लखनऊ में इंटरनेशनल ठगी का खुलासा: साइबर गैंग का भंडाफोड़, 8 आरोपी हिरासत में

Kunal Rao
3 घंटे पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Vaishali shinde
3 घंटे पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Neel Saxena
3 घंटे पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Kunal Rao
3 घंटे पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Sneha Menon
3 घंटे पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Kavya Mishra
4 घंटे पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Priya Iyer
4 घंटे पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Ritika Ghosh
4 घंटे पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Simran Arora
4 घंटे पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Ada khan
4 घंटे पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Vihaan Patel
10 घंटे पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Anjali Patil
10 घंटे पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Anjali Patil
10 घंटे पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Shruti Bajpai
10 घंटे पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में क्राइम ब्रांच ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। सुशांत गोल्फ सिटी स्थित ओमैक्स रेजिडेंसी (Omaxe Residency) के फ्लैटों में छिपकर चल रहे फर्जी कॉल सेंटर पर देर रात छापेमारी की गई। पुलिस ने मौके से 8 लोगों को हिरासत में लिया है, जो विदेशी नागरिकों खासकर अमेरिका के लोगों को टेक्निकल सपोर्ट के नाम पर ठगी का शिकार बना रहे थे। पॉश सोसायटी में चल रहा था हाईटेक ठगी का अड्डा,क्राइम ब्रांच और सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए ओमैक्स रेजिडेंसी में दबिश दी। पुलिस के मुताबिक, आरोपी हाई-सिक्योरिटी सोसायटी के फ्लैट किराए पर लेकर वहां से अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड चला रहे थे। छापेमारी के दौरान फ्लैट के अंदर पूरा कॉर्पोरेट सेटअप मिला।
लैपटॉप, कंप्यूटर और VoIP उपकरण बरामद
पुलिस ने मौके से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। इनमें हाई-एंड लैपटॉप, डेस्कटॉप कंप्यूटर, मोबाइल फोन, इंटरनेशनल सिम कार्ड, VoIP राउटर और संदिग्ध बैंक दस्तावेज शामिल हैं। इन उपकरणों की मदद से आरोपी विदेशों में बैठे लोगों से संपर्क करते थे।
'ओपनर-क्लोजर' मॉडल से करते थे करोड़ों की ठगी
पूछताछ में गैंग के ठगी करने के नए तरीके का खुलासा हुआ है। गिरोह दो टीमों में काम करता था।ओपनर टीम विदेशी लोगों के कंप्यूटर पर फर्जी वायरस अलर्ट और पॉप-अप भेजकर उन्हें कॉल करने के लिए मजबूर करती थी।इसके बाद कॉल को क्लोजर टीम के पास भेजा जाता था, जो खुद को माइक्रोसॉफ्ट, साइबर एजेंसी या अमेरिकी अधिकारी बताकर डर पैदा करती थी और पैसे ऐंठती थी।
अमेरिकी नागरिक थे मुख्य निशाने पर
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गैंग मुख्य रूप से अमेरिकी नागरिकों को टारगेट करता था। आरोपी फर्जी टेक्निकल सपोर्ट कर्मचारी बनकर लोगों को सिस्टम हैक होने, कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाते थे। इसके बाद गिफ्ट कार्ड, ऑनलाइन ट्रांसफर और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए रकम वसूली जाती थी।
गुजरात और कोलकाता से जुड़े गैंग के तार
जांच में सामने आया है कि कॉल सेंटर के मुख्य संचालक पुनीत वर्मा और देवेंद्र पटेल गुजरात के रहने वाले हैं। वहीं, इस नेटवर्क में काम करने वाले कई तकनीकी कर्मचारी कोलकाता से जुड़े बताए जा रहे हैं। पुलिस अब इनके पूरे नेटवर्क और पैसों के लेन-देन की जांच कर रही है।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई, आगे जांच जारी
एडीसीपी क्राइम किरण यादव के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के बाद पुलिस अब गैंग के विदेशी कनेक्शन, डेटा सप्लाई नेटवर्क और बैंक खातों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।








