AI Voice Clone Scam: बेटे-बेटी की आवाज में कॉल कर मांगे जा सकते हैं पैसे

बेटे-बेटी की आवाज में कॉल कर मांगे जा सकते हैं पैसे
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Kunal Rao

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0 सेकंड पहले

Peedit ko jald se jald nyay milna chahiye.

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कल्पना कीजिए कि अचानक आपके फोन पर कॉल आती है। दूसरी तरफ आपके बेटे या बेटी की घबराई हुई आवाज सुनाई देती है—“मेरा एक्सीडेंट हो गया है, तुरंत पैसे भेज दो।” आवाज बिल्कुल पहचान में आती है और सामने वाला जल्द से जल्द मदद करने की अपील करता है। ऐसे मामले में बिना पुष्टि किए पैसे भेजना भारी पड़ सकता है। साइबर अपराधी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज की हूबहू नकल यानी AI Voice Clone तैयार कर रहे हैं।

 

कुछ सेकंड की आवाज से तैयार हो सकता है क्लोन
वॉयस क्लोनिंग तकनीक में किसी व्यक्ति की आवाज के छोटे से सैंपल का इस्तेमाल करके उसकी डिजिटल कॉपी तैयार की जाती है। सोशल मीडिया वीडियो, रील, पॉडकास्ट, वीडियो कॉल या दूसरे ऑनलाइन कंटेंट से आवाज का सैंपल हासिल किया जा सकता है। इसके बाद AI की मदद से उसी आवाज में नए शब्द और वाक्य तैयार किए जा सकते हैं। आवाज में घबराहट या भावनात्मक अंदाज जोड़कर कॉल को और ज्यादा विश्वसनीय बनाया जा सकता है।

 

‘मदद’ के बहाने फेस और वॉयस डेटा भी चुराने की कोशिश
हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस की ओर से बताए गए एक अन्य तरीके में साइबर ठग भीड़भाड़ वाली जगहों जैसे मॉल, मेट्रो स्टेशन या बाजार में लोगों से मोबाइल से जुड़ी छोटी मदद मांग सकते हैं। ठग खुद को तकनीकी रूप से कम जानकार बताकर किसी व्यक्ति से फोन में ऐप खोलने, वीडियो कॉल करने या QR कोड स्कैन करने जैसी मदद मांग सकता है। इस दौरान पहले से रिकॉर्डिंग मोड में मौजूद फोन से कुछ सेकंड का चेहरा और आवाज का वीडियो कैप्चर किया जा सकता है।

 

फेस-वॉइस क्लोनिंग से बनाए जा सकते हैं डीपफेक
रिकॉर्ड किए गए चेहरे और आवाज के सैंपल का इस्तेमाल AI आधारित डीपफेक तैयार करने में किया जा सकता है। साइबर अपराधी वॉयस क्लोन के जरिए किसी परिचित की आवाज में फोन कर सकते हैं, जबकि फेस क्लोनिंग के जरिए फर्जी वीडियो या वीडियो कॉल तैयार करने की कोशिश की जा सकती है। इस तरह किसी व्यक्ति की डिजिटल पहचान का इस्तेमाल उसके परिवार, दोस्तों या सहकर्मियों को धोखा देने के लिए किया जा सकता है।

 

सबसे बड़ा हथियार है आपकी घबराहट
AI वॉयस क्लोन स्कैम की सबसे खतरनाक बात यह है कि इसमें अपराधी तकनीक के साथ-साथ भावनाओं का भी इस्तेमाल करते हैं। “एक्सीडेंट हो गया”, “तुरंत पैसे चाहिए”, “किसी को मत बताना” या “अभी ट्रांसफर करो” जैसे शब्द पीड़ित को सोचने का समय नहीं देते। आवाज परिचित होने के कारण व्यक्ति कई बार बिना स्वतंत्र पुष्टि किए भुगतान कर देता है।

 

