Hunkkaar Series Review: ‘हुंकार’ में अनीत पद्दा का दमदार अभिनय

Sonu rai
0 सेकंड पहलेFilmi duniya ka yeh drama khatam hone wala nahi.
Dhruv Bhatt
1 घंटे पहलेCelebrity ki yeh baat sun ke haiaran reh gaye.
Aarohi Chaudhary
2 घंटे पहलेEntertainment duniya mein naya chapter shuru ho gaya.
Diya Gupta
3 घंटे पहलेEntertainment duniya mein naya chapter shuru ho gaya.
Neha Tripathi
4 घंटे पहलेCelebrity ki yeh baat sun ke haiaran reh gaye.
Pihu Agarwal
5 घंटे पहलेFilmi duniya ka yeh drama khatam hone wala nahi.
Ravi sinha
6 घंटे पहलेYeh khabar social media par khub viral hogi.
Krishna Yadav
7 घंटे पहलेYeh show sach mein zabardast hai, sabko dekhna chahiye.
कहानी का आधार ‘हुंकार: द रोर’ एक सोशल थ्रिलर और कोर्ट रूम ड्रामा है। कहानी 17 साल की मीनू रावत के इर्द-गिर्द घूमती है, जो मध्य प्रदेश के चर्चित संत बापजी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाती है। मामले की जांच ACP जसलीन सिंह सोनी करती हैं, जबकि केस आगे अदालत तक पहुंचता है।
कोर्ट में मामला कहानी आगे बढ़ने पर मीनू के आरोपों और उसकी उम्र से जुड़े सवाल सामने आते हैं। अदालत में उसकी ओर से जीशान अयूब और विपक्ष की तरफ से राम कपूर वकील की भूमिका में दिखाई देते हैं। केस के दौरान सामने आने वाली नई जानकारियां कहानी का रुख बदलने लगती हैं और दर्शक के सामने कई सवाल खड़े होते हैं।
कहानी में सवाल क्या मीनू ने अपनी उम्र को लेकर गलत जानकारी दी? क्या उसके आरोप सही हैं या उसके पीछे कोई दूसरी कहानी है? क्या बापजी वास्तव में दोषी हैं? पुलिस जांच और अदालत की कार्यवाही के दौरान इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश की गई है।
निर्देशन और प्रस्तुति नित्या मेहरा और करण डी. कपाड़िया के निर्देशन में बनी छह एपिसोड की यह सीरीज तकनीकी स्तर पर प्रभावी नजर आती है। मध्य प्रदेश के ओरछा और आसपास के इलाकों को कहानी के माहौल के लिए इस्तेमाल किया गया है। सिनेमैटोग्राफी, लोकेशन और एडिटिंग सीरीज की प्रस्तुति को मजबूत बनाते हैं।
कोर्ट रूम ड्रामा सीरीज का कोर्ट वाला हिस्सा इसकी प्रमुख खूबियों में शामिल है। जीशान अयूब और राम कपूर के बीच होने वाली कानूनी बहस कहानी को गति देती है। हालांकि कई जगहों पर घटनाक्रम पहले से अनुमान लगाने योग्य महसूस होता है।
अभिनय मजबूत सीरीज की सबसे प्रभावी चीज इसकी स्टारकास्ट है। ‘सैयारा’ के बाद अनीत पद्दा ने मीनू के किरदार में गंभीर और भावनात्मक अभिनय किया है। फातिमा सना शेख ने ACP जसलीन सिंह सोनी की भूमिका को प्रभावी ढंग से निभाया है। जीशान अयूब और राम कपूर भी वकीलों के किरदार में अच्छा प्रभाव छोड़ते हैं।
अन्य कलाकार पत्रकार की भूमिका में अर्जुन माथुर का काम भी ध्यान खींचता है। वहीं बापजी के किरदार में रघुबीर यादव का चयन कुछ दर्शकों को अपेक्षाकृत कम प्रभावी लग सकता है।
क्या कमजोर है सीरीज का विषय दिलचस्प होने के बावजूद इसमें पर्याप्त नयापन महसूस नहीं होता। धर्म और आस्था की आड़ में अपराध तथा उसके आसपास की जांच का विषय पहले भी कई वेब सीरीज में दिखाई दे चुका है। इसके अलावा करीब 50 मिनट के छह एपिसोड कुछ हिस्सों में जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं।
फाइनल राय ‘हुंकार’ में मजबूत कलाकार, अच्छी लोकेशन और कोर्ट रूम ड्रामा इसकी प्रमुख खूबियां हैं, लेकिन कहानी की पूर्वानुमेयता और लंबा स्क्रीन टाइम इसकी गति को प्रभावित करता है। कोर्ट रूम ड्रामा और सोशल थ्रिलर पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह सीरीज रुचिकर हो सकती है।








