Noida cyber fraud case: 76 वर्षीय महिला को बनाया डिजिटल अरेस्ट

Rohan Desai
42 मिनट पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Riya Jain
10 घंटे पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Yash Kulkarni
10 घंटे पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Myra Dubey
12 घंटे पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Dev Kapoor
13 घंटे पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Anil Sen
14 घंटे पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Reyansh Joshi
16 घंटे पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
नोएडा की 76 वर्षीय महिला सरला देवी को साइबर ठगों ने कथित तौर पर करीब 23 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अपने नियंत्रण में रखा। ठगों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया और महिला को डराया कि उनके नाम से बैंक खाते खोले गए हैं जिनका इस्तेमाल अवैध गतिविधियों और आतंकी फंडिंग में किया जा रहा है। India Today और NDTV के अनुसार महिला को Pahalgam आतंकी हमले की फंडिंग से भी जोड़कर डराया गया था। गिरफ्तारी वारंट और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर ठगों ने महिला से लगातार संपर्क बनाए रखा।
आठ ट्रांजैक्शन में 43.70 लाख रुपये ट्रांसफर
साइबर ठगों ने महिला से जांच और कथित सुरक्षा राशि के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों और QR कोड के जरिए पैसे ट्रांसफर करवाए। NDTV के मुताबिक महिला ने कुल आठ भुगतान किए, जिनकी रकम करीब 43.70 लाख रुपये थी। पहली रकम 70 हजार रुपये और सबसे बड़ी रकम 11 लाख रुपये बताई गई है। ठगों ने महिला को भरोसा दिलाया था कि जांच पूरी होने के बाद रकम वापस कर दी जाएगी। इस तरह डर और दबाव बनाकर उसकी जमा पूंजी ठग ली गई।
Pahalgam हमले का डर दिखाकर बनाया दबाव
ठगों ने महिला को बताया कि उसके नाम पर खोले गए बैंक खातों का इस्तेमाल ड्रग्स तस्करी, हवाला, ऑनलाइन जुए और आतंकी गतिविधियों के लिए किया गया है। इसके साथ ही Pahalgam आतंकी हमले से जुड़े फंडिंग के आरोप का डर भी दिखाया गया। महिला को कथित गिरफ्तारी वारंट दिखाकर कानूनी कार्रवाई की धमकी दी गई। वीडियो कॉल के जरिए लगातार निगरानी रखने के कारण महिला काफी समय तक ठगों के दबाव में रही। बाद में उसे शक हुआ और उसने कानूनी सलाह लेने के बाद भुगतान रोक दिया।
राजस्थान से मदन कुमार गिरफ्तार
मामले में नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने राजस्थान के हनुमानगढ़ से मदन कुमार को गिरफ्तार किया। ABP की रिपोर्ट के अनुसार आरोपी के खाते में ठगी की रकम का एक हिस्सा ट्रांसफर हुआ था और पुलिस ने उसके कब्जे से दो मोबाइल फोन बरामद किए। पुलिस ने ठगी से जुड़े बैंक खातों की जांच करते हुए आरोपी तक पहुंच बनाई। मामले में पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
31 अगस्त को दर्ज हुआ था मामला
गिरफ्तारी से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता की शिकायत पर 31 अगस्त 2025 को साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने उन बैंक खातों और लेन-देन की जानकारी जुटाई जिनके जरिए रकम ट्रांसफर हुई थी। जांच के दौरान पुलिस को आरोपी मदन कुमार के खाते तक पहुंच मिली। इसके बाद राजस्थान में कार्रवाई कर उसे गिरफ्तार किया गया। पुलिस की जांच अभी जारी है और अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बढ़ रहे साइबर अपराध
यह मामला डिजिटल अरेस्ट के जरिए वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाने वाले साइबर अपराधों की गंभीरता को दिखाता है। ठग आमतौर पर खुद को पुलिस, CBI, ED या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ित को किसी गंभीर अपराध में फंसाने की धमकी देते हैं। इसके बाद जांच, जमानत या सुरक्षा राशि के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं। ऐसे मामलों में किसी भी सरकारी या जांच एजेंसी के अधिकारी को ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर नहीं करने चाहिए और तत्काल साइबर अपराध की शिकायत करनी चाहिए।








