7 लाख की सुपारी देकर मां की हत्या: बेटी पर अब पिता की हत्या का भी आरोप

Priya Iyer
0 सेकंड पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Kunal Rao
0 सेकंड पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
जयपुर के चर्चित नीरज शर्मा हत्याकांड में पुलिस जांच अब नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। मामले की मुख्य आरोपी 23 वर्षीय आयुषी शर्मा, जो एलएलबी अंतिम वर्ष की छात्रा है, पर अब अपनी मां की हत्या की साजिश के साथ-साथ पिता विजय शर्मा की संदिग्ध मौत में भी भूमिका होने के आरोप लगे हैं। पुलिस इन नए आरोपों की भी जांच कर रही है।
पिता की मौत पर उठे गंभीर सवाल
मृतका नीरज शर्मा के भाई राकेश शर्मा ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि अप्रैल 2025 में बीमार विजय शर्मा, जो राजस्थान हाईकोर्ट में कोर्ट मास्टर थे, को उचित इलाज से वंचित रखा गया। शिकायत के अनुसार उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कराकर कई महीनों तक परिवार से दूर रखा गया, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई। पुलिस इन आरोपों की सत्यता की जांच कर रही है।
संपत्ति और सरकारी नौकरी बना विवाद का कारण
प्रारंभिक जांच के अनुसार मामला करोड़ों रुपये की पारिवारिक संपत्ति और अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ा हो सकता है। पुलिस का दावा है कि पिता की मृत्यु के बाद मिलने वाली कोर्ट की सरकारी नौकरी आयुषी चाहती थी, लेकिन मां नीरज शर्मा ने मानसिक रूप से दिव्यांग बेटे की देखभाल के लिए स्वयं एलडीसी (LDC) के पद पर नियुक्ति स्वीकार कर ली। इसके बाद परिवार में विवाद और गहरा गया।
मां की हत्या के लिए 7 लाख की सुपारी
जांच एजेंसियों के अनुसार आयुषी ने अपने चचेरे भाई बलराम उर्फ रवि और ताऊ मोहन स्वरूप के साथ मिलकर कथित तौर पर 7 लाख रुपये की सुपारी देकर मां की हत्या की साजिश रची। आरोप है कि 3 जुलाई 2026 को नीरज शर्मा को तेज रफ्तार स्कॉर्पियो से कुचलकर मार दिया गया और इसे सड़क दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई।
अब तक 7 गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार
जयपुर पुलिस ने इस मामले में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें आयुषी शर्मा, उसके ताऊ मोहन स्वरूप और पांच कथित कॉन्ट्रैक्ट किलर शामिल हैं। वहीं मुख्य सह-साजिशकर्ता बताए जा रहे चचेरे भाई बलराम उर्फ रवि की तलाश जारी है और पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।
पुलिस हर पहलू की कर रही जांच
पुलिस का कहना है कि पिता की मौत से जुड़े आरोप फिलहाल शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच के दायरे में हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, वित्तीय लेनदेन और अन्य सबूतों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पुलिस इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।








