Boss Scam Alert: CEO-MD बनकर ठग रहे साइबर अपराधी

CEO-MD बनकर ठग रहे साइबर अपराधी
प्रतिक्रियाएँ
Saanvi Pandey

Saanvi Pandey

0 सेकंड पहले

CBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.

CommentsReactionsFeedback

साइबर अपराध की दुनिया में ठगी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। अब साइबर ठग कंपनियों के CEO, MD और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल कर कर्मचारियों को निशाना बना रहे हैं। इस नए तरीके को 'बॉस स्कैम' (Boss Scam) कहा जा रहा है। इसमें ठग WhatsApp, ईमेल, Microsoft Teams और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए कर्मचारियों, खासकर फाइनेंस और अकाउंट्स टीम को तत्काल पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश देते हैं।
पूंजी बाजार नियामक SEBI ने 17 जुलाई को लिस्टेड कंपनियों और अपने नियमन के दायरे में आने वाली संस्थाओं को इस तरह के साइबर फ्रॉड से सावधान रहने की सलाह दी। वहीं, इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने भी कंपनियों को CEO और MD इम्पर्सोनेशन फ्रॉड के बढ़ते मामलों को लेकर सतर्क किया है।

 

कैसे काम करता है Boss Scam?
इस साइबर फ्रॉड में अपराधी सबसे पहले किसी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी की पहचान को निशाना बनाते हैं। कई बार वे अधिकारी की फोटो, नाम और अन्य सार्वजनिक जानकारी का इस्तेमाल कर फर्जी WhatsApp प्रोफाइल या ईमेल अकाउंट तैयार करते हैं। इसके बाद कर्मचारी को ऐसा संदेश भेजा जाता है, जिसमें किसी जरूरी और गोपनीय भुगतान का हवाला देकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करने को कहा जाता है।
ठग अक्सर यह माहौल बनाने की कोशिश करते हैं कि भुगतान बेहद जरूरी है और इसमें देरी नहीं की जा सकती। कई बार कर्मचारियों को किसी नए बैंक अकाउंट में रकम भेजने या किसी अन्य व्यक्ति से इस बारे में चर्चा न करने का निर्देश भी दिया जाता है।

 

ZIP फाइल और मैलवेयर के जरिए भी हो रहा हमला
Boss Scam का एक खतरनाक तरीका मैलवेयर से जुड़ा है। साइबर अपराधी कई बार अकाउंट स्टेटमेंट, इनवॉइस, वित्तीय दस्तावेज या नियामकीय अनुपालन (Compliance) से जुड़े दस्तावेज के नाम पर ZIP या अन्य कंप्रेस्ड फाइल भेजते हैं।
यदि कर्मचारी ऐसी संदिग्ध फाइल को डाउनलोड करके Windows डिवाइस पर खोल देता है, तो उसमें मौजूद मैलवेयर सिस्टम को संक्रमित कर सकता है। कुछ मामलों में यह मैलवेयर सक्रिय WhatsApp Web सेशन तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकता है। इसके बाद ठग उसी अकाउंट या पहचान का इस्तेमाल कर फाइनेंस टीम को फर्जी भुगतान संबंधी निर्देश भेज सकते हैं।

 

AI और Deepfake से भी असली अधिकारी जैसी पहचान बनाने की कोशिश
साइबर अपराधी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। Voice Cloning और Deepfake Video जैसी तकनीकों के जरिए ठग किसी वरिष्ठ अधिकारी की आवाज या वीडियो कॉल जैसी स्थिति तैयार कर सकते हैं। इसका मकसद कर्मचारी को यह विश्वास दिलाना होता है कि निर्देश वास्तव में कंपनी के CEO, MD या किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी की ओर से आया है।
ऐसे मामलों में केवल आवाज सुनकर या वीडियो कॉल देखकर भरोसा करना भी जोखिम भरा हो सकता है। खासकर बड़ी रकम के ट्रांसफर से पहले स्वतंत्र माध्यम से निर्देश की पुष्टि करना बेहद जरूरी है।

 

बॉस की फोटो देखकर तुरंत पैसे ट्रांसफर कर देते हैं कर्मचारी
कई मामलों में ठग वरिष्ठ अधिकारी की प्रोफाइल फोटो लगाकर कर्मचारियों से संपर्क करते हैं। कर्मचारी फोटो और नाम देखकर यह मान लेते हैं कि मैसेज वास्तव में उनके बॉस ने भेजा है और बिना अतिरिक्त जांच के भुगतान कर देते हैं। ठग अक्सर 'Urgent Payment', 'Confidential Transaction' या 'Immediate Transfer' जैसे दबाव वाले निर्देशों का इस्तेमाल करते हैं। यही जल्दबाजी कर्मचारियों से गलती करवाने का सबसे बड़ा कारण बनती है।

 

