Sensex Nifty Fall: तेल की बढ़ती कीमतों और RBI की दर बढ़ोतरी से शेयर बाजार में गिरावट

Krishna Yadav
0 सेकंड पहलेYeh decision business community ko buri tarah affect karega.
Pihu Agarwal
0 सेकंड पहलेPaise ka khel bahut risk bhara ho gaya hai, sambhal ke chalo.
Kavya Mishra
41 सेकंड पहलेFinancial planning sochni hogi ab naye sir se.
Aryan Malhotra
45 मिनट पहलेYeh decision business community ko buri tarah affect karega.
Myra Dubey
1 घंटे पहलेPaise ka khel bahut risk bhara ho gaya hai, sambhal ke chalo.
Ravi sinha
2 घंटे पहलेEconomy par iska kya asar padega, sochne wali baat hai.
Ada khan
3 घंटे पहलेEconomy par iska kya asar padega, sochne wali baat hai.
Sonu rai
5 घंटे पहलेCrypto mein invest karne se pehle aisi khabarein padhni chahiye.
शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी 173.05 अंक टूटकर 22,603.05 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 429.11 अंक गिरकर 72,638.70 पर पहुंच गया। बाजार में गिरावट के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से रेपो रेट बढ़ाए जाने को प्रमुख कारण माना गया। अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स भी गिरावट के साथ बंद हुए।
RBI ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.50 फीसदी किया
भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50 फीसदी कर दिया है। यह करीब चार साल में आरबीआई की पहली दर वृद्धि बताई गई है। ब्याज दर बढ़ने से फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की लागत बढ़ सकती है और इसका असर उपभोक्ताओं की EMI पर पड़ने की संभावना है।
तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड करीब 101 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है, इसलिए तेल की कीमत बढ़ने से महंगाई, व्यापार घाटे और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
किन सेक्टरों पर पड़ा दबाव
बाजार में मेटल, ऑटो, एफएमसीजी और आईटी शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। वहीं कुछ निजी बैंकिंग शेयरों में मजबूती दिखाई दी। विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंची ब्याज दरों का असर ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट और उपभोक्ता खर्च से जुड़े क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
रुपये पर भी निवेशकों की नजर
आरबीआई के फैसले के बाद भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 96.78 के स्तर पर बंद हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशक कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर नजर रखेंगे। ऊंची ऊर्जा कीमतों और सख्त मौद्रिक नीति के बीच निकट अवधि में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना जताई गई है।








