चोरी के मोबाइल से साइबर ठगी, 9 गिरफ्तार: जयपुर-मेरठ तक फैला साइबर ठगी नेटवर्क ध्वस्त

Neha Tripathi
1 महीने पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Pranav Srivastava
1 महीने पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Vivaan Gupta
1 महीने पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Arjun Singh
1 महीने पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Ananya Sharma
1 महीने पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Dev Kapoor
1 महीने पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Nidhi kumari
1 महीने पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Anika Rajput
1 महीने पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
दिल्ली के 88 वर्षीय बुजुर्ग का मोबाइल चोरी होने के बाद खाते से ₹70 हजार निकल गए।साइबर पुलिस ने मामले की तकनीकी जांच शुरू की तो बड़ा नेटवर्क सामने आया।जांच की कड़ियां जयपुर, मेरठ और गाजियाबाद तक पहुंचीं।पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया।मुख्य आरोपी निखिल सोनी को भी पुलिस ने दबोच लिया।मामले की जांच अब गिरोह के अन्य सदस्यों और लेनदेन तक पहुंच रही है।
तीन स्तरों पर चलता था साइबर ठगों का नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक गिरोह अलग-अलग जिम्मेदारियों के साथ तीन स्तरों पर काम करता था।पहले स्तर के सदस्य लोगों के मोबाइल फोन चोरी करते थे।दूसरे स्तर पर फर्जी सिम और म्यूल बैंक खातों की व्यवस्था की जाती थी।तीसरे स्तर की तकनीकी टीम चोरी हुए फोन से बैंक खातों को निशाना बनाती थी।जयपुर से संचालित तकनीकी टीम इस नेटवर्क की अहम कड़ी बताई गई है।पूरी व्यवस्था का इस्तेमाल अवैध तरीके से रकम निकालने के लिए किया जाता था।
बिना सिम के बैंक खाते तक पहुंचने का दावा
जांच में सामने आया कि आरोपी विशेष सॉफ्टवेयर और तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल करते थे।पुलिस के अनुसार, चोरी हुए मोबाइल के जरिए बैंकिंग संबंधी जानकारी तक पहुंच बनाई जाती थी।गिरोह कमजोर सुरक्षा वाले बैंक खातों को निशाना बनाता था।इसके बाद रकम को अलग-अलग बैंक खातों और माध्यमों से ट्रांसफर किया जाता था।इस तरीके से साइबर अपराध को संगठित नेटवर्क का रूप दिया गया था।पुलिस अब इस्तेमाल किए गए तकनीकी संसाधनों की भी जांच कर रही है।
छापेमारी में बड़ी मात्रा में डिजिटल सामान बरामद
पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपियों के ठिकानों से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले।बरामद सामान में 52 मोबाइल फोन और 145 सिम कार्ड शामिल हैं।इसके अलावा 4 लैपटॉप और 2 टैबलेट भी पुलिस के हाथ लगे हैं। जांच टीम ने 70 डेबिट कार्ड और 13 बैंक पासबुक भी बरामद कीं।6 पीओएस मशीनों के साथ करीब ₹4 लाख नकद भी जब्त किया गया।बरामद उपकरणों से नेटवर्क के काम करने के तरीके की जानकारी जुटाई जा रही है।
19 शिकायतों में करीब 65 लाख रुपये की ठगी
पुलिस जांच में इस नेटवर्क के तार कई राज्यों में दर्ज साइबर शिकायतों से जुड़े मिले हैं।राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर 19 शिकायतों का लिंक सामने आया है।इन मामलों में करीब ₹65 लाख की धोखाधड़ी की जानकारी सामने आई है।एक बुजुर्ग के खाते से निकाले गए ₹70 हजार से जांच की शुरुआत हुई थी।जांच आगे बढ़ने पर कथित साइबर अपराध का दायरा काफी बड़ा मिला।पुलिस अब अन्य राज्यों में इसके संभावित कनेक्शन की भी जांच कर रही है।
दिल्ली पुलिस की जांच से जुड़े कई सवाल
9 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब नेटवर्क के बाकी सदस्यों की तलाश कर रही है।जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कितने मोबाइल चोरी किए गए थे।साथ ही ठगी की रकम किन-किन खातों में भेजी गई, इसका पता लगाया जा रहा है।बरामद सिम कार्ड, डेबिट कार्ड और डिजिटल उपकरणों की जांच जारी है।पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ से साइबर ठगी के अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है।इस कार्रवाई ने मोबाइल चोरी के बाद बैंकिंग सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।









