President ADC Duty: राष्ट्रपति के ADC की जिंदगी: शादी से लेकर निजी जीवन तक

Pranav Srivastava
12 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Reyansh Joshi
14 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Monika Das
16 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Vivaan Gupta
17 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Pranav Srivastava
19 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
भारत के राष्ट्रपति के Aide-de-Camp यानी ADC का पद बेहद प्रतिष्ठित होने के साथ-साथ अत्यंत जिम्मेदारी वाला भी माना जाता है। राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यक्रमों, यात्राओं, समारोहों और प्रोटोकॉल से जुड़े कार्यों में ADC की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राष्ट्रपति के पास आमतौर पर पांच ADC होते हैं—तीन सेना से और एक-एक नौसेना तथा वायुसेना से।
हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ADC रह चुके मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने एक पॉडकास्ट में इस भूमिका से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि इस जिम्मेदारी के दौरान निजी जिंदगी के लिए जगह बेहद सीमित हो जाती है और कई व्यक्तिगत इच्छाओं को पीछे रखना पड़ता है।
ADC के कार्यकाल में शादी को लेकर क्या नियम है?
मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल के अनुसार, राष्ट्रपति के ADC के रूप में कार्यकाल के दौरान अधिकारी के लिए शादी नहीं करने की शर्त होती है। उन्होंने इसे अपने कार्यकाल में किए गए सबसे बड़े व्यक्तिगत त्यागों में से एक बताया।
इस व्यवस्था के पीछे पद की अत्यधिक जिम्मेदारी और निरंतर उपलब्धता को प्रमुख कारण के तौर पर बताया जाता है। हालांकि, इस संबंध में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों में विस्तृत आधिकारिक नियम-पुस्तिका सामने नहीं आती है, इसलिए इसे सांब्याल के बताए अनुभव और संबंधित मीडिया रिपोर्टों के संदर्भ में समझना उचित है।
24 घंटे सतर्क रहने की जिम्मेदारी
ADC की जिम्मेदारी केवल राष्ट्रपति के साथ औपचारिक कार्यक्रमों में नजर आने तक सीमित नहीं होती। राष्ट्रपति की दिनचर्या, कार्यक्रमों, यात्राओं और विभिन्न आधिकारिक गतिविधियों के दौरान प्रोटोकॉल तथा समन्वय से जुड़े कई कार्यों में ADC की भूमिका रहती है।
देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के साथ काम करने के कारण समय की पाबंदी, अनुशासन और सतर्कता इस भूमिका का अहम हिस्सा बन जाते हैं। किसी भी समय कार्यक्रम या जिम्मेदारी में बदलाव होने पर अधिकारी को उसके अनुरूप तैयार रहना पड़ सकता है।
निजी और सामाजिक जिंदगी पर पड़ता है असर
मेजर सांब्याल के अनुभव के अनुसार, ADC की भूमिका निभाते समय निजी जिंदगी काफी सीमित हो जाती है। परिवार, दोस्तों और व्यक्तिगत योजनाओं के लिए सामान्य जीवन की तरह समय निकालना आसान नहीं होता।
लगातार आधिकारिक जिम्मेदारियों और प्रोटोकॉल के बीच अधिकारी का जीवन राष्ट्रपति की गतिविधियों और ड्यूटी के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द केंद्रित हो जाता है। यही कारण है कि इस पद को केवल सम्मान नहीं बल्कि बड़े व्यक्तिगत अनुशासन और त्याग वाली जिम्मेदारी भी माना जाता है।
एकांत और मानसिक दबाव भी चुनौती
इस तरह की जिम्मेदारी में अधिकारी को लगातार गंभीर और अनुशासित माहौल में काम करना पड़ता है। निजी भावनाओं और व्यक्तिगत परेशानियों को अलग रखकर आधिकारिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देना आवश्यक होता है।
सांब्याल ने अपने अनुभव में इस अकेलेपन को केवल नकारात्मक रूप में नहीं देखा। उनके अनुसार, ऐसे समय को आत्म-मंथन, खुद को बेहतर समझने और अपने व्यक्तित्व को निखारने के अवसर के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
मेजर नव्या शेखावत ने रचा नया इतिहास
इसी बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ADC टीम में मेजर नव्या शेखावत की नियुक्ति भी चर्चा में है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, वे राष्ट्रपति की ADC बनने वाली पहली महिला भारतीय सेना अधिकारी हैं और राष्ट्रपति की ADC बनने वाली दूसरी महिला अधिकारी हैं। उनसे पहले भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी ने 2025 में यह पद संभाला था।
मेजर नव्या शेखावत की नियुक्ति को भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के महत्वपूर्ण उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। यह नियुक्ति राष्ट्रपति भवन जैसी प्रतिष्ठित संस्था में सैन्य अधिकारियों की भूमिका में बदलते प्रतिनिधित्व को भी दर्शाती है।
क्या होता है राष्ट्रपति का ADC?
Aide-de-Camp यानी ADC एक सैन्य अधिकारी होता है जो राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यक्रमों और औपचारिक जिम्मेदारियों में सहयोग करता है। राष्ट्रपति के साथ होने वाले कार्यक्रमों में ADC प्रोटोकॉल और समन्वय से जुड़ी जिम्मेदारियों को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राष्ट्रपति के लिए सामान्य व्यवस्था के अनुसार पांच ADC होते हैं—तीन भारतीय सेना से तथा एक-एक भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना से। इसके अतिरिक्त एक मानद ADC की व्यवस्था भी हो सकती है।
सम्मान के साथ बड़ा व्यक्तिगत त्याग
राष्ट्रपति का ADC बनना किसी सैन्य अधिकारी के लिए बड़े सम्मान और भरोसे की जिम्मेदारी है। लेकिन इस पद की चमक के पीछे कठोर अनुशासन, समय की पाबंदी और निजी जीवन से समझौते की चुनौती भी छिपी है।
मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल के हालिया अनुभवों ने इसी अनदेखे पहलू को चर्चा में ला दिया है—कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था की सेवा करना केवल वर्दी और सम्मान की बात नहीं, बल्कि कई बार व्यक्तिगत इच्छाओं और सामान्य जीवन को पीछे छोड़कर कर्तव्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का नाम भी है।








