एक्टिविस्ट्स पर NSA की कार्रवाई: नोएडा मजदूर आंदोलन पर बड़ा खुलासा

नोएडा मजदूर आंदोलन पर बड़ा खुलासा
प्रतिक्रियाएँ
Ritika Ghosh

Ritika Ghosh

2 महीने पहले

Jai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.

Sneha Menon

Sneha Menon

2 महीने पहले

Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

2 महीने पहले

Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

Simran Arora

Simran Arora

2 महीने पहले

Jai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.

Comments • Reactions • Feedback

नोएडा में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर अप्रैल 2026 में हुए मजदूर आंदोलन के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर अब एक बड़ी रिपोर्ट सामने आई है। आंदोलन के दौरान पुलिस ने सात एफआईआर दर्ज कर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था। रिपोर्ट के मुताबिक कई मजदूरों को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। अदालतों में हुई सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्रवाई और लगाए गए आरोपों पर भी सवाल उठे। मजदूरों की जमानत से जुड़े मामलों में अदालतों ने कई लोगों को राहत दी है। इस पूरे मामले ने मजदूर अधिकारों और पुलिस कार्रवाई को लेकर नई बहस छेड़ दी है।


53 दिन जेल में रहे मजदूर
नोएडा मजदूर आंदोलन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किए गए मजदूरों को औसतन 53 दिन तक जेल में रहना पड़ा। सामने आए अदालती रिकॉर्ड के विश्लेषण के अनुसार जमानत से जुड़े 222 आदेशों में से 188 मामलों में मजदूरों को राहत मिली। इसका मतलब है कि करीब 84 प्रतिशत मामलों में अदालतों ने जमानत मंजूर की। अदालतों ने कई मामलों में यह भी स्पष्ट किया कि केवल किसी प्रदर्शन में भीड़ का हिस्सा होना अपने आप में आपराधिक साजिश का प्रमाण नहीं है। इस फैसले से गिरफ्तार मजदूरों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिली। मामले में पुलिस के आरोपों और जांच के तरीके को लेकर बहस अभी जारी है।


कोर्ट से 84% मजदूरों को राहत
मजदूर आंदोलन के बाद दर्ज मामलों में अदालतों के रुख ने पूरे विवाद को नया मोड़ दिया है। जमानत से संबंधित 222 अदालती आदेशों में 188 मामलों में आरोपियों को राहत मिली है। अदालतों ने इस बात पर जोर दिया कि किसी व्यक्ति की केवल प्रदर्शन में मौजूदगी से उसकी आपराधिक मंशा साबित नहीं होती। इससे लंबे समय से जेल में बंद कई मजदूरों को बाहर आने का रास्ता मिला। रिपोर्ट के मुताबिक गिरफ्तार लोगों को औसतन 53 दिनों तक जेल में रहना पड़ा था। अब यह मामला पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गया है।

 

एक्टिविस्ट्स पर NSA की कार्रवाई
उत्तर प्रदेश पुलिस ने मई 2026 में मजदूर आंदोलन से जुड़े दो एक्टिविस्ट्स सत्यम वर्मा और आकृति चौधरी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA लगाया था। सत्यम वर्मा 60 वर्षीय पूर्व पत्रकार हैं, जबकि आकृति चौधरी दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक हैं। पुलिस ने दोनों पर आंदोलन को भड़काने और कथित साजिश में भूमिका निभाने के आरोप लगाए हैं। पुलिस का दावा है कि आंदोलन के पीछे बड़ी साजिश थी और सत्यम वर्मा के खातों में विदेशी मुद्रा में रकम आने की बात भी जांच में सामने आई। इन आरोपों को लेकर कानूनी और राजनीतिक विवाद लगातार बना हुआ है। सत्यम वर्मा की NSA नजरबंदी को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित बताई गई है।


व्हाट्सऐप चैट और किताबों पर उठे सवाल
जमानत का विरोध करते समय पुलिस की ओर से कुछ डिजिटल और व्यक्तिगत सामग्री को भी आधार बनाया गया था। इनमें व्हाट्सऐप चैट, कुछ किताबें और पुराने विरोध प्रदर्शनों में भागीदारी से जुड़े विवरण शामिल थे। पुलिस ने कथित तौर पर आरोपियों के पास मिली राजनीतिक और सामाजिक विषयों से संबंधित किताबों का भी उल्लेख किया। इसके अलावा कुछ आरोपियों के गाजा और CAA-NRC विरोधी प्रदर्शनों में शामिल होने की बात भी सामने रखी गई। इन दलीलों को लेकर अदालतों में बचाव पक्ष ने सवाल उठाए। पूरे मामले में यह बहस महत्वपूर्ण बन गई है कि किसी व्यक्ति की वैचारिक गतिविधियों और आपराधिक साजिश के बीच कानूनी तौर पर क्या अंतर है।


सरकार और विपक्ष के दावे आमने-सामने
नोएडा मजदूर आंदोलन को लेकर सरकार और विपक्ष के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। पुलिस का कहना है कि आंदोलन के पीछे सुनियोजित साजिश थी और मामले की जांच में विदेशी फंडिंग समेत कई पहलुओं को देखा जा रहा है। वहीं विपक्ष और नागरिक अधिकार संगठनों ने आरोप लगाया है कि मजदूरों की आर्थिक मांगों को दबाने के लिए कठोर कानूनों का इस्तेमाल किया गया। अदालतों से बड़ी संख्या में जमानत मिलने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल और तेज हो गए हैं। मजदूर संगठनों का कहना है कि उनकी मांगें रोजगार और न्यूनतम मजदूरी से जुड़ी थीं। अब इस मामले में आगे की न्यायिक कार्रवाई और जांच के नतीजों पर सभी की नजर बनी हुई है।

 

प्रतिक्रियाएँ
Ritika Ghosh

Ritika Ghosh

2 महीने पहले

Jai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.

Sneha Menon

Sneha Menon

2 महीने पहले

Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

2 महीने पहले

Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

Simran Arora

Simran Arora

2 महीने पहले

Jai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.

Comments • Reactions • Feedback

खबरे और भी है...