UPI MDR Deadline Extended: UPI MDR की डेडलाइन बढ़ी, दिवाली के बाद लागू होगा नियम

Kabir Shukla
0 सेकंड पहलेShare market pe nazar rakhna zaroori ho gaya hai.
Reyansh Joshi
0 सेकंड पहलेBusiness world mein yeh ek badi halachal hai.
Ravi sinha
0 सेकंड पहलेCrypto mein invest karne se pehle aisi khabarein padhni chahiye.
Nidhi kumari
0 सेकंड पहलेRBI aur government ko milkar iska hal nikalna chahiye.
Aarohi Chaudhary
0 सेकंड पहलेYeh decision business community ko buri tarah affect karega.
Harsh Pandya
1 घंटे पहलेRBI aur government ko milkar iska hal nikalna chahiye.
Diya Gupta
1 घंटे पहलेPaise ka khel bahut risk bhara ho gaya hai, sambhal ke chalo.
Priya Iyer
2 घंटे पहलेRBI aur government ko milkar iska hal nikalna chahiye.
UPI MDR की डेडलाइन बढ़ाने की खबर
यूपीआई (UPI) से भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, MDR से जुड़ी प्रस्तावित समयसीमा 15 अक्टूबर से बढ़ाकर दिवाली के बाद कर दी गई है। इस बदलाव का उद्देश्य त्योहारी सीजन के दौरान कारोबारियों को अतिरिक्त समय देना बताया जा रहा है। हालांकि, नियम की अंतिम तारीख और लागू होने की शर्तों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक अधिसूचना से करना जरूरी है।
व्यापारियों को कैसे मिल सकती है राहत
समयसीमा आगे बढ़ने से व्यापारियों को प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था के लिए तैयारी करने का अतिरिक्त समय मिल सकता है। खासकर छोटे दुकानदारों और उन कारोबारियों के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, जो ग्राहकों से डिजिटल भुगतान स्वीकार करते हैं। यदि निर्धारित अवधि तक नया शुल्क लागू नहीं होता है, तो व्यापारियों को उस दौरान प्रस्तावित MDR का अतिरिक्त बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।
MDR नियम और 0.4 प्रतिशत शुल्क का दावा
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ₹2,000 से अधिक के डिजिटल लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने का प्रावधान तय किया गया है। हालांकि, UPI पर शुल्क लगाने से संबंधित इस दावे और इसकी लागू होने की शर्तों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। इसलिए कारोबारियों को किसी भी शुल्क व्यवस्था को लागू मानने से पहले NPCI या संबंधित नियामक की अधिसूचना देखनी चाहिए।
आखिर क्यों बढ़ाई गई समयसीमा
रिपोर्ट के मुताबिक, व्यापारियों और कारोबारियों की ओर से नई व्यवस्था लागू करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया था। इसी वजह से समयसीमा को त्योहारी सीजन के बाद तक बढ़ाने की बात कही गई है। दिवाली के दौरान बाजारों में खरीदारी और डिजिटल लेनदेन बढ़ने की संभावना रहती है, इसलिए भुगतान व्यवस्था में किसी बदलाव का व्यापारियों पर क्या असर होगा, यह महत्वपूर्ण विषय है।
क्या होता है MDR
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो कुछ भुगतान व्यवस्थाओं में व्यापारी से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले लिया जा सकता है। यह ग्राहक द्वारा भुगतान की जाने वाली राशि से अलग शुल्क व्यवस्था होती है। हालांकि, UPI सहित अलग-अलग भुगतान माध्यमों पर शुल्क के नियम एक जैसे नहीं होते। इसलिए किसी विशेष लेनदेन पर MDR लागू है या नहीं, यह संबंधित नियमों और आधिकारिक दिशानिर्देशों पर निर्भर करता है।
फिनटेक कंपनियों पर संभावित असर
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि MDR से जुड़ी खबरों के बाद पेमेंट और फिनटेक कंपनियों के शेयरों में प्रतिक्रिया देखने को मिली। यदि किसी भुगतान व्यवस्था में शुल्क से राजस्व मिलने की उम्मीद हो, तो उससे जुड़ी कंपनियों के कारोबार और निवेशकों की अपेक्षाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, शेयरों में तेजी या गिरावट के कारणों को केवल एक खबर से जोड़ने से पहले बाजार के अन्य कारकों और आधिकारिक जानकारी की भी जांच करनी चाहिए।