परिवार के लिए बनाएं ‘सेफ वर्ड’ और रखें कॉल-बैक नियम
ऐसी ठगी से बचने का सबसे आसान तरीका है कि परिवार में पहले से एक Safe Word तय किया जाए, जिसे केवल परिवार के सदस्य जानते हों। अगर किसी करीबी की आवाज में अचानक पैसे मांगने वाली कॉल आए तो उसी कॉल पर भरोसा करने के बजाय फोन काटकर उस व्यक्ति के पुराने और भरोसेमंद नंबर पर खुद कॉल करें। जरूरत पड़े तो किसी दूसरे परिवार के सदस्य से भी संपर्क करके स्थिति की पुष्टि करें।

 

बिजनेस में सिर्फ आवाज पर न करें भुगतान
कंपनियों और संस्थानों के लिए AI Voice Clone Scam बड़ा वित्तीय जोखिम बन सकता है। किसी CEO, CFO या वरिष्ठ अधिकारी की आवाज में आए भुगतान संबंधी निर्देश को अकेले आधार बनाकर रकम ट्रांसफर नहीं करनी चाहिए। बड़ी रकम के भुगतान के लिए dual approval, आधिकारिक ईमेल या सिस्टम से सत्यापन और पहले से तय callback प्रक्रिया अनिवार्य रखना ज्यादा सुरक्षित है। किसी भी कर्मचारी को सिर्फ “बॉस की urgent call” के दबाव में कंपनी की वित्तीय प्रक्रिया तोड़ने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।

 

“मेरे साथ ऐसा नहीं होगा” वाली सोच से बचें
AI आधारित फ्रॉड किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं हैं। पढ़े-लिखे और तकनीक की अच्छी समझ रखने वाले लोग भी भावनात्मक दबाव में गलती कर सकते हैं। इसलिए किसी आवाज को पहचान लेना अब पर्याप्त सुरक्षा नहीं है। आवाज पहचानें, लेकिन भुगतान से पहले पहचान की पुष्टि जरूर करें।

 

फेस और वॉयस डेटा साझा करते समय रहें सतर्क
अनजान लोगों को अपना फोन देकर ऐप खोलने, वीडियो रिकॉर्ड करने या कैमरे के सामने अनावश्यक रूप से खड़े होने से बचें। सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वीडियो और आवाज के कंटेंट की मात्रा पर भी ध्यान दें। खासकर ऐसी जानकारी सार्वजनिक न करें जिसका इस्तेमाल कोई व्यक्ति आपकी पहचान या रिश्तों का फायदा उठाने के लिए कर सकता हो।

 

अगर ठगी हो जाए तो तुरंत करें शिकायत
अगर AI Voice Clone या Face-Voice Cloning के जरिए ठगी हो जाती है, तो घबराकर समय बर्बाद न करें। तुरंत अपने बैंक से संपर्क करके संदिग्ध लेन-देन पर आवश्यक कार्रवाई की मांग करें। भारत में साइबर फ्रॉड की शिकायत के लिए 1930 पर संपर्क किया जा सकता है और cybercrime.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। कॉल नंबर, चैट, स्क्रीनशॉट, ट्रांजैक्शन डिटेल, UPI ID और अन्य डिजिटल सबूत सुरक्षित रखें। जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, उतनी जल्दी संबंधित एजेंसियों के स्तर पर कार्रवाई की संभावना बन सकती है।

 

एक Safe Word और एक Callback बचा सकता है बड़ा नुकसान
AI की तकनीक लगातार बेहतर हो रही है, लेकिन इससे बचने का सबसे प्रभावी तरीका आज भी वही है—रुकें, सोचें और दूसरी जगह से पुष्टि करें। परिचित आवाज सुनाई देने का मतलब यह नहीं कि कॉल करने वाला व्यक्ति वास्तव में वही है। परिवार में Safe Word, callback और “तुरंत पैसे नहीं भेजेंगे” जैसे स्पष्ट नियम बनाकर इस तरह के फ्रॉड का जोखिम काफी कम किया जा सकता है। साइबर अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत आपकी घबराहट है और आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा एक शांत दिमाग है।

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