केस स्टडी: पूर्व सांसद के स्टाफ से करोड़ों की ठगी
ऐसे ही एक मामले में साइबर ठगों ने एक पूर्व राज्यसभा सांसद के स्टाफ को निशाना बनाकर कथित तौर पर करीब ₹7.8 करोड़ की रकम ट्रांसफर करवा ली। रिपोर्ट के अनुसार, ठगों ने WhatsApp पर प्रोफाइल फोटो और पहचान का इस्तेमाल करते हुए स्टाफ सदस्य को विश्वास में लिया और कई ट्रांजैक्शन के जरिए रकम ट्रांसफर कराई।
यह मामला दिखाता है कि वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का गलत इस्तेमाल कर किया जाने वाला Boss Scam कितना बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है।

 

कंपनियों में फर्जी CEO बनकर पेमेंट की मांग
दिल्ली-NCR समेत कई जगहों की निजी कंपनियों में भी इस तरह के मामलों की शिकायतें सामने आती रही हैं। साइबर ठग CEO या वरिष्ठ अधिकारियों का नाम और फोटो इस्तेमाल कर कर्मचारियों को संदेश भेजते हैं और किसी नए बैंक खाते में तुरंत भुगतान करने के लिए कहते हैं। कई बार कर्मचारियों की सतर्कता के कारण बड़ी रकम ट्रांसफर होने से बच जाती है, लेकिन जहां बिना पुष्टि के भुगतान किया जाता है, वहां कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

 

SEBI ने कंपनियों को दी ये अहम सलाह
SEBI ने कंपनियों और रेगुलेटेड संस्थाओं को सलाह दी है कि ईमेल, WhatsApp या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए मिले किसी भी फंड ट्रांसफर निर्देश पर बिना पुष्टि के कार्रवाई न करें। किसी वरिष्ठ अधिकारी से संबंधित निर्देश मिलने पर भरोसेमंद और स्वतंत्र माध्यम से सीधे संपर्क करके इसकी पुष्टि करनी चाहिए।
नियामक ने यह भी सलाह दी है कि केवल सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर मिले संदेश के आधार पर फंड ट्रांसफर को मंजूरी न दी जाए। किसी भी Executable या Compressed File को खोलने से पहले भेजने वाले की पहचान की पूरी तरह पुष्टि करना जरूरी है।

 

Boss Scam से बचने के लिए अपनाएं ये सुरक्षा उपाय

  1. बड़ी पेमेंट से पहले कॉल करें: WhatsApp या ईमेल पर मिले पेमेंट निर्देश को मानने से पहले संबंधित CEO, MD या वरिष्ठ अधिकारी से फोन या किसी भरोसेमंद माध्यम से सीधे पुष्टि करें।
  2. संदिग्ध ZIP और EXE फाइल न खोलें: अनजान व्यक्ति या संदिग्ध स्रोत से मिली ZIP, APK या Executable File को डाउनलोड या ओपन न करें।
  3. नए बैंक अकाउंट की दोबारा जांच करें: किसी नए खाते में भुगतान करने से पहले बैंक डिटेल को स्वतंत्र माध्यम से वेरिफाई करें।
  4. जल्दबाजी में फैसला न लें: 'अभी भुगतान करें' या 'किसी को न बताएं' जैसे निर्देश साइबर फ्रॉड का संकेत हो सकते हैं।
  5. WhatsApp Web सेशन चेक करें: नियमित रूप से Linked Devices की जांच करें और जिन डिवाइस या सेशन का इस्तेमाल नहीं हो रहा है, उन्हें लॉगआउट कर दें।
  6. कर्मचारियों को साइबर ट्रेनिंग दें: कंपनियों को फाइनेंस और अकाउंट्स टीम समेत कर्मचारियों को नियमित रूप से साइबर सुरक्षा और फ्रॉड अवेयरनेस की ट्रेनिंग देनी चाहिए।

 

एक छोटी सी सावधानी बचा सकती है कंपनी के करोड़ों रुपये
Boss Scam में साइबर अपराधी तकनीक के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक दबाव का भी इस्तेमाल करते हैं। बॉस का नाम, फोटो और पद देखकर कर्मचारी स्वाभाविक रूप से निर्देश पर भरोसा कर सकते हैं। ऐसे में किसी भी फंड ट्रांसफर से पहले 'Verify Before You Transfer' का नियम अपनाना बेहद जरूरी है।
कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी के नाम से आया कोई भी संदिग्ध या अचानक मिला पेमेंट निर्देश हो तो जल्दबाजी के बजाय पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। एक फोन कॉल या अतिरिक्त वेरिफिकेशन कंपनी को करोड़ों रुपये के साइबर फ्रॉड से बचा सकता है।

प्रतिक्रियाएँ
Saanvi Pandey

Saanvi Pandey

0 सेकंड पहले

CBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.

CommentsReactionsFeedback

खबरे और भी है...