भारत -सिंगापुर के बीच अहम बैठक: डिजिटल सहयोग पर बनी रणनीति

Vivaan Gupta
0 सेकंड पहलेArtificial Intelligence ab aur tezi se aage badh raha hai.
Diya Gupta
0 सेकंड पहलेNaye zamane ki nai technology — sab samjhein, sab apnayein.
Ravi sinha
0 सेकंड पहलेTechnology ki yeh khabar future badal sakti hai!
Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेIs research se bahut logon ko faayda hoga.
Ayaan Khan
0 सेकंड पहलेNaye zamane ki nai technology — sab samjhein, sab apnayein.
Myra Dubey
1 घंटे पहलेYeh app/gadget sach mein game changer sabit hoga.
Priya Iyer
2 घंटे पहलेDigital India ka sapna aur karib aa raha hai.
सिंगापुर में चौथी भारत सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में वरिष्ठ मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया। विदेश मंत्री एस जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे। दोनों देशों के मंत्रियों ने आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत और सिंगापुर के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना रहा।
डिजिटल तकनीक और DPI पर जोर
बैठक में डिजिटल तकनीक और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने डिजिटल कनेक्टिविटी, फिनटेक और तकनीकी नवाचार को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की। भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुभव और सिंगापुर की तकनीकी क्षमताओं को साथ लाने पर जोर दिया गया। दोनों देश सुरक्षित और प्रभावी डिजिटल सेवाओं के विकास में सहयोग बढ़ाना चाहते हैं। इससे डिजिटल अर्थव्यवस्था और नए कारोबारी अवसरों को गति मिलने की उम्मीद है।
सेमीकंडक्टर और AI में साझेदारी
भारत और सिंगापुर ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी सहमति जताई। दोनों देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। सुरक्षित AI तकनीक के इस्तेमाल और साइबर खतरों से निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों की संभावनाएं तलाशीं गईं। उन्नत तकनीक के साथ कौशल विकास को भी इस साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया। इससे भारत में तकनीकी विनिर्माण और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
नए MoU पर हुए हस्ताक्षर
मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान दूरसंचार, ब्रॉडकास्टिंग और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए नए समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों देशों ने उन्नत विनिर्माण और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने पर भी सहमति जताई। सिंगापुर के छोटे और मध्यम उद्योगों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने तकनीकी अनुभव और विशेषज्ञता साझा करने पर जोर दिया। इन समझौतों से दोनों देशों के बीच कारोबारी और औद्योगिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
भारत के लिए सिंगापुर बड़ा निवेश साझेदार
सिंगापुर भारत के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रमुख स्रोतों में शामिल है। वित्त वर्ष 2025-26 में सिंगापुर से भारत में करीब 19.8 अरब डॉलर का निवेश आने की जानकारी दी गई है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में भी पिछले वर्षों में लगातार विस्तार हुआ है। वर्ष 2004-05 में द्विपक्षीय व्यापार करीब 6.7 अरब डॉलर था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर लगभग 36.1 अरब डॉलर हो गया। बढ़ता निवेश और व्यापार दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों की मजबूती को दर्शाता है।
रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई मजबूती
भारत सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण मंच बन चुकी है। इसकी शुरुआत सितंबर 2022 में नई दिल्ली में हुई थी और इसके बाद 2024 में सिंगापुर तथा 2025 में नई दिल्ली में बैठक आयोजित की गई। चौथी बैठक में डिजिटल तकनीक, AI, सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण और कौशल विकास जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों देशों का लक्ष्य व्यापार और निवेश के साथ तकनीकी तथा रणनीतिक सहयोग को भी व्यापक बनाना है। माना जा रहा है कि इस बैठक से भारत और सिंगापुर के व्यापक रणनीतिक संबंधों को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।








