी के अनुसार पार्थिव शरीरों को पहले गोविंदघाट लाया जाएगा और फिर देहरादून ले जाकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद परिजनों को सौंप दिया जाएगा। इस हादसे ने चारधाम यात्रा मार्ग पर हेलीकॉप्टर संचालन की सुरक्षा और मौसम संबंधी चेतावनियों के पालन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
बद्रीनाथ के निकट शुक्रवार को हुए हेलीकॉप्टर हादसे में पायलट समेत कर्नाटक के पांच तीर्थयात्रियों की मौत के बाद गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खराब मौसम के लिए जारी ऑरेंज अलर्ट के बावजूद हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की अनुमति कैसे मिली, इस पर जांच शुरू हो गई है। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) का दावा है कि दुर्घटना से लगभग एक घंटे पहले चारधाम मार्ग पर सभी उड़ान संचालन रोकने का आदेश जारी किया गया था, जिसका उल्लंघन करते हुए ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड ने उड़ान संचालित की। यूकाडा के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय तोलिया ने बताया कि यह आदेश प्राधिकरण के संचालन प्रमुख ग्रुप कैप्टन अमित शर्मा (सेवानिवृत्त) द्वारा जारी किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूकाडा नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के नियमों के तहत हेलीकॉप्टर संचालन का नियमन करता है। शुक्रवार को खराब मौसम के मद्देनजर प्रासंगिक नियमों का पालन करते हुए उड़ानें रोकने का निर्देश दिया गया था, इसके बावजूद उड़ान भरी गई। तोलिया के अनुसार डीजीसीए के नियमों के तहत चूक का पता लगाने के लिए जांच जारी है और यह भी देखा जाएगा कि आदेश की अवहेलना क्यों की गई। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) और डीजीसीए के अधिकारियों का दल पहले ही उत्तराखंड पहुंचकर दुर्घटनास्थल पर जांच शुरू कर चुका है। यूकाडा के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के उड़ान संचालन निदेशक एस भट्टाचार्य ने कहा कि वह दिल्ली में हैं और ऐसे किसी आदेश की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच चल रही है और यूकाडा ही इस पर बोलने की स्थिति में है। इस बीच शनिवार सुबह सेना, आईटीबीपी, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के संयुक्त खोज एवं बचाव दलों ने अभियान फिर से शुरू किया। चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि दल ने पांडुकेश्वर के रास्ते लगभग आठ किलोमीटर दुर्गम पहाड़ी इलाके को पैदल पार कर दुर्घटनास्थल तक पहुंच बनाई। जिलाधिकारी के अनुसार पार्थिव शरीरों को पहले गोविंदघाट लाया जाएगा और फिर देहरादून ले जाकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद परिजनों को सौंप दिया जाएगा। इस हादसे ने चारधाम यात्रा मार्ग पर हेलीकॉप्टर संचालन की सुरक्षा और मौसम संबंधी चेतावनियों के पालन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
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